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Ajit Pawar Party Name: अजित पवार किस पार्टी के नेता थे? शरद पवार के साथ क्या था उनका रिश्ता

Ajit Pawar Party Name: महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसे अध्याय का अंत हो गया है, जिसकी भरपाई नामुमकिन मानी जा रही है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बारामती में एक विमान दुर्घटना में निधन न केवल एक परिवार की क्षति है, बल्कि यह एक युग का अंत है।

दरअसल, अजित पवार को एक मजबूत, फैसले लेने वाले और सभी दलों से अच्छे संबंध रखने वाले नेता के तौर पर जाना जाता था। उनके निधन के बाद लोग यह जानना चाह रहे हैं कि अजित पवार किस पार्टी के नेता थे और उनकी राजनीतिक पहचान क्या थी। अजित पवार को विरोधी भी उन्हें 'अजातशत्रु' कहकर याद कर रहे हैं।

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NCP Ajit Pawar अजित पवार किस पार्टी के नेता थे?

अजित पवार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख नेताओं में से एक रहे और उनका महाराष्ट्र की राजनीति में मजबूत पकड़ रही है। वह एनसीपी संस्थापक शरद पवार के भतीजे थे और पार्टी के सबसे मजबूत संगठनात्मक चेहरों में गिने जाते थे। जब शरद पवार केंद्र की राजनीति की ओर मुड़े तब अजित पवार ने ही महाराष्ट्र में NCP की पकड़ बनाए रखी थी।

समय के साथ अजित पवार ने न सिर्फ पार्टी बल्कि महाराष्ट्र की सत्ता राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। अपने राजनीतिक करियर में अजित पवार कई बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे और उन्हें एक सख्त प्रशासक, तेज फैसले लेने वाले और जमीनी नेता के रूप में जाना जाता था।

Sharad Pawar vs Ajit Pawar 2019: जब महाराष्ट्र की राजनीति में आया बड़ा भूचाल

साल 2019 में महाराष्ट्र की राजनीति ने एक ऐसा नाटकीय मोड़ देखा, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा। अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी से बगावत कर दी और पार्टी के कई विधायकों को साथ लेकर बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया। इसके बाद सुबह-सुबह देवेंद्र फड़नवीस ने मुख्यमंत्री,और अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली।

हालांकि यह सरकार ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई। शरद पवार ने अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई और एनसीपी के ज्यादातर विधायक अजित पवार का साथ छोड़कर वापस लौट आए। नतीजत, महज तीन दिन में ही अजित पवार को उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और फड़नवीस सरकार गिर गई।

इतना बड़ा राजनीतिक उलटफेर करने के बावजूद अजित पवार और शरद पवार के रिश्ते पूरी तरह नहीं टूटे। कुछ ही महीनों बाद, नवंबर 2019 में जब शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने मिलकर महाविकास अघाड़ी सरकार बनाई, तब अजित पवार एक बार फिर उपमुख्यमंत्री बने। यह उनकी राजनीतिक पकड़ और महत्व को दर्शाता है।

Ajit Pawar Political Career: 2023 में चाचा की छांव से पूरी तरह अलग हुए अजित दादा

जुलाई 2023 में अजित पवार ने एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा धमाका किया। इस बार उन्होंने शरद पवार से पूरी तरह अलग होकर एनसीपी में ऐतिहासिक टूट कर दी। अजित पवार ने बड़ी संख्या में विधायकों को अपने साथ कर लिया।

पार्टी और सिंबल पर कब्जा किया उन्होंने चुनाव आयोग में लड़ाई जीती और राकांपा का नाम व प्रतीक अपने पास रखा। और बीजेपी व एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के साथ सरकार में शामिल हो गए। इस कदम के बाद अजित पवार ने यह साबित कर दिया कि वह अब सिर्फ शरद पवार की छाया नहीं, बल्कि खुद एक स्वतंत्र राजनीतिक ताकत हैं।

2024 के चुनाव और सत्ता की तिकड़ी

अजित पवार ने अपने दम पर 2024 का लोकसभा चुनाव और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव लड़ा। इन चुनावों में एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फड़नवीस और अजित पवार की तिकड़ी ने शानदार जीत दर्ज की। इसके बाद से यह गठबंधन राज्य में स्थिर सरकार चला रहा था और अजित पवार लगातार उपमुख्यमंत्री पद पर बने हुए थे।

अजित पवार को उनके समर्थक 'दमदार और दिलदार' नेता कहते थे। उनकी प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ निजी रिश्तों में गर्मजोशी उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। उनके अचानक निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में कई संभावनाओं का अंत हो गया है-चाहे वह सत्ता संतुलन हो, भविष्य की राजनीति हो या एनसीपी की दिशा।

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा शून्य

अजित पवार का जाना महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक ऐसा नुकसान है, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा। वह सिर्फ एक पार्टी के नेता नहीं, बल्कि सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए संवाद का पुल माने जाते थे। बारामती से लेकर मुंबई और दिल्ली तक, हर जगह आज एक ही सवाल गूंज रहा है-क्या महाराष्ट्र की राजनीति फिर कभी अजित पवार जैसा प्रभावशाली और निर्णायक नेता देख पाएगी?

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