कूनो नेशनल पार्क से राजस्थान शिफ्ट हो सकते हैं चीते, SC ने केंद्र से विचार करने के लिए जानें क्यों कहा?

दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से कूनो नेशनल पार्क लाए चीतों की मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि इन्हें राजस्थान शिफ्ट क्यों नहीं कर सकते?

Supreme Court

Kuno Wildlife Sanctuary: दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से हाल ही में कुछ चीते मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे। जिसमें 3 चीतों की 2 महीने से भी कम समय में मौत हो गई। चीतों की मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से कहा कि चीतों को राजस्थान में स्थानांतरित करने पर विचार करे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, चीतों को सिर्फ एक जगह बसाना सही नहीं होगा। उन्हें किसी और अभयरण्य में भी बसाने की कोशिश की जानी चाहिए। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह राजनीति से ऊपर उठकर चीतों की चिंता करते हुए विचार करे।

कूनो नेशनल पार्क में हुई 3 चीतों की मौत मामले में न्यायमूर्ति बी.आर.गवई और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने केंद्र से कहा कि विशेषज्ञों की रिपोर्ट और लेखों से ऐसा प्रतीत होता है कि कूनो में चीतों के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है।

इसके मध्य नजर केंद्र सरकार उन्हें (चीतों) अन्य अभयारण्यों में स्थानांतरित करने पर विचार कर सकती है। इस दौरान पीठ ने कहा कि 2 महीने से भी कम समय में तीन चीतों की मौत गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि, इस दौरान पीठ ने कहा कि वह सरकार पर कोई सवाल नहीं उठा रहे हैं, वो सिर्फ चीतों को लेकर अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कूनो में इतने सारे चीतों के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। आप राजस्थान में उपयुक्त जगह की तलाश क्यों नहीं करते? केवल इसलिए कि राजस्थान में विपक्षी पार्टी का शासन है, इसका मतलब यह नहीं है, आप इस पर विचार नहीं करेंगे।

इसपर सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि 3 चीतों की मौक के कारणों का टास्क फोर्स पता लगा रही है। साथ ही यह भी बताया कि एक मादा चीता ने चार शावकों को जन्म दिया है, जो चीता प्रोजेक्ट की एक बड़ी कामयाबी है। सराकर की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि कूनों के माहौल में चीते आराम से रह रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नामीबिया से करीब छह महीने पर मध्य प्रदेश के कूनो लाई गई 'साशा' नाम की एक मादा चीता की मृत्यु किडनी की बीमारी के कारण 27 मार्च को हो गई थी। इसके अलावा 23 अप्रैल को उदय (दक्षिण अफ्रीका) की कार्डियो-पल्मोनरी विफलता के कारण मृत्यु हो गई।

9 मई को दक्ष नामक एक अन्य दक्षिण अफ्रीकी मादा चीता की संभोग के प्रयास के दौरान एक नर चीते के साथ हुई हिंसक झड़प में मौत हो गई। पीठ ने कहा कि रिपोर्टों से ऐसा लगता है कि संभोग को लेकर दो नर चीतों के बीच लड़ाई के दौरान घायल होने के बाद एक मादा चीता की मौत हो गई।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, 'हमें पता चला कि किडनी से संबंधित बीमारी के कारण मरने वाला चीता भारत लाए जाने से पहले समस्या से पीड़ित था। सवाल यह है कि मादा चीता को भारत लाने की मंजूरी कैसे दी गई, अगर वह पहले से ही बीमार थी?'

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    इस दौरान पीठ ने कहा कि आप विदेशों से चीतों को ला रहे हैं, यह अच्छी बात है। लेकिन उन्हें संरक्षित करने की जरूरत है, उन्हें उपयुक्त आवास देने की जरूरत है, आप कूनो की तुलना में अधिक उपयुक्त आवास की तलाश क्यों नहीं करते?

    इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि वह सरकार पर कोई आक्षेप नहीं लगा रही है बल्कि मौतों पर चिंता व्यक्त कर रही है। ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि एक चीते ने 4 शावकों को जन्म दिया है, जिससे पता चलता है कि वे कूनो में अच्छी तरह से अभ्यस्त हो रहे हैं।

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