पांढुर्णा में सीएम राइज स्कूल के स्पोर्ट्स टीचर पर छात्र को शारीरिक सजा देने का आरोप, पुलिस जांच शुरू
पांढुर्णा के सीएम राइज स्कूल (उत्कृष्ट विद्यालय) में मंगलवार सुबह एक विवादित घटना सामने आई, जिसमें स्कूल के स्पोर्ट्स टीचर ने 12वीं कक्षा के एक छात्र को सजा देने के दौरान कथित तौर पर थप्पड़ मारा और उसे बेहोश कर दिया।
इस घटना के बाद छात्र को उसके साथी छात्रों ने घर भेजा, और बाद में उसके परिजन उसे इलाज के लिए सिविल अस्पताल लेकर गए। छात्र के परिजनों ने इस मामले में स्कूल के शिक्षक के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई है, और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

घटना का विवरण
मंगलवार सुबह छात्र ने स्कूल में देर से प्रवेश किया। छात्र के अनुसार, स्पोर्ट्स टीचर खेल सिंह मरकाम ने उसे सजा के रूप में उठक-बैठक लगाने को कहा। छात्र ने बताया कि जब वह उठक-बैठक कर रहा था, तो उसे अचानक चक्कर आने लगे। इसके बाद, टीचर ने उसे थप्पड़ मारे। छात्र ने यह भी बताया कि थप्पड़ मारने के कारण उसकी स्थिति और भी बिगड़ गई, और वह बेहोश हो गया।
पीड़ित छात्र का बयान
पीड़ित छात्र ने बताया, "मैं 10:35 बजे स्कूल पहुंचा था, उसके बाद टीचर ने मुझे उठक-बैठक करने को कहा। जब मैं उठक-बैठक कर रहा था, तो मुझे चक्कर आने लगे और तब टीचर ने मेरी कनपटी पर थप्पड़ मारे।" छात्र ने यह भी कहा कि थप्पड़ मारने के बाद वह और अधिक असहज महसूस करने लगा और अंततः वह बेहोश हो गया।
मां का बयान
छात्र की मां ने बताया कि जब वह घर में थी, तो बाहर से आवाजें सुनकर उसने दरवाजा खोला। दरवाजे पर उसके बेटे के दोस्त खड़े थे और उन्होंने बताया कि उसका बेटा बेहोश है। मां के मुताबिक, "हमने उसे तुरंत सिविल अस्पताल भेजा, जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज किया।"
स्पोर्ट्स टीचर का पक्ष
स्पोर्ट्स टीचर खेल सिंह मरकाम ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि छात्र रोजाना देर से स्कूल आता है। उन्होंने बताया, "मंगलवार को भी वह लेट आया था। मैंने उसे कमर पर हाथ रखकर उठक-बैठक करने के लिए कहा था, लेकिन उस समय मुझे एहसास हुआ कि उसकी स्थिति ठीक नहीं है, इसलिए मैंने सिर के पीछे धीरे से हाथ लगाया था। मेरा उद्देश्य उसे नुकसान पहुंचाना नहीं था।"
पुलिस जांच
घटना के बाद छात्र के परिजनों ने टीचर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पांढुर्णा पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि वे सभी गवाहों और दोनों पक्षों से बयान लेने के बाद उचित कदम उठाएंगे।
यह घटना स्कूलों में छात्रों के साथ होने वाली शारीरिक सजा के मुद्दे को फिर से उठाती है, और यह सवाल खड़ा करती है कि क्या शिक्षकों को इस तरह की सजा देने का अधिकार होना चाहिए। सरकार और शिक्षा विभाग से इस मामले में कड़ी कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।












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