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MP News: उज्जैन सिंहस्थ कुंभ में VIP एंट्री होगी प्रतिबंध ? पुजारी संघ ने CM मोहन यादव को लिखा बड़ा पत्र

Ujjain News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेला 2025 में भगदड़ की दुखद घटना ने न केवल कुंभ के आयोजनकर्ताओं को, बल्कि पूरे देश को सुरक्षा और व्यवस्थाओं के महत्व को पुनः जागरूक कर दिया। ऐसी घटनाओं से बचने के लिए अब सभी की निगाहें 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ पर हैं।

इस संदर्भ में, अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक सुझाव पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने सिंहस्थ कुंभ 2028 के लिए सुरक्षा उपायों को और बेहतर बनाने की अपील की है।

Will VIP entry be banned in Ujjain Simhastha Kumbh Priest union wrote letter to CM Mohan Yadav

महासंघ के अध्यक्ष महेश पुजारी ने पत्र में विशेष रूप से तेरह अखाड़ों के स्नान और आयोजन में वीवीआईपी के प्रवेश पर ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि इस बार स्नान के समय अखाड़ों के लिए अलग-अलग घाटों का निर्धारण किया जाए, जिससे श्रद्धालुओं और अखाड़ों के साधु-संतों के बीच भीड़ कम हो और किसी प्रकार की भगदड़ जैसी घटना से बचा जा सके।

स्नान के दौरान अखाड़ों के अलग-अलग घाटों का निर्धारण

महेश पुजारी ने सुझाव दिया है कि तेरह अखाड़ों का स्नान एक ही घाट पर न होकर, विभिन्न घाटों पर किया जाए। इसके तहत शैव दल को नृसिंह घाट से लेकर त्रिवेणी तक और राम दल को मंगलनाथ क्षेत्र में स्नान करने की अनुमति दी जाए। यह व्यवस्था स्नान के समय के दबाव को कम करेगी और हर अखाड़े को अपना निर्धारित स्थान मिलेगा, जिससे संगठित ढंग से स्नान होगा और भीड़ का दबाव नियंत्रित रहेगा।

अखाड़ों की पेशवाई पर नियंत्रण

अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने यह भी सुझाव दिया है कि स्नान के समय अखाड़ों की पेशवाई को बंद किया जाना चाहिए। साधु-संतों को बिना किसी वैभव और अनुयायियों के, केवल अपने साधारण रूप में, पैदल ही स्नान के लिए जाना चाहिए। उनका कहना था कि संत परंपरा त्याग और सरलता का प्रतीक है, ऐसे में किसी प्रकार के वैभव प्रदर्शन की कोई आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। जब क्षिप्रा नदी सभी स्थानों पर पवित्र है, तो श्रद्धालुओं के साथ साधु-संतों का स्नान करने का उद्देश्य केवल पुण्य प्राप्ति है, न कि किसी प्रदर्शन का।

वीवीआईपी को मेला क्षेत्र से प्रतिबंधित करना

महेश पुजारी ने यह भी मांग की है कि सभी वीवीआईपी और वीआईपी को मेला क्षेत्र में प्रतिबंधित किया जाए। उनका यह सुझाव है कि रामघाट पर स्नान की अनुमति केवल सनातन धर्म के सर्वोच्च चारों शंकराचार्यों को दी जाए, ताकि आम श्रद्धालुओं को अपनी आस्था और भावना के साथ सुरक्षित रूप से पुण्य स्नान का अवसर मिल सके। वीवीआईपी के मेला क्षेत्र में प्रवेश से न केवल भीड़ बढ़ेगी, बल्कि आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा में भी समस्या उत्पन्न हो सकती है।

सरकार द्वारा प्रस्तावित उपायों से मिल सकती है सफलता

अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने यह भी उल्लेख किया कि अगर सरकार इन सुझावों को सिंहस्थ 2028 के आयोजन में लागू करती है, तो निश्चित ही कोई भी भगदड़ या अव्यवस्था की संभावना समाप्त हो जाएगी। इससे न केवल उज्जैन और मध्य प्रदेश का नाम रोशन होगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर यह संदेश जाएगा कि भारत के धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है।

सिंहस्थ कुंभ 2028 में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर पुजारी महासंघ ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के अध्यक्ष महेश पुजारी ने 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उनका मानना है कि सिंहस्थ कुंभ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन आएंगे, और ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि सभी श्रद्धालुओं के साथ समान और उचित व्यवहार किया जाए।

महेश पुजारी ने यह भी बताया कि सिंहस्थ में क्षिप्रा नदी के हर घाट को रामघाट के रूप में प्रचारित किया जाता है और श्रद्धालुओं से अपील की जाती है कि वे केवल रामघाट पर ही स्नान करें। इस दौरान तेरह प्रमुख अखाड़े अपनी वैभव प्रदर्शन के साथ रामघाट पर स्नान करने के लिए जाते हैं। इस व्यवस्था के कारण, नदी के क्षेत्र में श्रद्धालुओं को जाने से रोक दिया जाता है, जिससे वहां भारी भीड़ जमा हो जाती है। इसका परिणाम यह होता है कि श्रद्धालुओं पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, और ऐसी परिस्थितियों में भगदड़ या अन्य दुर्घटनाओं का खतरा उत्पन्न हो जाता है।

महेश पुजारी का कहना है कि इस समस्या को हल करने के लिए जरूरी है कि हर अखाड़े के लिए अलग-अलग घाट निर्धारित किए जाएं, ताकि भीड़ का दबाव समान रूप से विभाजित हो सके। साथ ही, उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर सीमित न किया जाए, ताकि हर घाट पर पर्याप्त स्थान मिले और सभी श्रद्धालु बिना किसी अव्यवस्था के स्नान कर सकें।

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