MP: नौरादेही में अब 'टाइगर' राज! 'राधा-किशन' के कुनबे में 12 सदस्य, जल्द बढ़ेंगे शावक
सागर, 15 सितंबर। मप्र को टाइगर स्टेट का तमगा दिलाने में अब सागर के नौरादेही का नाम भी सम्मान से लिया जाएगा। यहां बीते चार सालों में बाघ परिवार ने उम्मीद से कहीं बढ़कर वृद्धि की है। चार साल पहले केवल दो बाघों को यहां लाकर छोड़ा गया था। पहले साल में इनकी संख्या बढ़कर 2 से पांच हुई तोअब यह 12 पर पहुंच गई हैं। अभयारण्य में एक मेहमान बाघ भी मौजूद है, जो बीते एक साल पहले नौरादेही आकर यहीं का होकर रह गया है। यह नौरादेही वन्य प्राणी अभयारण्य और सागर के लिए सुखद समाचार है कि बाघों ने एक बार फिर से नौरादेही को अपना स्थाई ठिकाना बना लिया है।

नौरादेही में पहले दो शावक दिखे थे, अब चारों एक साथ दिखे
नौरादेही की बाघिन राधा ने बीते महीनों में शावकों को जन्म दिया था, उस समय उसके सिर्फ दो शावक ही नौरादेही के गश्ती दल को नजर आए थे। बीते दिनों में एक साथ चार शावक नौरादेही में लगाए गए ट्रेप कैमरों मे कैद हुए तो पता चला कि प्रबंधन जिन्हें महज दो शावक मान रहा था, वे चार हैं। प्रबंधन के अधिकारियों का मानना है कि बाघिन अपने शावकों को मांद या गुफा में छिपाकर पालती है, जब तक वे थोड़ा संभल नहीं जाते। शावकों को सबसे ज्यादा खतरा बाघ से ही हो सकता है। इस कारण हो सकता है कि उसने अपनी मांद से इनको बाहर न निकाला हो। बहरहाल पूरे 8 माह बाद ही सही, नौरादेही के लिए यह अच्छी खबर है कि यहां बाघ परिवार के कुल 12 सदस्य मौजूद हैं।

बाघिन राधा और उसकी बेटी एन-12 के मिलाकर 6 शावक हैं
नौरादेही में बाघिन 12 दो बार गर्भवती होकर बच्चों को जन्म दे चुकी है। साल 2019 में उसने तीन शावकों को जन्म दिया था। साल 2021 के अंत में बाघिन राधा और बाघ किशन से ये चार शावकों ने जन्म लिया है। इसी बीच राधा के पहले प्रसव में जन्मी बाघिन-12 ने भी दो शावकों को जन्म दिया था। इसके शावक भी यहां मौजूद हैं। इस लिहाज से राधा-किशन के बाघ परिवार में अब कुल 11 सदस्य मौजूद हैं। जबकि कुछ महीनों पहले किसी अन्य वन्य प्राणी इलाके से एक बाघ नौरादेही के जंगलों में पहुंच गया था। यह टाइगर फिर वापस नहीं गया और उसने यहीं पर अपना बसेरा बना लिया है। इसको मिलाकर 12 बाघ हो गए हैं।

नौरादेही में शावकों की संख्या जल्द ही बढ़ सकती है
नौरादेही प्रबंधन से मिली जानकारी अनुसार यहां बाघिन राधा की तीन संतानों में दो मादा व एक नर बाघ थे। एन-12 के प्रसव के अलावा यहां एन-11 बाघिन भी गर्भवती थी, जल्द ही उसके भी शावक जन्म ले सकते हैं। चूंकी बारिश का समय है, इस कारण गश्ती दल घने जंगलों व दुर्गम इलाकों में बाघों की टेरेटरी तक पहुंच नहीं पाते हैं। इस कारण बीते दो महीनों के बीच यदि एन-11 के बच्चों को जन्म दिया होगा तो इसकी जानकारी प्रबंधन को नहीं लग पाई है। हालंाकि प्रबंधन को उम्मीद है कि बाघों की संख्या 12 से बढ़कर 14 हो सकती है।

टाइगर रिजर्व बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है
नौरादेही अभयारण्य को बाघों की संख्या बढ़ने के बाद टाइगर रिजर्व बनाने का प्लान तैयार हो चुका है। करीब दो महीने पहले सागर नौरादेही वन मंडल कार्यालय व सीसीएफ कार्यालय से टाइगर रिजर्व के लिए विस्तृत प्लान व अधिसूचना तैयार कर मप्र शासन वन मंत्रालय को भेजी जा चुकी है। यहां से इसे केंद्र के पास भेजा जाएगा। प्रबंधन सूत्रों के अनुसार यदि सबकुछ ठीकठाक रहा तो आगामी साल में नौरादेही को टाइगर रिजर्व बनाया जा सकता है। इसके पूर्व इसे नेशनल पार्क बनाने का प्रस्ताव गया था, लेकिन टाइगर रिजर्व के प्लान के चलते शासन ने इसको आगे नहीं बढ़ाया।

बाघ विहीन हो गया था, 2018 में बाघ पुनर्स्थापन प्रोजेक्ट लागू
नौरादेही अभयारण्य में 1990 के दशक से लेकर 2006 तक बाघों की मौजूदगी के प्रमाण रहे हैं। लेकिन साल 2008 के बाद से यहां एक भी बाघ नहीं देखा गया था, न उनकी मौजूदगी के कोई प्रमाण मिले थे। कुल मिलाकर नौरादेही अभयारण्य बाघ विहीन हो चुका था। सरकार ने साल 2018 में बाघ पुनस्र्थापन प्रोग्राम के तहत यहां कान्हा टाइगर रिजर्व से बाघिन जिसे राधा नाम दिया गया था, उसे लाकर बाडे़ में रखा गया था। उसके बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से नर बाघ जिसे किशन नाम दिया गया था, उसे दूसरे बाड़े में रखा गया था। यह बाघ इतना तेज था कि उसके बाड़े के पास जाने की हिम्मत अमला तक नहीं कर पाता था। चंद रोज में इन दोनों को जंगल में छोड़ा गया था। प्राकृतिक माहौल में राधा-किशन को नौरादेही भा गया और दोनों ने इसे स्थाई घर बनाते हुए परिवार को आगे बढ़ाना शुरु कर दिया था। करीब एक साल बाद राधा-किशन के मिलन से तीन शावकों का जन्म हुआ था। जिसमें दो मादा व एक नर बाघ था। महज चार साल के छोटे से अंतराल में इनकी संख्या उम्मीद से अधिक बढ़कर 12 हो गई हैं। भविष्य के लिए यह अच्छा संकेत है।












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