MP News: भोपाल रेलवे मंडल में सिग्नलिंग तकनीक, निशातपुरा यार्ड में देश की पहली ऑप्टिकल फाइबर प्रणाली
MP News: भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नई तकनीकी क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल ने निशातपुरा यार्ड में देश की पहली ऑप्टिकल फाइबर आधारित सिग्नलिंग प्रणाली को सफलतापूर्वक शुरू कर दिया है।
यह कदम न केवल रेलवे सिग्नलिंग को डिजिटल और स्मार्ट बनाएगा, बल्कि इसके ज़रिए संचालन की विश्वसनीयता और सुरक्षा स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।

किस तरह काम करती है यह नई तकनीक?
परंपरागत रूप से रेलवे सिग्नलिंग में सैकड़ों मीटर लंबी वायरिंग, रिले बॉक्स, भारी केबल और मैनुअल हस्तक्षेप की जरूरत होती थी। लेकिन अब 'लैम्प आउटपुट मॉड्यूल' नामक एक खास डिवाइस को सिग्नल पोस्ट पर लगाया गया है, जो सीधे कंट्रोल रूम से ऑप्टिकल फाइबर के जरिए जुड़ा होता है।
इसका मतलब यह है कि-
- सिग्नल का ऑपरेशन अब डिजिटल कमांड से होगा।
- मैनुअल गड़बड़ियों या वायर कटने जैसी समस्याएं अब नहीं रहेंगी।
- सिग्नल का संचालन होगा रीयल-टाइम और सुरक्षित।
पुराने सिस्टम की तुलना में फायदे:
- पारंपरिक प्रणाली ऑप्टिकल फाइबर आधारित नई प्रणाली
- भारी केबल और वायरिंग फाइबर से डिजिटल कमांड
- मैनुअल निगरानी की जरूरत रीयल-टाइम मॉनिटरिंग
- रखरखाव में समय और लागत कम रखरखाव, तेज़ रेस्पॉन्स
- तकनीकी खराबियों की संभावना न्यूनतम फॉल्ट
कहां हुआ पहली बार प्रयोग?
भोपाल मंडल के निशातपुरा यार्ड में सबसे पहले यह तकनीक दो सिग्नल्स-S/SH-15 और S/SH-16 पर लागू की गई है। यहां इसका सफल परीक्षण किया गया, जिसमें पाया गया कि सिग्नल का रेस्पॉन्स टाइम परंपरागत सिस्टम की तुलना में 30% तेज है और कोई मैनुअल इंटरवेंशन की आवश्यकता नहीं पड़ी।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने जानकारी देते हुए कहा, "यह देश का पहला ऐसा यार्ड है, जहां सिग्नल ऑपरेशन पूरी तरह ऑप्टिकल फाइबर आधारित हुआ है। यह भारतीय रेलवे के डिजिटलीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।"
भोपाल से बीना रेलखंड तक होगा विस्तार
इस आधुनिक तकनीक को अब जून 2026 तक भोपाल से बीना रेलखंड पर पूरी तरह लागू किया जाएगा। इसके बाद इसे देश के अन्य प्रमुख रेलमार्गों पर भी विस्तार देने की योजना है, विशेष रूप से उन मार्गों पर जहां हाई स्पीड और भारी ट्रैफिक है।
क्यों है यह तकनीक गेमचेंजर?
रेलवे सिग्नलिंग प्रणाली ट्रेनों की सुरक्षा, समयपालन और ट्रैक मैनेजमेंट का आधार है। अगर सिग्नलिंग आधुनिक नहीं है, तो दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
Bhopal Railway Division: ऑप्टिकल फाइबर तकनीक के फायदे-
- हैकिंग से सुरक्षित: डिजिटल एन्क्रिप्शन के चलते सिग्नल को किसी बाहरी हस्तक्षेप से बचाया जा सकता है।
- भविष्य के लिए तैयार: AI और ऑटोमेशन आधारित ट्रेनों के लिए आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर।
- कम मानव संसाधन: संचालन और निगरानी के लिए कम स्टाफ की जरूरत।
- एनर्जी एफिशिएंसी: कम पावर खपत।
- राष्ट्रीय स्तर पर क्या होगा असर?
रेलवे मंत्रालय इस तकनीक को डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, सेमी हाई-स्पीड रेल, और बड़े जंक्शनों पर प्राथमिकता से लागू करने की योजना बना रहा है। यह भारत को विश्व स्तर की रेल सिग्नलिंग प्रणाली की ओर ले जाएगा।
निशातपुरा यार्ड में शुरू हुई यह तकनीक सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे के भविष्य की नींव है। जहां एक ओर यह यात्रियों को अधिक सुरक्षा और समयपालन का भरोसा देगी, वहीं रेलवे को मेंटेनेंस, लागत और संचालन में दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। यह पहल दर्शाती है कि रेलवे सिर्फ पटरियों पर दौड़ने वाला सिस्टम नहीं, बल्कि एक स्मार्ट, तकनीकी, और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनता जा रहा है।












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