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मेरे कपड़े मत उतरवाओ, अंडरवियर फटा है, पुलिस बोली- 'नंगे हो जाओ'

By Rahul Kumar
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    भोपाल। टीकमगढ़ में प्रदर्शनकारियों को अर्द्धनग्न कर पिटाई मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। किसानों के साथ बदसलूकी मामले में शिवराज सिंह को फजीहत झेलनी पड़ रही है। इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक किसानों की लाख मिन्नतों के बावजूद पुलिस वालों ने उनकी एक ना सुनी। हालांकि गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने किसानों के कपड़े उतरवाने के आरोप की जांच के आदेश दे दिये हैं। अब इस मामले पर टीकमगढ़ पुलिस ने अजीब तर्क रखा है। पुलिसकर्मियों का कहना है कि फांसी लगाने के डर से किसानों के हवालात के बाहर कपड़े उतरवाए थे।

    पुलिस थाने में उन्होंने मेरे कपड़े उतरवाये

    पुलिस थाने में उन्होंने मेरे कपड़े उतरवाये

    किसानों ने बताया कि, मैं यहाँ रैली में ये सोच कर आया था कि सिंचाई के लिए बिजली और पानी जैसी हमारी समस्याएं हल हो जाएंगी। मेरी फसल बर्बाद हो गयी थी तो मुझे लगा यहां मुझे कुछ राहत मिल जाएगी। लेकिन यहां उलटा हुआ। पुलिसवालों ने मुझे पीटा, फिर पुलिस थाने में उन्होंने मेरे कपड़े उतरवाये। मैं कहा कि 'मेरे कपड़े मत उतरवाओ मेरी अंडरवियर फटी है, फिर वे बोले नंगे हो जाओ।'

    उनके चेहरे पर शर्मिंदगी साफ दिख रही थी

    उनके चेहरे पर शर्मिंदगी साफ दिख रही थी

    अपनी पीड़ा बताते हुए 45 वर्षीय बलवान सिंह घोष के चेहरे पर शर्मिंदगी साफ दिख रही थी। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ से करीब 20 किलोमीटर दूर वर्मा मांज गांव के रहने वाले बलवान उन किसानों में थे जिन्हें टीकमगढ़ देहात स्टेशन पर मंगलवार (3 अक्टूबर) को पुलिस ने हिरासत में लिया था। पुलिस ने करीब 50 किसानों को हिरासत में लिया था। टीकमगढ़ पुलिस ने हिरासत में लिये गये किसानों के संग मारपीट के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के अनुसार कपड़े उतरवाने की भी जांच शुरू हो गयी है।

    इस घटना को मैं पूरी जिंदगी नहीं भूल पाऊंगा

    इस घटना को मैं पूरी जिंदगी नहीं भूल पाऊंगा

    इंडियन एक्सप्रेस को वरमा मांज के पांच किसानों ने बताया कि उनका किसी राजनीतिक पार्टी से कोई संबंध नहीं है। किसानों का आरोप है कि पुलिस ने कपड़े उतरवाने के लिए उनके संग मारपीट भी की। एक किसान ने बताया कि पुलिस ने करीब आधे घंटे तक उनके संग दुर्व्यहार किया। एक पुलिसवाले ने उन्हें 'आतंकवादी' भी कहा। बलवान सिंह कहते हैं, 'मैं कभी पहले पुलिस थाने नहीं गया था लेकिन इस घटना को मैं पूरी जिंदगी नहीं भूल पाऊंगा। उन्होंने मुझे मारा-पीटा। मैं रैली में इसलिए शामिल हुआ क्योंकि मेरी 6 एकड़ जमीन पर केवल छह क्विंटल उड़द और सोयाबीन हुआ है जबकि पिछले साल करीब 17 क्विंटल उपज हुई थी।'

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    English summary
    Tikamgarh Police have denied that the farmers were beaten and stripping inside the station

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