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MP News: जानिए IPS डी रूपा और उमा भारती का फर्जी वीडियो बनाने वाले शाकिर ने यूट्यूब से कितने रुपए कमाए

Bhopal News: मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के खिलाफ गलत और अपमानजनक कंटेंट फैलाने के आरोप में खंडवा जिले के एक यूट्यूबर शाकिर खान उर्फ पाजी को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है।

शाकिर ने एक फर्जी वीडियो बनाकर यूट्यूब पर अपलोड किया था, जिसमें उमा भारती और आईपीएस अधिकारी डी रूपा के खिलाफ झूठी और अपमानजनक जानकारी दी गई थी। इस वीडियो के माध्यम से शाकिर ने ₹9000 कमाए थे।

Shakir who made fake video of IPS D Roopa and Uma Bharti earned 9000 from YouTube

वीडियो का कंटेंट

इस वीडियो में शाकिर ने उमा भारती के कार्यकाल के दौरान कथित ठेकेदारों से लेन-देन का आरोप लगाया और दावा किया कि डी रूपा ने नौकरानी का भेष धारण करके उमा भारती को गिरफ्तार किया था। यह वीडियो पूरी तरह से झूठा और भ्रामक था, जिसका उद्देश्य दोनों सार्वजनिक हस्तियों की छवि को नुकसान पहुंचाना था।

शाकिर की गिरफ्तारी, 300 फर्जी वीडियो बनाए

क्राइम ब्रांच के अनुसार, शाकिर ने पिछले 6 महीनों में करीब 300 ऐसे फर्जी वीडियो बनाए और यूट्यूब पर अपलोड किए। वह आईपीएस अधिकारियों और नेताओं के असल वीडियो लेकर उन्हें एडिट करता और फिर अपनी मनमर्जी का कंटेंट जोड़कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देता था। इससे उसे लाइक और व्यूज मिलते थे, और वह इसके माध्यम से अच्छी कमाई कर रहा था।

आरोपी की पहचान

शाकिर ग्राम लहाड़पुर, तहसील कल्लोद, जिला खंडवा का निवासी है और 20 वर्ष का है। वह बीए सेकंड ईयर का छात्र है और साथ ही खेती-बाड़ी का काम भी करता है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों से उसने यूट्यूब पर वीडियो बनाने और अपलोड करने का काम शुरू किया था, जिससे उसे अच्छा पैसा मिल रहा था।

क्राइम ब्रांच की कार्रवाई:

शाकिर के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद, क्राइम ब्रांच ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। क्राइम ब्रांच अधिकारियों का कहना है कि आरोपी शाकिर ने इंटरनेट पर इस तरह के झूठे वीडियो डालकर कंटेंट का दुरुपयोग किया और अन्य लोगों की छवि को नुकसान पहुंचाया।

मामले की गंभीरता:

इस घटना से यह साफ होता है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग व्यक्तिगत और सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। ऐसे मामलों में क्राइम ब्रांच की कार्रवाई यह बताती है कि सोशल मीडिया पर फर्जी जानकारी फैलाना और लोगों की छवि को नुकसान पहुंचाना कानूनी रूप से दंडनीय है।

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