'MVA की 9 सितंबर तक गठबंधन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं तो AIMIM अपना रास्ता खुद बनाएगी', इम्तियाज जलील का बयान
Maharashtra Assembly Election: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने महाराष्ट्र विधानससभा में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) को गठबंधन के लिए एक प्रस्ताव दिया है, लेकिन अगर विपक्षी गुट 9 सितंबर तक जवाब नहीं देता है तो वह खुद आगे बढ़ेगी। पार्टी नेता इम्तियाज जलील ने शनिवार को यह बयान दिया है।
औरंगाबाद के पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने कहा कि अगर 9 सितंबर तक कोई जवाब नहीं मिलता है तो वे स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कुछ सीटों से चुनाव लड़ने पर रुचि जाहिर की, जहां एआईएमआईएम अहम प्रभाव रखता है।

जलील ने इस बात पर भ़ी जोर दिया कि एआईएमआईएम और शिवसेना (यूबीटी) के बीच वैचारिक मतभेदों के बावजूद वे "राजनीतिक मजबूरियों" और किसानों-राज्य की जनता के लाभ के कारण एमवीए के साथ गठबंधन करने को तैयार हैं। उन्होंने कांग्रेस, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सेना (यूबीटी) और शरद पवार की एनसीपी (एसपी) सहित एमवीए नेताओं के साथ प्रारंभिक चर्चा की है।
AIMIM का प्रस्ताव और समय सीमा
जलील ने कहा कि एमवीए ने एआईएमआईएम के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श के लिए समय मांगा था, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। उन्होंने चेतावनी दी, "अगर वे 9 सितंबर तक जवाब नहीं देते हैं, तो हम अपने इच्छुक उम्मीदवारों के लिए फॉर्म वितरित करना शुरू कर देंगे। हम तय करेंगे कि राज्य में एआईएमआईएम कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। हम अपनी स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।"
2019 के विधानसभा चुनावों में AIMIM ने 44 सीटों पर चुनाव लड़ा और दो में जीत हासिल की। मुख्य पार्टियों के नतीजों में बीजेपी को 105 सीटें, अविभाजित एनसीपी को 56, शिवसेना को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिलीं। जलील ने चिंता जताई कि एमवीए शायद एआईएमआईएम को अपने मंच पर चौथी पार्टी के तौर पर नहीं चाहेगा, उन्होंने सुझाव दिया कि वे मंच पर सिर्फ शरद पवार, उद्धव ठाकरे और नाना पटोले को ही पसंद करते हैं।
एमवीए पर संभावित प्रभाव
जलील ने कहा कि गठबंधन से एआईएमआईएम को कोई खास फायदा नहीं होगा, लेकिन अगर एआईएमआईएम को बाहर रखा गया तो विपक्षी गुट को काफी नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों में एमवीए की सफलता के लिए उनकी पार्टी का शामिल होना महत्वपूर्ण हो सकता है।
महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव एक या दो महीने के भीतर होने की उम्मीद है। जलील ने स्पष्ट किया, "हमने बहुत ज़्यादा सीटों का प्रस्ताव नहीं रखा है। हमने बहुत इंतज़ार किया है। अगर वे आखिरी समय में हमें साथ लेने से मना कर देते हैं तो क्या होगा?"
बता दें कि जलील पहले औरंगाबाद से लोकसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और एआईएमआईएम के रणनीतिक फैसलों में अहम भूमिका निभाते हैं। उनके बयान महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी स्थिति सुरक्षित करने के पार्टी के दृढ़ संकल्प को दर्शाते हैं।












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