Sagar: मृत्‍यु के बाद सीपीआर से लौटी थी मासूम की ज‍िंदगी, एक साल में आंखों की ज्‍योत‍ि‍ भी आ जाएगी

सागर, 3 अगस्‍त। पैर की हड्डी के ऑपरेशन के दौरान आंखों की रोशनी गंवाने वाली 7 वर्षीय मासूम र‍िया के ल‍िए उम्‍मीद की क‍िरण जागी है। वह अगले छह महीने से एक साल के भीतर ब‍िलकुल ठीक हो जाएगी। एनेस्‍थीस‍िया के कॉम्‍प्‍ल‍िकेशन का यह दुर्लभ मामला है। कई हजारों, लाखों में एकाध केस इस तरह होता है, ज‍िसमें मरीज का शरीर न‍िश्‍चेतना की दवा के बाद इस तरह र‍िएक्‍ट करता है। बीएमसी के डॉक्‍टर इस मामले में इंग्‍लैंड तक के डॉक्‍टरों से परामर्श कर बच्‍ची का इलाज कर रहे हैं।

र‍िया लोधी

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में एनेस्‍थीस‍िया व‍िभाग के एचओडी डॉ. सर्वेश जैन र‍िया लोधी की आंखों की रोशनी के मामले में हर संभव प्रयास में जुटे हैं। बीएमसी में इस तरह का पहला मामला सामने आया है जब स्‍वाइनल एनेस्‍थीस‍िया देने के बाद शरीर ने इस तरह र‍िएक्‍ट क‍िया हो। हालांकि मेड‍िकल सांइस में इस तरह के केस हुए हैं, लेकिन काफी रेयर रहे हैं। डॉ. सर्वेश जैन बताते हैं कि उनके साथी डॉक्‍टर आशीष पाण्‍डेय इंग्‍लैंड में हैं, जो एनेस्‍थीस‍िया व‍िशेषज्ञ हैं। वहां पर इस तरह के केस पर र‍िसर्च भी हुई हैं। र‍िया लोधी के मामले में उन्‍होंने डॉ. आशीष पाण्‍डेय को जानकारी देकर परामर्श क‍िया व इलाज को लेकर चर्चा की है। उन्‍होंने जो लाइन ऑफ ट्रीटमेंट बताया है, उसको भी फॉलो क‍िया जाएगा।

र‍िया लोधी

छह महीने से एक साल में आंखे सामान्‍य हो जाएंगी
बीएमसी में एनेस्‍थीस‍िया व‍िभागाध्‍यक्ष डॉ. सर्वेश जैन बताते हैं कि एक्‍सपर्ट ओप‍िन‍ियन में यह सामने आया है कि बच्‍ची र‍िया की आंखों की रोशनी वापस लौट आएगी। बीते 12 द‍िन में ही इसके सकारात्‍मक संकेत म‍िले हैं। लगभग छह महीने से लेकर एक साल के अंदर उसकी आंखों की रोशनी पूरी तरह वापस म‍िल जाएगी। डॉ. जैन के अनुसार यह व‍िशेष केस है। न‍िश्‍चेतना की दवा रोज दर्जनों मरीजों को दी जाती है, लेक‍िन बच्‍ची के शरीर ने अलग तरह से र‍िएक्‍ट क‍िया था।

दो म‍िनट के ल‍िए मृत्‍यु हो गई थी, सीपीआर से वापस आई जान
बीएमसी डीन डॉ. आरएस वर्मा के अनुसार हमारे यहां इस तरह का यह पहला केस हुआ है। ऑपरेशन के दौरान एनेस्‍थीस‍िया से बच्‍ची के शरीर में कॉम्‍प्‍ल‍िकेशन हुए और हार्ट ने काम करना बंद कर द‍िया था। उसकी हॉर्ट बीट, पल्‍स सब बंद हो गया था। हमारे डॉक्‍टरों ने तत्‍काल उसे सीपीआर देकर जान बचाई और दोबारा हृदयगत‍ि को चालू क‍िया है। डॉक्‍टरों को दोष नहीं द‍िया जाना चाह‍िए, उनकी ही मेहनत और तत्‍परता से बच्‍ची की ज‍िंदगी वापस म‍िली है। आंखों की रोशनी धीरे-धीरे वापस आ जाएगी।

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