MP: गुजरात के बाद बीना में बनेगा सबसे बड़ा पेट्रोकेमिकल हब, डेढ़ लाख लोगों को रोजगार की उम्मीद
सागर, 10 सितंबर। भारत की अग्रणी कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड मप्र के सागर जिले में बीना रिफायनरी के साथ-साथ पेट्रोकेमिकल हब बनाने जा रही है। इसमें कंपनी करीब 45 हजार करोड़ रुपए का निवेश करेगी। पेट्रोकेमिकल हब बनने से इलाके सहित जिले में रोजगार के नए साधन विकसित होंगे। शुरुआती तौर पर अनुमान है कि हब के अंदर व बाहर करीब डेढ़ लाख लोगों को मुख्य व सहायक रुप से रोजगार मिल सकेगा।

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड करीब 45 हजार करोड़ का निवेश करेगी
मप्र के सागर जिले में बीना को एक और उपलब्धि मिलने जा रही हैं। भारत ओमान रिफाइनरी को टेकओवर कर चुकी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड कंपनी यहां पर करीब 45 हजार करोड़ का निवेश करेगी। यहां पर पेट्रोकेमिकल हब विकसित किया जाएगा। इसके लिए बीपीसीएल और मप्र सरकार के बीच अनुबंध हो चुका है। शासन से अनुमति व कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पेट्रोकेमिकल हब का निर्माण अब जल्द शुरु होने वाला है। अच्छी खबर यह है कि यहां पर सहायक उद्योग आने के बाद स्थानीय लोगों को रोजगार के नए साधन विकसित होंगे व तकनीकि योग्यता रखने वालों को यहां नौकरी की संभावनाएं भी खुलेंगी। लंबे समय से इको लेकर प्रक्रिया चल रही थी। कंपनी और सरकार के बीच करार होने के बाद अब इसका रास्ता साफ हो गया है।

रिफाइरी परिसर में ही पेट्रोकेमिकल हब विकसित होगा
जानकारी अनुसार बीपीसीएल रिफाइनरी के भीतर ही पेट्रोकेमिकल हब का निर्माण करेगी। बाउंड्री के अंदर पर्याप्त जगह उपलब्ध है। यदि आवश्यकता पड़ी तो आसपास के इलाके में करीब 2500 सौ एकड़ खाली पड़ी जमीन भी अधिग्रहित की जा सकती है। शासन इसका प्लान तैयार कर चुका हैं। हब तैयार होने और उत्पादन प्रारंभ होने के बाद यहां राॅ मटेरियल उपलब्ध हो सकेगा। रॉ मटेरियल सहित अन्य सहायक उत्पाद के लिए इलाके में नए सिरे से सहायक उद्योग स्थापित हो सकेंगे। रिफाइनरी में अभी तक जो प्लास्टिक मटेरियल आयात किया जाता है, वह यहीं तैयार हो सकेगा। साथ ही सहयोगी उत्पात जैसे प्लांट ग्रीस, डामर, ऑयल जैसी कंपनियां भी यहां आएंगी।

पेट्रो केमिकल्स हब में यह उत्पाद तैयार होंगे
रिफाइनरी क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार पेट्रो केमिकल्स हब में रिफाइनरी में मौजूद फैसिलिटी के साथ-साथ कंपनी यहां पर हाई डेंसिटी पाॅलिथीन, एलएलडीपीई, पाॅपीप्राॅपीलेन, बेंजीन, टाॅलेन, जाइलेन जैसे महत्पूर्ण केमिकल्स उत्पाद तैयार करेगी। इन केमिकल्स का उपयोग फाइबर, फिल्म, माल्डिंग और पाइप सहित इसी तरह के हजारों उत्पाद बनाने में उपयोग किए जाते हैं। इन केमिकल्स को रॉ मटेरियल के तौर पर उपयोग किया जाता है। सरकार द्वारा यहां बीपीसीएल द्वारा किए जा रहे निवेश को देखते हुए एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति सहित ब्याज मुक्त कर्ज व अन्य कई टैरिफ में छूट दिए जाने की भी घोषणा की गई है। यहां कई बड़े सेगमेंट में भी निवेश आने की संभावना बताई जा रही है।

मुख्य पेट्रोकेमिकल सहित अन्य उत्पाद की इकाईयां भी स्थापित होंगी
बीपीसीएल द्वारा अधिग्रहण किए जाने के बाद अब रिफायनरी में 45 हजार करोड़ रुपए का निवेश कर इसका विस्तार किया जा रहा है। नए निवेश में यहाँ पेट्रो कैमिकल हव बनेगा जिसके तहत क्षेत्र में फिर एथेनाइल केकर इकाई, लो एवं हाईडेन सिटी की पाली एथेनाइल, विटुमिन, वैंजीन, टाल्यूइन, जॉयलिन आदि के निर्माण की इकाईयां भी शुरू होगीं। नए निवेश के बाद इस पेट्रो कैमिकल हव में कई सहायक उद्योग भी लगेगें। बताया जाता है कि परियोजना से कच्चा माल यहीं पर कम दर पर मिलने के चलते फिल्म फाईवर्स, इंजेक्शन वोलडिंग, पाइप सहित बड़े सेगमेंट में भी निवेश आएगा। सरकार द्वारा यहां बीपीसीएल द्वारा किए जा रहे निवेश को देखते हुए एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति सहित ब्याज मुक्त कर्ज व अन्य कई टैरिफ में छूट दिए जाने की भी घोषणा की गई है।

बीओआरएल से भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को हस्तांतरित हो चुकी
गौरतलब है कि इसी साल जुलाई में बीना रिफायनरी को बीओआरएल से भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया था। इसमे मप्र सरकार, ओमान सरकार की जितनी भी हिस्सेदारी थी, उसे बीपीसीएल ने भुगतान करने के बाद रिफाइनरी को पूर्ण रुप से टेकओवर कर लिया था। फिलहाल रिफायनरी द्वारा बीना डिस्पेच टर्मीनल, बीना कोटा और बीना पनकी लाइन का संचालन किया जा रहा है।

11 साल पहले बीना में प्रारंभ हुई थी भारत ओमान रिफाइनरी
उल्लेखनीय है कि 90 के दशक में तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा बीना में भारत ओमान रिफायनरी की स्थापना का निर्णय लिया गया था। हालांकि बीना रिफायनरी में पेट्रो कैमिकल्स का कार्य 11 वर्ष पूर्व 2011 में विधिवत रूप से शुरू हो पाया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 6 मिलियन टन प्रतिवर्ष की क्षमता वाली रिफायनरी का उद्घाटन किया था। वर्तमान में रिफायनरी की क्षमता 7.8 मेट्रिक टन प्रतिवर्ष की है। जिसमें अब तक करीब 14 हजार करोड़ का निवेश किया जा चुका है।












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