Arun Gawli Caste: मुंबई अंडरवर्ल्ड के Dawood की बहन को बेवा बनाने वाला Don Daddy किस जाति से? बेटियां भी धाकड़
Arun Gawli Caste: मुंबई अंडरवर्ल्ड की सबसे खतरनाक कहानियों में से एक है अरुण गवली उर्फ 'डैडी' की। दगड़ी चॉल का ये अभेद्य किला 1980-90 के दशक में दाऊद इब्राहिम की D-कंपनी को चुनौती देने वाला था। सबसे सनसनीखेज मोड़ तब आया जब गवली गैंग ने दाऊद की बहन हसीना पारकर के पति इब्राहिम पारकर की हत्या कर दी।
ये हत्या 1992 में JJ हॉस्पिटल शूटआउट के बाद हुई, जिसने दोनों गैंग्स के बीच जंग को और भयंकर बना दिया। अब सवाल ये है कि दाऊद को टक्कर देने वाला ये डॉन किस जाति से था? उसकी बेटियां भी धाकड़ हैं, जो BMC चुनाव 2026 में मैदान में उतरीं। आइए, फैक्ट्स, बैकग्राउंड और परिवार की पूरी कहानी के साथ इसकी गहराई में उतरते हैं...

Don Daddy Arung Gawli Caste: किस जाति से है Don Daddy अरुण गवली?
अरुण गवली (पूरा नाम: अरुण गुलाब अहीर उर्फ अरुण गवली) हिंदू अहीर (यादव) जाति से हैं। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में 'गवली' यादव समुदाय का एक उप-समूह है, जो पारंपरिक रूप से पशुपालन और दूध-दूध से जुड़े व्यवसाय करते हैं। गवली परिवार भी मूल रूप से दूध बेचने का काम करता था, इसलिए उन्हें 'दूधवाला' कहा जाता था। यादव समुदाय OBC श्रेणी में आता है, और महाराष्ट्र में राजनीतिक ताकत रखता है। गवली ने अपनी जाति का इस्तेमाल राजनीति में भी किया - 1997 में अखिल भारतीय सेना (ABS) बनाकर 'हिंदू डॉन' से 'राजनेता' बनने की कोशिश की। 2004 में वो चिंचपोकली (Chinchpokli) से विधायक चुने गए।
Arun Gawli From Milkman to Don: दूधवाले से डॉन तक, अपराध की सीढ़ियां
अरुण गवली का जन्म 17 जुलाई 1955 को महाराष्ट्र के अहमदनगर में हुआ। मुंबई के भायखला में दूध बेचने वाले परिवार से ताल्लुक रखने वाले गवली ने छोटे-मोटे अपराधों से शुरुआत की। 1980 के दशक में वो दाऊद इब्राहिम के लिए काम करने लगे, लेकिन बाद में अलग होकर अपना गैंग बनाया। दगड़ी चॉल उनका किला बनी, जहां से उगाही, सुपारी किलिंग, ड्रग्स और प्रोटेक्शन रैकेट चलते थे। सबसे बड़ा टकराव दाऊद से हुआ - 1992 में JJ हॉस्पिटल शूटआउट में दाऊद के आदमी इब्राहिम पारकर (हसीना पारकर के पति) की हत्या कर दी, जिससे दाऊद ने बदला लिया। गवली पर 46 से ज्यादा केस हैं, जिनमें 10 हत्याएं शामिल हैं। 2007 में शिवसेना नेता कमलाकर जामसांडेकर की हत्या के लिए 2012 में उम्रकैद हुई। 3 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली, और वो दगड़ी चॉल लौट आए।

Arun Gawli Political History: राजनीति में कदम- धमक से बदला माहौल
1997 में गवली ने अखिल भारतीय सेना (ABS) बनाई। शिवसेना से मतभेद के बाद उन्होंने 'हिंदू डॉन' से 'राजनेता' बनने की कोशिश की। 2004 में चिंचपोकली से विधायक चुने गए। इस कदम ने मध्य मुंबई के 70 वार्डों में चुनावी समीकरण बदल दिए। बाल ठाकरे ने उन्हें 'अमची मुलगे' कहा था, लेकिन बाद में रिश्ते बिगड़े। 2008 में जामसांडेकर हत्या केस में गिरफ्तारी से सियासी करियर खत्म हो गया।

Arun Gawli Daughters Geeta-Yogita: बेटियां भी धाकड़, BMC चुनाव 2026 में मैदान में
अरुण गवली की रिहाई के बाद उनकी बेटियां BMC चुनाव 2026 में उतरीं। ABS के टिकट पर दोनों लड़ रही हैं:
- गीता गवली (Geeta Gawli, उम्र 42): तीन बार की पूर्व पार्षद। वार्ड 212 (Byculla-Agripada, महिलाओं के लिए आरक्षित) से लड़ रही हैं। 2017 में इसी वार्ड से जीती थीं। कहा, 'मेरा काम ही मेरा कॉन्फिडेंस है। रिडेवलपमेंट से वोटर शिफ्ट हो रहा है, लेकिन लोग मेरे काम को जानते हैं।' मुख्य टक्कर BJP के उम्मीदवार से।
- योगिता गवली (Yogita Gawli, उम्र 37): पहली बार चुनाव लड़ रही हैं। वार्ड 207 (Byculla East-West, Chinchpokli-Mazgaon) से ABS टिकट पर। कारा फाउंडेशन NGO चलाती हैं। कहा, 'लोगों ने कहा कि परिवार का कोई सदस्य प्रतिनिधि बने।' टक्कर BJP और अन्य पार्टियों से।
दोनों बेटियां पिता की विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। गीता ने कहा, 'पापा जेल में थे तो हमने उनके सपनों को आगे बढ़ाया।'
उठते सवाल: क्या गवली फैक्टर काम करेगा?
- यादव (अहीर) समुदाय का वोट बैंक Byculla में कितना प्रभाव डालेगा?
- रिडेवलपमेंट से वोटर शिफ्ट हो रहा है, क्या प्रभाव पड़ेगा?
- ABS कितनी सीटें जीत पाएगी या सिर्फ प्रतीकात्मक रहेगी?
अरुण गवली की कहानी दूधवाले से डॉन और फिर राजनेता बनने की है। उनकी बेटियां BMC चुनाव में मैदान में उतरकर परिवार की धाक को सियासत में जीवित रख रही हैं। 15 जनवरी 2026 को मतदान के बाद 16 जनवरी को नतीजों से साफ होगा कि 'डैडी' की विरासत कितनी मजबूत है।












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