Amit Shah बोले- 'एक ही शिवसेना बची है', उद्धव गुट में 6 सांसदों की बगावत के बाद अमित शाह के बयान ने मचाई खलबली

Amit Shah Declares Eknath Shinde Shiv Sena Real: महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों गुटों में चल रहे घमासान में अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भी एंट्री हो गई हैं। सोल्‍हापुर में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे पर करारा हमला बोला है और शिवसेना में मची हालिया बगावत पर खुलकर बोले।

क्‍या बोले अमित शाह?

शाह ने कहा पहले शिंदे शिवसेना कहकर बुलाया जाता था लेकिन अब राज्य में 'शिवसेना-शिंदे गुट' जैसा कोई शब्द नहीं बचा है, अब एकमात्र शिवसेना बची है जिसका प्रतिनिधित्‍व एकनाथ शिंदे कर रहे हैं। कोल्हापुर में अमित शाह की इस जनसभा में मंच पर महाराष्‍ट्र मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी मौजूद थे।

Amit Shah

अमित शाह का ये बयान ऐसे समय में आया है जब उद्धव ठाकरे को गुट को हाल ही में तगड़ा झटका लगा है। उद्धव गुट के छह लोक सभा सांसदों ने बागी रुख अपनाते हुए अलग गुट बना लिया है और वे एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने का ऐलान कर दिया है।

इन सांसदों ने लोक सभा अध्यक्ष को विलय का आधिकारिक पत्र भी सौंप दिया है, जिससे ठाकरे गुट के पास सदन में अब केवल तीन सांसद बचे हैं। इस सबके बीच अमित शाह की उद्वव ठाकरे और एकनाथ शिंदे की लड़ाई के बीच अमित शाह के बयान ने खलबली मचा दी है। आइए समझते हैं क्‍या हैं इसके मायने...

शाह के मंत्रालय ने दी बागी सांसदों को Y+ सिक्‍योरिटी

बता दें अमित शाह के गृह मंत्रालय बगावत करने वाले सभी छह सांसदों को तत्काल प्रभाव से सुरक्षा मुहैया करा दी है। बागी छह सांसदों को Y+ सिक्‍योरिटी दे दी है। बगावत के ऐलान के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर खतरा मंडरा रहा था। 'कुत्ते भौंकते हैं, टाइगर शिकार करता है', शिवसेना स्‍थापना दिवस पर Eknath ने Uddhav को क्‍यों दी चेतावनी?

'ये ट्रेलर है, पिक्‍चर अभी बाकी है', शिंदे ने दूसरी बड़ी टूट के दिए संकेत

शिवसेना के स्‍थापना दिवस पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का रुख बेहद आक्रामक नजर आया। उन्होंने सांसदों के इस पाला बदलने को महज एक 'ट्रेलर' करार दिया है। वहीं शिंदे गुट की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि आने वाले दिनों में ठाकरे गुट के कई और विधायक और पार्षद उनका साथ छोड़ सकते हैं। इस दावे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के बचे हुए नेताओं के बीच बेचैनी बढ़ा दी है और पार्टी संगठन को बचाए रखने की गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है! टूट गई Uddhav Thackeray की शिवसेना, 6 बागी सांसद Eknath Shinde गुट में हुए शामिल, क्‍या होगा असर?

'उद्धव ठाकरे तो सत्‍ता के लिए राहुल की गोद में बैठ गए'

अमित शाह ने अपने संबोधन में वैचारिक मुद्दों पर केंद्रित रहते हुए उद्धव ठाकरे को विशेष रूप से निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे ने सत्ता के लालच में राहुल गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस की गोद में बैठना स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला बालासाहेब ठाकरे की मूल विचारधारा और सिद्धांतों के बिल्कुल विपरीत है। बीजेपी और शिंदे गुट लगातार उद्धव ठाकरे पर कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर हिंदुत्व की राह से भटकने का आरोप लगाते रहे हैं।

"अब एक ही शिवसेना बची है" अमित शाह के इस बयान के क्‍या है मायने?

वरिष्‍ठ पत्रकार प्रद्मुमन तिवारी के अनुसार, अमित शाह जनसभा में ऐसा बयान देकर महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना की वैधता और पहचान को लेकर चल रही लड़ाई में स्पष्ट रूप से एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बयान के जरिए न सिर्फ उद्धव ठाकरे गुट को कमजोर और विभाजित दिखाने का संदेश दिया गया है, बल्कि यह भी संकेत है कि बीजेपी अब संगठनात्मक और वैधानिक दोनों स्तरों पर शिंदे गुट को ही पार्टी का वास्तविक उत्तराधिकारी मानती है।

साथ ही, यह संदेश उन कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए भी है जो अभी तक असमंजस में हैं, कि राजनीतिक और सत्ता के लिहाज से शिंदे गुट के साथ बने रहना ही "मुख्यधारा" है। इस तरह यह बयान सिर्फ एक टिप्पणी नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की शिवसेना राजनीति में शक्ति संतुलन को परिभाषित करने की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। Sanjay Raut आखिर क्‍यों आगबबूला हुए? फिर गाली-गालौच पर उतरे, बोले- वो कभी वफादार नहीं होते

एकनाथ शिंदे बनाम उद्धव ठाकरे

सांसदों के इस ताजा सामूहिक दलबदल के बाद महाराष्ट्र का सियासी पारा पूरी तरह से चढ़ा हुआ है। इस घटनाक्रम से एकनाथ शिंदे की शिवसेना न केवल कानूनी रूप से बल्कि जनता के बीच भी खुद को मूल शिवसेना के असली उत्तराधिकारी के रूप में अधिक मजबूती से स्थापित करने में सफल होगी। सांसदों की संख्या बल में भारी कमी होने के कारण उद्धव ठाकरे के पास अब संसद से लेकर सड़क तक अपनी खोई हुई साख को पुनर्जीवित करने का बहुत मुश्किल काम बचा है।

आगामी चुनावों की तैयारियों के बीच महाराष्ट्र की यह नई राजनीतिक परिस्थिति राज्य के मतदाताओं के सामने एक नया विकल्प पेश करती है। एक तरफ जहां महायुति गठबंधन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे के सामने अपनी बची-खुची पार्टी और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की बड़ी चुनौती है। आने वाले दिन तय करेंगे कि महाराष्ट्र का यह सियासी मुकाबला आगे क्या नया मोड़ लेता है।

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