sehore borewell rescue: मासूम सृष्टि को बचाने के लिए अब तक क्या-क्या हुआ? 10 प्वॉइंट में जानिए
मप्र के सीहोर जिले के मुंगावली में घर के बाद ढाई साल की मासूम सृष्टि खेलते-खेलते 300 फीट गहरे बोरवेल में समा गई। शाम से जिला प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं, अब सेना भी मोर्चा संभाले हैं।

मप्र में के सीहोर मुंगावली में मंगलवार दोपहर में ढाई साल की मासूम सृष्टि 300 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी। सूचना मिलने के बाद शाम से रेस्क्यू आपरेशन चल रहा है, सारी रात प्रयास के बावजूद बच्ची गड्ढे की खुदाई के दौरान चट्टानों में कंपन के कारण पहले 25 फिर 50 और अब 100 फीट नीचे गहराई में जाकर फंस गई है। हम आपको 10 प्वाइंट में बताते हैं, अब तक क्या-क्या हुआ, कैसे बचाव के लिए रेस्क्यू किया जा रहा है
1 - सीहोर के मुंगावली गांव में मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे घर के पास ढाई साल की बच्ची खेलते-खेलते 300 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई।
2 - बोरवेल के ऊपर तगाड़ी ढंकी थी, जिस पर पैर पड़ा और बच्ची बोरवेल में समा गई।
3 - बच्ची की मां रानी को जब बच्ची नहीं दिखी तलाश शुरू हुई तो पता चला कि सृष्टि बोरवेल के गड्ढे में गिर गई है।
4 - सृष्टि के पिता राहुल कुशवाहा व परिजन ने पुलिस व प्रशासन तक सूचना दी तो एक-एक कर टीमें मौके पर पहुंच गई।
5 - रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए एनडीआरएफ-एसडीआरएफ और प्रशासनिक टीमों पोकलेन और जेसीबी से समानांतर गड्ढा खोदना शुरू किया था।
6 - प्रशासन के अनुसार मासूम बच्ची बोरवेल में करीब 25 से 30 फीट गहराई पर फंसी थी।
7 - सुबह पता चला कि बच्ची खुदाई और चट्टानों में कंपन के कारण सुबह बच्ची खिसककर 50 फीट गहराई पर जाकर फंस गई थी।
8 - दोपहर में पता चला कि बच्ची की कैमरे में धुंधली तस्वीर नजर आ रही है, लेकिन मूवमेंट नहीं दिख रहा था।
9 - रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मासूम बच्ची लगातार कंपन के कारण करीब 100 फीट नीचे तक खिसक गई थी।
10 - एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सेना के अधिकारियों से बात की तो सेना की टीम मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू में जुट गई।
रेस्क्यू में यह चुनौतियां अब भी सामने खड़ीं
Recommended Video
रेस्क्यू में जुटे स्थानीय के अनुसार जहां बोरवेल में बच्ची गिरी है, वहां जमीन के अंदर 20 फीट तक मिट्टी, 5 फीट पत्थर, मिक्स बजरी, कच्ची या कुटकी पत्थर और 60 फीट गहराई व उसके नीचे कठोर काला पत्थर है। काले पत्थर की खुदाई पोकलेन या जेसीबी से संभव नहीं हो पा रही है, इस कारण अब क्रेशर में पत्थर तोड़ने वाली बड़ी इलेक्ट्रिक ऑपरेटेड कंप्रेशर ड्रिल मशीनों से समानांतर गड्ढा खोदा जा रहा है। सेना अपने तरीके से रेस्क्यू में जुटी है, जिसमें समानांतरण गहराई से नीचे तक गड्ढा खोदकर फिर बच्ची तक टनल बनाकर पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।












Click it and Unblock the Notifications