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Sadhvi Harsha: महामंडलेश्वर की सुंदर शिष्या हर्षा रिछारिया की शादी को लेकर माता-पिता ने किया बड़ा खुलासा

Harsha Richhariya News: भोपाल की रहने वाली हर्षा रिछारिया, जो कि पिछले कुछ समय से 'सुंदर साध्वी' के नाम से सोशल मीडिया पर चर्चाओं का विषय बनी हुई हैं, जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाली हैं।

इस बड़े फैसले के बारे में खुद हर्षा के पिता दिनेश रिछारिया ने मीडिया के सामने खुलासा किया है, जिससे उनके परिवार में खुशी का माहौल है। शादी की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, और अब परिवार के सदस्य शादी के लिए संभावित दूल्हों का चयन कर रहे हैं।

Viral Sadhvi Harsha Richhariya mahakumbh Parents disclosure in Bhopal regarding marriage

हर्षा रिछारिया का जीवन और करियर

हर्षा रिछारिया, जो वर्तमान में एक प्रसिद्ध साध्वी के रूप में सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं। हर्षा भोपाल में ही जन्मी और पली-बढ़ी हैं। हर्षा के माता-पिता भोपाल में ही रहते हैं। उनके पिता दिनेश रिछारिया किसी व्यवसाय में नहीं हैं, जबकि उनकी मां किरण रिछारिया का अपना बुटीक है। हर्षा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई उत्तर प्रदेश के झांसी से की और फिर भोपाल आकर मॉडलिंग और एंकरिंग में अपना करियर शुरू किया।

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हालांकि, कुछ सालों से हर्षा ने लाइमलाइट से बाहर रहते हुए अध्यात्म की ओर रुख कर लिया है। वह वर्तमान में स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज की शिष्य हैं और अपना जीवन आध्यात्मिक साधना में व्यतीत कर रही हैं।

हर्षा रिछारिया की शादी? माता-पिता ने किया खुलासा, किन लड़कों से देखा गया रिश्ता

भोपाल की प्रसिद्ध हर्षा रिछारिया जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाली हैं, और उनके पिता दिनेश रिछारिया ने इस बारे में मीडिया से बातचीत करते हुए एक बड़ा खुलासा किया है। हर्षा की शादी को लेकर उनके परिवार ने गंभीरता से काम करना शुरू कर दिया है, और इस प्रक्रिया में दो संभावित लड़कों को देखा गया है। एक लड़का देहरादून का है, जबकि दूसरा नासिक में रहता है। दिनेश रिछारिया ने कहा, "रिश्ता फाइनल होते ही हम अपनी बेटी की शादी कर देंगे।"

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हर्षा की शादी के लिए परिवार का समर्थन

हर्षा के माता-पिता इस निर्णय को लेकर बहुत गंभीर हैं। दिनेश रिछारिया ने कहा कि परिवार ने बहुत संघर्ष किया है और वह चाहते हैं कि उनकी बेटी खुश रहे। हर्षा की मां किरण रिछारिया ने भी इस बारे में अपनी बात साझा की। उन्होंने कहा, "जब हम दूसरों की बेटियों को शादी का जोड़ा पहनाते हैं, तो अपनी बेटी को क्यों नहीं पहनाएंगे?" इससे साफ है कि परिवार अपनी बेटी की शादी के लिए पूरी तरह से तैयार है।

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हर्षा का बयान: किसी लड़के को पसंद नहीं किया

हालांकि, हर्षा ने अब तक किसी भी लड़के को पसंद करने की बात नहीं की है। उन्होंने इस विषय पर खुलकर टिप्पणी नहीं की, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे इस फैसले में पूरी तरह से अपने परिवार की पसंद के अनुसार चलेंगी।

"सुंदर साध्वी" से "शिष्या" की यात्रा

सोशल मीडिया पर 'सुंदर साध्वी' के नाम से फेमस हुई हर्षा रिछारिया के बारे में एक और दिलचस्प जानकारी सामने आई है। असल में, हर्षा कोई साध्वी नहीं हैं, बल्कि स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज की शिष्य हैं। हर्षा की मां किरण रिछारिया ने बताया, "जब मैंने पहली बार हर्षा को साध्वी के कपड़ों में देखा, तो मैं रो पड़ी थी, लेकिन उसने हमें समझाया कि वह केवल शिष्या है, उसने संन्यास नहीं लिया है।"

प्रयागराज महाकुंभ में हर्षा रिछारिया के शाही रथ पर बिठाए जाने पर भी हुआ विवाद

प्रयागराज महाकुंभ में हर्षा रिछारिया को शाही रथ पर बिठाए जाने और अमृत स्नान में शामिल करने को लेकर विवाद उठ गया है। हर्षा रिछारिया, जो एक मॉडल और एंकर हैं, को महाकुंभ के पहले अमृत स्नान में विशेष स्थान दिया गया। इसके साथ ही उन्हें महामंडलेश्वर के शाही रथ पर भी बिठाया गया, जिससे धार्मिक और आध्यात्मिक circles में असहमति जताई जा रही है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उठाए सवाल

इस विवाद पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महाकुंभ में चेहरे की सुंदरता नहीं, बल्कि हृदय की सुंदरता देखी जानी चाहिए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, "महाकुंभ में इस तरह की परंपरा का शुरू होना पूरी तरह गलत है और यह विकृत मानसिकता का नतीजा है।"

उन्होंने आगे कहा कि "जो व्यक्ति यह तय नहीं कर पाया कि उसे संन्यास की दीक्षा लेनी है या शादी करनी है, उसे संत महात्माओं के शाही रथ पर स्थान देना उचित नहीं है।" उनका यह भी मानना था कि अगर हर्षा रिछारिया श्रद्धालु के रूप में महाकुंभ में शामिल होतीं तो वह सही होता, लेकिन भगवा कपड़े में शाही रथ पर बिठाना पूरी तरह से गलत है।

शंकराचार्य का स्पष्ट रुख

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस मुद्दे पर और स्पष्टता दी। उन्होंने कहा, "महाकुंभ में सनातन धर्म के प्रति समर्पण होना जरूरी है। चेहरे की सुंदरता नहीं, बल्कि मन की सुंदरता देखी जानी चाहिए।" उन्होंने यह भी उदाहरण दिया कि जिस तरह पुलिस की वर्दी केवल पुलिसकर्मियों को दी जाती है, उसी तरह भगवा वस्त्र केवल संन्यासियों को पहनने की अनुमति होनी चाहिए।

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