मुंबई के कोलाबा, कल्याण में मतदान प्रतिशत पर CEC जताई चिंता, कहा- जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने महाराष्ट्र के कोलाबा और कल्याण जैसे शहरी निर्वाचन क्षेत्रों में कम मतदान पर चिंता व्यक्त की। शुक्रवार को सीईसी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद एक अहम बैठक की। इस दौरान उन्होंने नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों की भी जिक्र किया और कहा कि बस्तर और गढ़चिरौली जैसे क्षेत्र में जब 68 और 78 प्रतिशत मतदान हुआ, तो शहरों में कम मतदान एक चिंता का विषय है। लोगों में मताधिकार के प्रयोग को लेकर जागरूकता की आवश्यकता है।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद बैठक में सीईसी ने राज्य चुनाव अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों और नैतिक आचार संहिता (एमसीसी) के अन्य उल्लंघनों से कड़ी और समय पर कार्रवाई की जाए। कुमार ने यह भी उम्मीद जताई कि सभी उम्मीदवार और पार्टी नेता इस तरह से कार्य करेंगे जिससे उनके भाषणों और सार्वजनिक बातचीत में महिलाओं के प्रति सम्मान दिखाई दे।

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के निर्देश महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले जिला चुनाव अधिकारियों, पुलिस आयुक्तों, एसपी, नगर निगम आयुक्तों और रिटर्निंग अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक के दौरान दिए गए। सीईसी ने कथित तौर पर अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि राजनीतिक दल और उम्मीदवार "किसी भी ऐसे कार्य, कार्य या कथन से बचें जिन्हें महिलाओं के सम्मान और प्रतिष्ठा के प्रतिकूल माना जा सकता है।"
बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि धिकारियों को सभी हितधारकों के लिए उपलब्ध रहने का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों से सभी दलों और उम्मीदवारों के लिए समान अवसर बनाए रखने का आग्रह किया और कहा कि किसी भी तरह से नियमों का उल्लंघन होने पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सीईसी ने बैठक के दौरान अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि उम्मीदवार या उनके एजेंट चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों और निर्देशों का पालन करते हुए चुनावी प्रक्रिया के सभी चरणों में शामिल हों।
मतदाताओं को प्रलोभन पर हो कड़ी निगरानी
सीईसी कुमार ने मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए नकदी, शराब, ड्रग्स या मुफ्त उपहार जैसे प्रलोभन देने के किसी भी प्रयास के खिलाफ कड़ी निगरानी रखने का आह्वान किया। उन्होंने नकदी और कीमती सामान के प्रचलन में दुरुपयोग को रोकने के लिए एम्बुलेंस और वैन जैसे सरकारी वाहनों की निगरानी के महत्व पर जोर दिया।












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