Arun Gawli Family: दाऊद को टक्कर देने वाले डॉन 'Daddy' की पत्नी 'Mummy' पर कितने मुकदमे? बच्चे क्या करते हैं?
Arun Gawli Family Tree: मुंबई की तंग गलियों में 'डैडी' के नाम से दहशत का पर्याय रहे अरुण गवली की जिंदगी एक बार फिर सुर्खियों में है। 3 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद 76 साल के इस पूर्व गैंगस्टर ने 17 साल की जेल यात्रा खत्म की और अपने गढ़ दगड़ी चॉल लौट आए। दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) की D-कंपनी को चुनौती देने वाले गवली पर 46 से ज्यादा केस हैं, जिनमें 10 हत्याओं के आरोप शामिल हैं।
2012 में शिवसेना नेता कमलाकर जामसांडेकर की हत्या के लिए उम्रकैद की सजा पाने वाले गवली की रिहाई उम्र और स्वास्थ्य आधार पर हुई। लेकिन उनकी कहानी सिर्फ अपराध की नहीं - उनका परिवार भी इस दुनिया का अटूट हिस्सा रहा है। पत्नी आशा गवली उर्फ 'मम्मी' पर कितने मुकदमे? बच्चे क्या कर रहे हैं? और दगड़ी चॉल का वो राज क्या है? आइए, इस Explainer में खोलते हैं गवली परिवार की कुंडली...

Don Daddy Arun Gawli- 'डैडी' की दुनिया: दगड़ी चॉल का बादशाह
1955 में अहमदनगर, महाराष्ट्र में जन्मे अरुण गुलाब गवली ने मुंबई के भायखला इलाके की तंग गलियों से अपराध की दुनिया में कदम रखा। दगड़ी चॉल उनका किला था, जहां से उन्होंने 1980-90 के दशक में उगाही, सुपारी किलिंग, और प्रोटेक्शन रैकेट चलाया। बायकुला कंपनी के साथ शुरूआत करने के बाद, गवली ने दाऊद की D-कंपनी से टकराव लिया और अखिल भारतीय सेना (ABS) बनाकर सियासत में कदम रखा। 2004 में वो चिंचपोकली से विधायक बने, लेकिन 2007 में कमलाकर जामसांडेकर की हत्या के मामले में 2012 में उम्रकैद की सजा पाई। 17 साल जेल में बिताने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी उम्र (76 साल) और स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला मानकर जमानत दी।
लेकिन गवली की कहानी सिर्फ उनकी नहीं-उनका परिवार भी इस खौफनाक दुनिया का हिस्सा रहा है। उनकी पत्नी आशा गवली उर्फ 'मम्मी' और बच्चे भी चर्चा में रहे। आइए, जानते हैं इस परिवार की कहानी...

Who Is Arun Gawli Wife Asha Gawli- 'मम्मी' आशा गवली कौन है?
आशा गवली, जिनका असली नाम जुबैदा मुजावर था, ने अरुण से शादी के बाद हिंदू धर्म अपनाया और दगड़ी चॉल की 'मम्मी' बन गईं। वो सिर्फ गवली की पत्नी नहीं, बल्कि उनकी सियासी और अपराधी गतिविधियों की मजबूत साथी रहीं। आशा को दगड़ी चॉल में 'मम्मी' के नाम से डर और सम्मान दोनों मिलता है। उन्होंने 2004 में गवली के विधायक चुनाव में प्रचार का जिम्मा संभाला और कई बार पुलिस की गिरफ्त से अपने पति को बचाने के लिए गाड़ी से पीछा किया।
Asha Gawli Criminal History- मुकदमों का लेखा-जोखा: कितने मुकदमे, कितना खौफ?
आशा गवली पर तीन बड़े मामले दर्ज हैं:-
1. 2018 में दो उगाही (Extortion) केस:
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अप्रैल 2018 में पुणे के मंचर पुलिस स्टेशन में दो उगाही केस दर्ज हुए। पहले मामले में, सुनील कोचर ने शिकायत की कि गवली गैंग के मोबिन मुजावर (आशा का भतीजा), सूरज यादव, और बाला पाठारे ने आशा के नाम का इस्तेमाल कर ₹1 लाख की उगाही की। एक कॉल में 'मम्मी' ने खुद कोचर से कहा, 'मैं मम्मी बोल रही हूं, लड़के जो कह रहे हैं, कर दो।'
- दूसरे मामले में, सावलराम नाइक ने आशा और उनके साथियों पर ₹3.5 लाख की उगाही का आरोप लगाया। आशा ने इन मामलों में अग्रिम जमानत हासिल की थी।
- मुंबई के Economic Offences Wing (EOW) ने आशा पर ₹1.77 करोड़ के फंड दुरुपयोग का केस दर्ज किया। सत्र अदालत ने 2022 में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
- आशा का जवाब: आशा ने इन आरोपों को खारिज किया और उनकी बेटी गीता गवली ने कहा, 'ये झूठे आरोप हैं। कोई भी मम्मी का नाम लेकर उगाही कर सकता है। हम ऐसे छोटे-मोटे पैसे के लिए ऐसा नहीं करेंगे।'
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कौन हैं? गीता बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) की तीन बार की पार्षद हैं और चिंचपोकली क्षेत्र से अखिल भारतीय सेना (ABS) की निगम पार्षद रह चुकी हैं। वो वर्तमान में नागरिक स्वास्थ्य समिति की प्रमुख हैं।
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सियासी शुरुआत: 2007 में अरुण ने गीता को BMC चुनाव लड़ने को कहा। गीता ने कहा, 'मैं कॉलेज से निकली थी, ज्यादा अनुभव नहीं था। पिताजी के नाम और नमस्कार की गर्मजोशी से मैंने चुनाव जीता।'
- पिता का सपना: मिड डे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गीता ने बताया कि अरुण चाहते थे कि वो पायलट बनें, लेकिन उन्होंने सियासत चुनी। 2008 में जब अरुण जेल में थे, तब भी गीता ने उनके प्रभाव को जेल से बाहर तक फैलाया।
- विवाद: गीता ने पिता की 2012 की सजा को 'राजनीतिक साजिश' बताया और कहा, 'MCOCA का गलत इस्तेमाल हुआ। हम हाईकोर्ट में अपील करेंगे।'
- कौन हैं? योगिता कारा फाउंडेशन नाम का एक NGO चलाती हैं, जो सामाजिक कार्यों में सक्रिय है।
- बचपन का डर: योगिता ने बताया कि बचपन में उनकी मां आशा उन्हें और भाई-बहनों को ज्यादा बाहर नहीं खेलने देती थीं, क्योंकि गवली के दुश्मनों और पुलिस की छापेमारी का डर रहता था।
- पैतृक गर्व: योगिता ने अपने परिवार के यदुवंशी मूल पर गर्व जताया, जो भगवान कृष्ण के अनुयायी और चरवाहे थे। वो मध्य प्रदेश के अपने पैतृक गांव जाना चाहती हैं।
- विवाह: 2015 में महेश ने कृतिका आहिर से महालक्ष्मी रेसकोर्स में शादी की। अरुण को इस शादी में शामिल होने के लिए 15 दिन की पैरोल मिली थी। शादी में मुंबई पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया सहित 100-150 पुलिसकर्मी निगरानी के लिए मौजूद थे।
- सार्वजनिक जीवन: महेश की व्यावसायिक या सियासी गतिविधियों की ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं है।
- बचपन का डर: गीता और योगिता ने बताया कि उनका बचपन 'सामान्य' था, लेकिन मां आशा की सख्ती के कारण वो चॉल परिसर में नहीं खेल सकते थे। स्कूल और ट्यूशन ही उनकी दुनिया थी। योगिता ने कहा, 'कुछ सहपाठी हमारे पिता के बारे में सवाल करते थे, लेकिन किसी ने अपमानजनक टिप्पणी नहीं की।'
- अरुण का सियासी सफर: गवली ने 1997 में अखिल भारतीय सेना बनाई और 2004 में चिंचपोकली से विधायक बने। बाल ठाकरे ने उन्हें 'अमची मुलगे' (हमारे लड़के) कहकर समर्थन दिया था, लेकिन बाद में शिवसेना से रिश्ते बिगड़ गए।
- आशा की भूमिका: आशा ने गवली की अनुपस्थिति में गैंग और सियासत को संभाला। वो अरुण की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस गाड़ी का पीछा करती थीं, ताकि 'फर्जी एनकाउंटर' न हो।
- गीता का उदय: गीता ने ABS को सियासी ताकत दी और BMC में परिवार का प्रभाव बनाए रखा।

2. 2022 में फंड दुरुपयोग का केस:
आशा की जिंदगी भी कम रोमांचक नहीं। वो अरुण के साथ जेजुरी और कोल्हापुर की तीर्थयात्रा पर 15 गुंडों के साथ गई थीं। जब अरुण जेल में थे, तो आशा ने दगड़ी चॉल में गैंग की कमान संभाली और पुलिस की नजरों से बचने के लिए रणनीतियां बनाईं।

Arun Gawli Childrens Name- गवली के बच्चे: सियासत, समाजसेवा, या चुपके से जिंदगी?
अरुण और आशा गवली की पांच संतानें हैं-दो बेटे (महेश और योगेश) और तीन बेटियां (गीता, योगिता, और अस्मिता)। इनमें से गीता और योगिता ने सार्वजनिक जीवन में अपनी पहचान बनाई, जबकि बाकी बच्चों की जानकारी सीमित है।
1. गीता गवली (Geeta Gawli):

2. योगिता गवली (Yogita Gawli):
3. महेश गवली (Mahesh Gawli):
4. योगेश और अस्मिता (Yogesh Gawli, Asmita):
इन दोनों के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। वो सार्वजनिक जीवन से दूर रहते हैं और गवली परिवार की गतिविधियों में कम दिखाई देते हैं।

दगड़ी चॉल: गवली परिवार का किला
दगड़ी चॉल भायखला में गवली का गढ़ रहा, जहां से वो अपराध और सियासत की कमान संभालते थे। 1980-90 के दशक में ये चॉल पुलिस और विरोधी गैंग्स के लिए 'नो-एंट्री' जोन थी। अफवाह थी कि चॉल में गवली के लिए गुप्त ठिकाने थे। आशा ने इन अफवाहों को खारिज किया, लेकिन माना कि एक बार पुलिस ने अरुण को सामने वाली चॉल में बिस्तर के नीचे छिपा पकड़ा था।
अब दगड़ी चॉल को MHADA द्वारा रिडेवलपमेंट के लिए तोड़ा जा रहा है, और वहां 40 मंजिला टावर बनेंगे। आशा ने कहा, 'मुझे इस चॉल से यादें हैं। मैं 9 साल की थी जब यहां आई। मेरे बच्चे यहीं पैदा हुए।' गीता ने वादा किया कि चॉल का नवरात्रि उत्सव मैदान संरक्षित रहेगा।
सियासत और अपराध: गवली परिवार का दोहरा चेहरा
अरुण गवली का परिवार मुंबई के अंडरवर्ल्ड और सियासत का अनोखा संगम है। 'डैडी' की रिहाई ने दगड़ी चॉल में फिर से हलचल मचा दी है। 'मम्मी' आशा पर तीन बड़े केस और बच्चे सियासत व समाजसेवा में सक्रिय हैं। क्या ये परिवार फिर से मुंबई की गलियों में खौफ का पर्याय बनेगा, या अब शांत जिंदगी चुनेगा? वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल गवली परिवार की कहानी हर किसी को हैरान करने के लिए काफी है!
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