MP News: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की बदहाली, उमंग सिंघार ने खोली पोल, 70,000 शिक्षकों की कमी

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था की बदहाली एक बार फिर सुर्खियों में है। विपक्षी नेता और मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उमंग सिंघार ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सरकारी स्कूलों की दयनीय स्थिति को उजागर किया है।

उनके अनुसार, प्रदेश में 70,000 शिक्षकों की भारी कमी, 15,000 से अधिक शिक्षकों की बाबूगिरी, और अनुचित विषयों के शिक्षकों द्वारा पढ़ाई जैसे मुद्दों ने शिक्षा व्यवस्था को 'काम चलाओ' नीति का शिकार बना दिया है। शिक्षा मंत्री के 'अटैचमेंट खत्म करने' के आदेश भी धूल खा रहे हैं, जिससे लाखों विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है।

Umang Singhar exposed the plight of government schools in MP shortage of 70 000 teachers

शिक्षकों की कमी: 70,000 पद खाली, पढ़ाई भगवान भरोसे

उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर प्रदेश के सरकारी स्कूलों की दुर्दशा को लेकर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लगभग 70,000 पद खाली पड़े हैं। "1275 स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक नहीं है, और 6,858 स्कूल केवल एक-एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी?" उन्होंने पूछा।

इसके अलावा, जो शिक्षक उपलब्ध हैं, उनमें से 15,000 से अधिक प्रशासनिक कार्यों और बाबूगिरी में व्यस्त हैं, जिसके कारण कक्षाओं में पढ़ाई ठप है। "हिंदी के शिक्षक कॉमर्स पढ़ा रहे हैं, और मिडिल स्कूल के मास्टर 12वीं की गणित की कक्षाएं ले रहे हैं। न तो विषय के अनुसार शिक्षक हैं, न ही पढ़ाई की कोई ठोस तैयारी," सिंघार ने तंज कसते हुए कहा।

Umang Singhar exposed the plight of government schools in MP shortage of 70 000 teachers

'काम चलाओ' नीति: शिक्षा व्यवस्था की हकीकत

सिंघार ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को 'काम चलाओ' नीति के हवाले छोड़ दिया है। "प्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं में लाखों बच्चे फेल हो रहे हैं। मध्य प्रदेश में देश में सबसे ज्यादा फेल होने की दर है, और इसका सबसे बड़ा कारण शिक्षकों की कमी और अयोग्य शिक्षकों द्वारा पढ़ाई है," उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी बताया कि कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं जैसे पीने का पानी, शौचालय, और बिजली तक उपलब्ध नहीं हैं। "बड़े शहरों के स्कूल भी बिना शिक्षकों के चल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति तो और भी बदतर है। सरकार की प्राथमिकता में बच्चों की शिक्षा नहीं, बल्कि दिखावे की घोषणाएं और आंकड़ों की जादूगरी है," सिंघार ने कहा।

शिक्षा मंत्री का 'अटैचमेंट खत्म' आदेश: फाइलों में कैद

मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने दो महीने पहले आदेश जारी किया था कि शिक्षकों के 'अटैचमेंट' (प्रशासनिक कार्यों में लगाए गए शिक्षकों को शिक्षण कार्य में वापस लाने) को खत्म किया जाए। लेकिन सिंघार का दावा है कि इस आदेश का कोई असर नहीं हुआ। "आदेश तो जारी हो गए, लेकिन फाइलें धूल खा रही हैं। शिक्षक अब भी बाबूगिरी में व्यस्त हैं, और स्कूलों में पढ़ाई ठप है," उन्होंने कहा।

कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, "शिक्षा मंत्री ने खुद स्वीकार किया कि 500 शिक्षक स्कूल नहीं जाते और किराए पर लोग लगा रखे हैं। यह कितनी शर्मनाक बात है कि मंत्री को इसकी जानकारी है, लेकिन कार्रवाई की जगह वे इसका महिमामंडन कर रहे हैं।"

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शिक्षक भर्ती: स्थायी नियुक्ति की जगह अतिथि शिक्षक

मध्य प्रदेश में शिक्षकों की कमी को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने दावा किया कि प्रदेश में 90,000 शिक्षक पद खाली हैं, लेकिन सरकार स्थायी भर्ती की बजाय अतिथि शिक्षकों पर निर्भर है। "सरकारी स्कूल जुगाड़ से चलाए जा रहे हैं। आखिर शैक्षणिक स्तर कैसे सुधरेगा?" एक यूजर ने सवाल उठाया।

पुनीत परिहा नामक एक अन्य यूजर ने ट्वीट किया, "70,000 शिक्षक पद खाली, पढ़ाई भगवान भरोसे! भाजपा सरकार की 'विकास' की असली तस्वीर स्कूलों में शिक्षक नहीं, बस जुमले और जुगाड़!"

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी पिछले साल इस मुद्दे को उठाते हुए कहा था, "प्रदेश के 47 जिलों में 2,600 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है, और 7,800 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। यह शिवराज राज का शिक्षा पर आघात है।"

हाल ही में, मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने शिक्षकों के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए वॉक-इन-इंटरव्यू की अधिसूचना जारी की थी, लेकिन यह भर्ती भी अतिथि शिक्षकों के लिए थी, न कि स्थायी।

सरकार की घोषणाएं: हकीकत या जुमलेबाजी?

भाजपा सरकार ने मध्य province में शिक्षा सुधार के लिए कई घोषणाएं की हैं, जिनमें सीएम राइज स्कूल, डिजिटल शिक्षा पोर्टल, और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का कार्यान्वयन शामिल हैं। मध्य प्रदेश शिक्षा पोर्टल 2.0 और 3.0 जैसे डिजिटल मंचों के जरिए सरकार ने दावा किया है कि वह शिक्षा को आधुनिक और पारदर्शी बना रही है।

हालांकि, विपक्ष का कहना है कि ये घोषणाएं केवल दिखावे की हैं। "सीएम राइज स्कूलों को बोर्ड परीक्षाओं से मुक्त करने की बात हो रही है, लेकिन शिक्षकों की कमी का कोई समाधान नहीं है। बिना शिक्षकों के डिजिटल पोर्टल और स्कूलों का क्या फायदा?" उमंग सिंघार ने सवाल उठाया।

शिक्षा विभाग की स्थिति: आंकड़े और हकीकत

  • शिक्षकों की कमी: प्रदेश में 70,000 से 90,000 शिक्षक पद खाली हैं। 2,600 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं, और 7,800 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।
  • बोर्ड परीक्षा परिणाम: मध्य प्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं में फेल होने की दर देश में सबसे ज्यादा है। लाखों बच्चे हर साल 10वीं और 12वीं में असफल हो रहे हैं।
  • अटैचमेंट की समस्या: 15,000 से अधिक शिक्षक प्रशासनिक कार्यों में लगे हैं, जिसके कारण कक्षाओं में पढ़ाई नहीं हो रही।
  • अतिथि शिक्षक: सरकार स्थायी भर्ती की बजाय अतिथि शिक्षकों पर निर्भर है, जिनकी नियुक्ति अस्थायी होती है और कई बार योग्यता पर सवाल उठते हैं।

विपक्ष का आह्वान: शिक्षा के लिए जनआंदोलन

उमंग सिंघार और अन्य कांग्रेस नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर जनआंदोलन शुरू करने की बात कही है। "हम बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। अगर सरकार शिक्षकों की भर्ती और अटैचमेंट खत्म करने में नाकाम रहती है, तो हम सड़कों पर उतरेंगे," सिंघार ने चेतावनी दी।

कांग्रेस ने अशोकनगर में 8 जुलाई 2025 को 'न्याय सत्याग्रह' का आयोजन भी किया है, जिसमें सत्ता के दुरुपयोग और सामाजिक न्याय के मुद्दों के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को भी उठाया जाएगा। "यह सत्याग्रह केवल कांग्रेस का नहीं, बल्कि हर उस माता-पिता और बच्चे का है, जो शिक्षा के लिए तरस रहा है," रणविजय सिंह लोचब ने कहा।

वन इंडिया हिंदी के सीनियर रिपोर्टर लक्ष्मी नारायण मालवीय ने जब इस मामले पर स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से बातचीत करने की कोशिश की तो उनके बंगले पर मौजूद सहायक पचौरी ने भ्रामक जानकारी देकर मामले से ध्यान भटकने की कोशिश की।

सरकार का जवाब: क्या है योजना?

मध्य प्रदेश सरकार ने शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं, जिनमें अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति और शिक्षा पोर्टल के माध्यम से डिजिटल ट्रैकिंग शामिल हैं। हाल ही में, लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने शैक्षणिक सत्र 2024-25 में रिक्त पदों पर अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था के लिए आदेश जारी किया था। इसके अलावा, सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्कूलों में बिजली व्यवस्था और चिकित्सा व्यय के लिए बजट आवंटन भी किया है।

हालांकि, विपक्ष का कहना है कि ये कदम नाकافی हैं। "अतिथि शिक्षक स्थायी समाधान नहीं हैं। सरकार को स्थायी भर्ती और शिक्षकों की ट्रेनिंग पर ध्यान देना होगा," जीतू पटवारी ने कहा।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत

मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की यह बदहाली न केवल बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर रही है, बल्कि राज्य के विकास को भी बाधित कर रही है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत मध्य प्रदेश ने कई योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी और प्रशासनिक लापरवाही इन योजनाओं को प्रभावी नहीं होने दे रही।

  • शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य प्रदेश को अपनी शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने होंगे:
  • स्थायी शिक्षक भर्ती: 70,000 से अधिक रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए।
  • अटैचमेंट खत्म करना: प्रशासनिक कार्यों में लगे शिक्षकों को स्कूलों में वापस भेजा जाए।
  • विषय विशेषज्ञ शिक्षक: कक्षाओं में विषय के अनुसार योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की जाए।
  • बुनियादी ढांचा: स्कूलों में पीने का पानी, शौचालय, और बिजली जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
  • शिक्षक प्रशिक्षण: नियमित प्रशिक्षण और कार्यशालाओं के जरिए शिक्षकों की गुणवत्ता बढ़ाई जाए।

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