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तोते में फंसी जान, तड़प रहे परिजन, ढूंढने पर रख दिया ईनाम

दमोह के शक्तिनगर काॅलोनी में रहने वाले दिलीप पुष्पा खरे का पालतू तोता उड़ गया। पूरा परिवार मिलकर उसे शहर में तलाश रहा है। बेटी मेडिकल की पढ़ाई छोड़कर पोस्टर चिपका रही है, ताकि उसका भाई समान मिट्ठू मिल जाए...

‘तोते’ में फंसी जान, पागलों की तरह ढूढ़ रहा परिवार, ईनाम रखा

'जादूगर की जान तोते में बसती थी' यह कहानी हमने बचपन में खूब सुनी है, लेकिन क्या वास्तविक जीवन में इस तरह का मामला देखा है! दरअसल मध्य प्रदेश के दमोह जिले में एक अनोखा मामला सामने आया है, जिसमें एक घर में पालतू तोता पिंजड़ा खुला देखकर उड़ गया। परिजन सदमें में आ गए और पागलों की तरह सड़कों पर मिट्ठू को तलाश रहे हैं, पोस्टर चिपकाए जा रहे हैं, अनाउंस कराया जा रहा है। तोते की मालकिन नौकरी छोड़कर तो बेटी मेडिकल की पढ़ाई छोड़कर तोते को तलाश रहे हैं। परिजन का कहना है तोता हमारी जान है, वह हमारे परिवार का सदस्य और बेटे की तरह है।

‘तोते’ में फंसी जान, पागलों की तरह ढूढ़ रहा परिवार, ईनाम रखा

बुन्देलखंड के दमोह दमोह में दिलीप-पुष्पा खरे का पालतू तोते के गुम हो जाने के चलते पूरा परिवार खाना-पीना छोड़ खोजने में लगा हुआ है। कहीं कोई हजारों रुपए खर्च करके रिक्शा से एनाउंसमेंट करा रहा है, तो कोई तोता के पोस्टर चिपका रहा है। यही नहीं पता बताने वाले को दो हजार का ईनाम भी दिया जाएगा। तोते की मालकिन को ऐसा गहरा सदमा लगा है कि आंखों से आंसुओं की धार रुक नहीं रही। छोटी बेटी उदयपुर से मेडिकल पढ़ाई छोड़ दमोह आकर तोते को खोजने में लगी है। ऐसा ही हाल घर के बाकी सदस्यों का है।

‘तोते’ में फंसी जान, पागलों की तरह ढूढ़ रहा परिवार, ईनाम रखा

जबलपुर नाका क्षेत्र की शक्तिनगर काॅलोनी में रहने वाले दिलीप पुष्पा खरे के घर में पला तोता 23 मार्च को पिंजरे से निकलकर फुर्र हो गया था। पुष्पा खरे ने रोते हुए बताया कि 23 मार्च को पिंजरे की सफाई करने के लिए तोता बाहर निकाला, लेकिन भूल वश मुख्य दरवाजा खुला छूट गया। जिस कारण से वह बाहर निकला और घर के बाहर नेट लगी होने पर वह बाहर निकल गया। जैसे ही तोता बाहर निकला तो पुष्पा उसे पकड़ने बाहर निकली, लेकिन तब तक घर के अंदर पला तोता खुले आसमान में आंखों से ओझल हो गया।

‘तोते’ में फंसी जान, पागलों की तरह ढूढ़ रहा परिवार, ईनाम रखा

सदमें में परिवार, मानो दुख का पहाड़ टूट पड़ा
मानों पूरे परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा हो। पिछले तीन दिन से पूरा परिवार जबलपुर नाका क्षेत्र का एक-एक पेड़ एक-एक पक्षियों के संभावित स्थल पर भटक चुका है। जब तोता नहीं मिला तो परिवार ने गुम तोते के पोस्टर छपवाए और तोते का पता बताने वाले को एक हजार रुपए व जिसके घर में तोता है उसे एक हजार रुपए मिलाकर दो हजार का ईनाम भी रखा है। इन पोस्टरों को परिवार के सदस्य ही चिपका रहे हैं। दो दिन से आटो रिक्शा में एनांउस भी कराया जा रहा है।

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    जिगर के टुकड़े के बिछुड़ने पर बह रहे आंसू
    पुष्पा खरे ने बताया कि तोता का नाम बिटटू है। वह बहुत अच्छे तरीके से ट्रेंड किया गया था। जो कई प्रकार के कठिन शब्दों का उच्चारण भी सहजता से कर लेता था, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह जाता था। उन्होंने लगभग रोते हुए बताया कि जब से तोता उड़ा है तब से खाना-पीना छोड़ दिया हैं, वह निजी अस्पताल में काम करती हैं, लेकिन डयूटी भी नहीं गई हैं, वह तोता को जिगर के टुकड़े की तरह दुलार करती थीं। जिसके बिछुड़ने का दर्द स्पष्टतौर पर दिखाई दे रहा है। तोता उड़ने की बात उठते ही उनकी आंखों से आंसू बहने लगते हैं।

    तोते की खबर सुन उदयपुर से आई बेटी
    खरे परिवार की छोटी बेटी शालिनी खरे राजस्थान के उदयपुर में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। जैसे ही तोता उड़ने की खबर सुनी तो वह पढ़ाई छोड़कर दमोह आ गई है और अपने छोटे भाई तरह तोते को खोजने के लिए शहर की गलियों में भटक रही है। वह हाथ जोड़कर लोगों से विनती कर रही है कि प्लीज वह अपने छोटे भाई की तरह दुलार करती थी कोई उसका पता बता दो।

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