मानसून सत्र में क्या पास हो जाएगा परिसीमन बिल? किरेन रिजिजू ने खोल सरकार के पत्ते, समझ लीजिए संसद का नंबर गेम!

Delimitation Bill: संसद का मानसून सत्र सोमवार यानी 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। इस बार गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि क्या मोदी सरकार अपना परिसीमन बिल (Delimitation Bill 2026) इस सत्र में दोबारा पास करा पाएगी।

अप्रैल 2026 में बजट सत्र के दौरान यह बिल जरूरी दो-तिहाई बहुमत न मिलने की वजह से 54 वोटों से गिर गया था। अब खबर है कि केंद्र सरकार नए रणनीतिक बदलावों के साथ इसे मानसून सत्र में फिर से पेश करने की तैयारी में है।

Delimitation Bill

सत्र शुरू होने से पहले जब मीडिया ने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से परिसीमन बिल को लेकर सीधा सवाल किया, तो उन्होंने बेहद नपा-तुला जवाब दिया।

रिजिजू ने कहा,

"फिलहाल हमने बुलेटिन के जरिए दोनों सदनों से 8 बिलों को कार्रवाई के लिए तय किए हैं। इन 8 तय बिलों के अलावा अगर हम कोई भी दूसरा बिल सदन में लाते हैं, तो पहले उस पर पूरी चर्चा होगी। हम बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) को इसकी जानकारी देंगे और विपक्षी दलों को भरोसे में लेकर ही कदम बढ़ाएंगे। जो बिल अभी बुलेटिन में लिस्टेड नहीं है, मैं उस पर अभी कोई टिप्पणी नहीं कर सकता। हर सांसद को अपनी बात रखने का हक है। हम चाहते हैं कि संसद बिना किसी बाधा के शांति से चले।"

एनसीपीआई (NCPI) में शामिल होने वाले तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के मुद्दे पर रिजिजू ने स्पष्ट किया कि इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को अलग बैठने की व्यवस्था के लिए हस्ताक्षर करके आवेदन दिया है। मामला अभी स्पीकर के पास विचाराधीन है, इसलिए सर्वदलीय बैठक में उन्हें शामिल न करने का कोई सवाल ही नहीं उठता था।

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क्या है परिसीमन बिल और बजट सत्र में क्यों फेल हुई थी सरकार? (What Is Delimitation Bill)

परिसीमन बिल एक ऐसा संवैधानिक प्रस्ताव है, जिसके जरिए सरकार देशभर में लोकसभा और राज्यों की विधानसभा सीटों का नए सिरे से गठन करना चाहती है। यानी लोकसभा और विधानसभा की सीटें बढ़ जाएंगी। सरकार का तर्क है कि बढ़ती और बदलती आबादी को सही प्रतिनिधित्व देने के लिए यह जरूरी है।

बजट सत्र (अप्रैल 2026) के दौरान जब सरकार 131वां संविधान संशोधन विधेयक लाई थी, तो उसमें लोकसभा सीटों को 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था।

साथ ही महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण की बात भी शामिल थी। लेकिन विपक्ष ने यह आरोप लगाते हुए इसका विरोध किया कि इससे दक्षिण भारत के राज्यों को नुकसान होगा, क्योंकि वहां जनसंख्या नियंत्रण बेहतर रहा है। नतीजा यह हुआ कि वोटिंग के दौरान पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। दो-तिहाई बहुमत की कमी से बिल लटक गया।

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इनसाइड स्टोरी: मानसून सत्र के लिए क्या है NDA की प्लानिंग?

सूत्रों के मुताबिक हाल ही में कर्तव्य भवन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एनडीए (NDA) मंत्रियों की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में मानसून सत्र की रणनीति तय की गई। सूत्रों का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता सूची में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' अभी नीचे है, पूरा फोकस परिसीमन बिल के लिए नंबर जुटाने पर है।

इस बार विपक्ष को मनाने के लिए सरकार एक नया फॉर्मूला ला सकती है। नए प्रस्ताव में सभी राज्यों में एक समान रूप से 50 फीसदी लोकसभा सीटें बढ़ाने का लिखित भरोसा दिया जा सकता है। बजट सत्र के दौरान विपक्ष इसी 50% की सीमा को कानून का हिस्सा बनाने पर अड़ा था।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की नेता सुप्रिया सुले ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि सरकार ने उनकी पार्टी, कांग्रेस और डीएमके (DMK) से बातचीत की है। उन्होंने साफ कहा कि अगर सरकार बिल में 50% सीट बढ़ोतरी की बात लिखित में देती है, तभी विपक्ष इस पर आगे चर्चा करेगा।

संसद का गणित: क्या सरकार के पास है जादुई आंकड़ा?

फिलहाल लोकसभा में 3 सीटें खाली हैं, जिससे कुल प्रभावी संख्या 540 रह गई है। संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 360 वोटों की जरूरत है। एनडीए (NDA) के पास अपने 293 सांसद हैं। इसके अलावा, टीएमसी (TMC) के 20 बागी सांसद और उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसद अब एनडीए के पाले में दिख रहे हैं, जिससे यह आंकड़ा 319 तक पहुंच जाता है।

इसके बावजूद सरकार बहुमत के आंकड़े से 41 वोट दूर है। ऐसे में केंद्र सरकार की नजरें तमिलनाडु चुनाव के बाद कांग्रेस से खफा चल रही डीएमके (DMK) के 22 सांसदों और शरद पवार की पार्टी के 8 सांसदों पर टिकी हैं। डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन ने अपने सांसदों से कहा है कि वे हर मुद्दे पर अलग से फैसला लेंगे और आंख मूंदकर किसी का साथ नहीं देंगे। अगर सरकार इन दलों को साध लेती है, तो परिसीमन बिल आसानी से पास हो जाएगा।

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