Ujjain: भगवान भैरवनाथ को चढ़ाए गए 1,351 तरह के भोग, जिसमें शामिल थी 40 वैराइटी की शराब, 60 तरह की सिगरेट
Ujjain: भगवान भैरवनाथ को चढ़ाए गए 1,351 तरह के भोग, जिसमें शामिल थी 40 वैराइटी की शराब, 60 तरह की सिगरेट
Ujjain Kaal Bhairav Temple: मध्यप्रदेश के उज्जैन के भैरव मंदिर में दूर-दूर से दर्शन करने के लिए लोग आते हैं। भैरव बाबा को खुश करने के लिए उन्हें तरह-तरह का प्रसाद चढ़ा कर उन्हें प्रसन्न किया जाता है। वहीं बुधवार की शाम भैरव अष्टमी के अवसर पर मंदिर में भैरव भगवान का अद्भुद श्रृंगार किया गया और उन्हें जो भोग लगाया गया, उसकी जमकर चर्चा हो रही है।

शराब, सिगरेट के साथ भैरव बाबा को खुश करने के लिए भांग-गांजा भी चढ़ाया गया
ऐसा इसलिए हैं क्योंकि उज्जैन के भगतीपुरा स्थित 56 भैरव मंदिर में भगवान भैरवनाथ को शराब और सिगरेट समेत 1,351 प्रकार की चीजों से भोग लगाया गया। भैरव बाबा के महाभोग में 1,351 प्रकार के व्यंजनों में विभिन्न प्रकार की शराब, सिगरेट, भांग और गांजे शामिल थे।

भैरव अष्टमी बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है
बता दें उज्जैन के काल भैरव मंदिर में शराब चढ़ाने की परंपरा है। प्राचीन काल से यहां भैरव अष्टमी बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। हर बार की तरह इस बार भी भैरव बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया गया और पूजा के बाद भक्तों ने 1,351 प्रकार के व्यंजनों के साथ शराब, सिगरेट, भांग और गांजे महाभोग लगाया।

भैरव अष्टमी पर चढ़ाए गए भोग में शामिल थी ये चीजें
बुधवार की शाम भैरव अष्टमी पर चढ़ाए गए भोग में जो चीजें शामिल थीं
उसमें 390 प्रकार की अगरबत्ती, 180 प्रकार के फेस मास्क, 75 प्रकार के मेवे, 64 प्रकार की चॉकलेट, 60 प्रकार की गुजराती नमकीन, 60 प्रकार की सिगरेट, 56 प्रकार के नमकीन, 55 प्रकार की मिठाई, 45 इसमें 40 तरह के बिस्किट, 40 तरह की बेकरी आइटम और 30 तरह की गजक, 28 तरह की सॉफ्ट ड्रिंक और 28 तरह के फल शामिल था।
इसके अलावा इस भोग में 40 तरह की शराब जिसमें रम, व्हिस्की, टकीला, वोदका बीयर और शैम्पेन, चिलम, भांग शामिल थे।

पूरा प्रसाद भक्त ही प्रसाद लाते हैं
प्रसिद्ध भैरव मंदिर में भक्त महाभोग के लिए सभी प्रसाद उपलब्ध कराते हैं, जिसे भैरवनाथ को भोग लगाने के बाद प्रसाद को भक्तों में बांटा जाता है।

मंदिर में भक्तों की सारी मनोकामना पूरी होती है
गौरतलब है कि शिप्रा नदी के तट पर स्थित, काल भैरव मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसे राजा भद्रसेन ने बनवाया था। इस प्रसिद्ध की मान्यता के अनुसार भैरव अष्टमी के दिन बाबा भैरव नाथ की पूजा करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।












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