'प्लेन लैंड करे तो समझ जाइए…',Ajit Pawar का पुराना ट्वीट,क्या महिला पायलट वाली बात हुई सच? बचाई जा सकती थी जान
Ajit Pawar old tweet: महाराष्ट्र की राजनीति के लिए यह सुबह किसी बुरे सपने से कम नहीं रही। बारामती के पास हुए एक भीषण विमान हादसे में राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन की खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
28 जनवरी सुबह लैंडिंग के दौरान उनका चार्टर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और आग लगने से अजित पवार समेत कुल पांच लोगों की मौत हो गई। इस हादसे के बीच सोशल मीडिया पर उनका एक पुराना ट्वीट अचानक चर्चा के केंद्र में आ गया, जिसने इस त्रासदी को और भावुक बना दिया।

वायरल हुआ अजित पवार का 2024 का पुराना ट्वीट
हादसे के कुछ ही घंटों बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अजित पवार का एक सालों पुराना ट्वीट तेजी से शेयर होने लगा। इस ट्वीट में उन्होंने महिला पायलटों की तारीफ करते हुए लिखा था कि जब विमान या हेलीकॉप्टर बहुत स्मूथ तरीके से लैंड करता है, तो समझ जाना चाहिए कि पायलट महिला है। उस वक्त इस बयान को महिला सशक्तिकरण के नजरिए से देखा गया था और खूब सराहा गया था।
अजित पवार ने ट्वीट किया था, "जब हम हेलीकॉप्टर या प्लेन से सफर करते हैं और अगर वह स्मूथली लैंड करता है, तो हम समझ जाते हैं कि पायलट एक महिला है।"
आज उसी ट्वीट को लोग एक दर्दनाक संयोग के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि जिस विमान का हादसा हुआ, उसकी को-पायलट एक महिला थीं। यही वजह है कि यह ट्वीट अब सिर्फ वायरल नहीं, बल्कि एक इमोशनल एंगल भी ले चुका है।
कैसे हुआ बारामती के पास विमान हादसा?
हादसा बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान हुआ। यह एयरपोर्ट एक अनियंत्रित हवाई पट्टी है, जहां लैंडिंग पूरी तरह विजुअल कंडीशंस पर निर्भर करती है। विमान लियरजेट 45 था, जिसे दिल्ली की निजी कंपनी वीएसआर वेंचर्स ऑपरेट कर रही थी।
जांच से जुड़े शुरुआती इनपुट बताते हैं कि लैंडिंग के समय क्रू को रनवे साफ दिखाई नहीं दे रहा था। पहले प्रयास में पायलट ने लैंडिंग टाल दी और विमान को दोबारा हवा में घुमाया गया, जिसे एविएशन भाषा में गो-अराउंड कहा जाता है। दूसरे प्रयास में पायलट ने एटीसी को बताया कि अब रनवे दिख रहा है। सुबह 8:43 बजे लैंडिंग की अनुमति मिली, लेकिन ठीक एक मिनट बाद रनवे के पास आग की लपटें दिखाई देने लगीं और विमान रनवे के बाईं ओर क्रैश हो गया।
कौन थे विमान में मौजूद पायलट
हादसे में जान गंवाने वाले मुख्य पायलट सुमित कपूर बेहद अनुभवी थे। उनके पास 15 हजार घंटे से ज्यादा की उड़ान का अनुभव था। को-पायलट के रूप में शाम्भवी पाठक मौजूद थीं, जिनके पास करीब 1500 घंटे का फ्लाइंग अनुभव था।
एविएशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि अनुभव की कमी इस हादसे की सीधी वजह नहीं मानी जा सकती। ब्लैक बॉक्स मिल चुका है और अब असली वजहों का खुलासा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा।
तकनीकी खराबी या सिस्टम की नाकामी?
इस हादसे की जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो यानी एएआईबी कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि इसी कंपनी का एक विमान 2023 में भी मुंबई में हादसे का शिकार हो चुका है। हालांकि फरवरी 2025 के ऑडिट में विमानों में किसी बड़ी तकनीकी कमी की पुष्टि नहीं हुई थी।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह हादसा तकनीकी फेलियर की वजह से हुआ या फिर बारामती हवाई पट्टी की सीमित सुविधाएं इसकी वजह बनीं।
बारामती हवाई पट्टी पर किन सुविधाओं की थी कमी
बारामती की हवाई पट्टी को अनकंट्रोल्ड एयरोड्रम कहा जाता है। यहां न तो नियमित एयर ट्रैफिक कंट्रोल है, न इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम, न ही मौसम की सटीक जानकारी देने वाले उपकरण।
रिटायर्ड पायलट एहसान ख़ालिद के मुताबिक, अगर यहां आईएलएस, वीओआर या जीपीएस आधारित सिस्टम होते, तो कम विज़िबिलिटी में भी विमान को सुरक्षित उतारा जा सकता था। उनका कहना है कि ऐसे सिस्टम होने पर हादसे की संभावना 75 से 80 प्रतिशत तक कम हो जाती।
क्या अजित पवार खुद इस हवाई पट्टी को बेहतर बनाना चाहते थे?
यह एक और कड़वा संयोग है कि अजित पवार खुद बारामती हवाई पट्टी के विकास को लेकर गंभीर थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी के साथ कई बैठकें की थीं और पीएपीआई, नाइट लैंडिंग, नियमित एटीसी जैसी सुविधाओं की मांग रखी थी।
द हिंदू और हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट बताती हैं कि हवाई पट्टी के प्रबंधन में कई खामियां थीं और हाल ही में इसे नए सिरे से संभाला गया था।
लैंडिंग के आखिरी आठ मिनट क्यों होते हैं सबसे खतरनाक
एविएशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, किसी भी फ्लाइट के लिए टेकऑफ के बाद के तीन मिनट और लैंडिंग से पहले के आठ मिनट सबसे अहम होते हैं। इन्हें क्रिटिकल 11 मिनट कहा जाता है।
इंटरनेशनल आंकड़े बताते हैं कि करीब 53 प्रतिशत विमान हादसे लैंडिंग के दौरान होते हैं। वजह साफ है। इसी समय पायलट को रनवे, स्पीड, एंगल और विज़िबिलिटी, सब पर एक साथ नजर रखनी होती है।
अब जांच रिपोर्ट का इंतजार?
फिलहाल सारे सवालों के जवाब ब्लैक बॉक्स और एएआईबी की रिपोर्ट में छिपे हैं। क्या यह हादसा रोका जा सकता था, क्या बेहतर सुविधाएं जान बचा सकती थीं और क्या सिस्टम की लापरवाही ने एक बड़ा राजनीतिक नुकसान कर दिया, इन सब पर देश की नजर टिकी है।
अजित पवार का पुराना ट्वीट आज एक ऐसे दर्दनाक मोड़ पर खड़ा है, जहां तारीफ की एक पंक्ति सवाल बन चुकी है और एक हादसा पूरे सिस्टम पर सवाल उठा रहा है।












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