थाने में पत्रकार को नंगा करने पर एमपी पुलिस ने दिया ऐसा तर्क, लोग बोले- मजाक चल रहा है क्या?
भोपाल, 8 अप्रैल: मध्य प्रदेश के सीधी जिले में पत्रकार और रंगकर्मियों को पुलिस स्टेशन में बंद कर उनके कपड़े उतरवाने के मामले की देशभर में आलोचना हो रही है। इसको लेकर सीधी पुलिस सवालों को घेरे में है। काफी आलोचना के बाद सीधी पुलिस ने इस पर जवाब दिया है। हालांकि जो जवाब आया है, वो लोगों के गले नहीं उतर रहा है। पुलिस ने पत्रकार के कपड़े उतरवाने की वजह सुरक्षा को बताया है।

सीधी के जिस थाने में पत्रकार कनिष्क तिवारी और रंगकर्मियों के कपड़े उतरवाकर बैठाया गया, उसके प्रभारी मनोज सोनी की सफाई आई है। थाना प्रभारी मनोज सोनी ने कहा है कि हमने उनको पूरी तरह से नंगा नहीं किया, सभी ने अंडरवियर पहन रखी है। उनके कपड़े सुरक्षा की दृष्टि से उतरवाए गए क्योंकि कई बार कैदी अपने कपड़ों से फांसी लगा लेते हैं। इस वजह से हमने उनके कपड़े उतरवा लिए थे। इस मामले में सीधी पुलिस के इस तर्क को कई लोगों ने हास्यास्पद कहा है। सोशल मीडिया पर लोगों ने लिखा है कि इतनी अमानवीयता के बाद भी पुलिस कुछ भी बोल रही है, उसे अब तो संवेदनशीलता दिखाने की जरूरत है।
सीधी पुलिस पर हैं गंभीर आरोप
इस मामले में थाना प्रभारी मनोज सोनी पर कई गंभीर आरोप हैं। पीड़ित पत्रकार का कहना है कि उनको लॉकअप में नंगा रखा गया क्योंकि उन्होंने भाजपा विधायक के खिलाफ खबरें की थीं। पत्रकार का कहना है कि मनोज सोनी ने उन्हें धमकाया कि अगर वह विधायक के खिलाफ खबर लिखेंगे तो इसी तरह प्रताड़ित होंगे। सोनी ने उनको सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला के खिलाफ कुछ भी लिखने पर इसी तरह की कार्रवाई की धमकी दी है।
विपक्ष हमलावर
सीधी में पत्रकार और रंगकर्मियों को पुलिस स्टेशन में बंद कर उनके कपड़े उतरवाने के मामले पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की प्रतिक्रिया आई है। पत्रकार कनिष्क तिवारी समेत आठ लोगों के साथ थाने में बदसलूकी को लेकर राहुल ने केंद्र और मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार को निशाने पर लेते हुए इसे प्रेस और मीडिया का चीरहरण कहा है। वहीं मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने इस मामले को बेहद शर्मनाक कहा है। उन्होंने कहा कि इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। इस पूरे मामले में दोषियों पर जो कार्यवाही की गई है, वह नाकाफी है।












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