Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Damoh: बुंदेलखंड में श्री ‘राजाराम सरकार’ का अनूठा मंदिर, नवरात्र में नौ स्वरूप बदलते हैं

मध्य प्रदेश के दमोह में भगवान श्रीराम का एक मंदिर ऐसा भी हैं, जहां उन्हें ओरछा की तरह राजा राम के रूप में पूजा जाता है, लेकिन संभवतः यह देश का इकलौता मंदिर हैं जहां नवरात्र में भगवान नौ अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन देते है

Damoh:भगवान राम हैं यहां राजा, नवरात्र में नौ रूप बदलते हैं

दमोह में टाॅकीज तिराहा पर स्थित मराठाकालीन श्रीराम मंदिर समूचे बुन्देलखंड में इकलौता राम दरबार है जो चैत्र नवरात्र पर नौ दिन विविध स्वरूप में परिवर्तित होता है। दरअसल मराठा शासक अपना राजा भगवान श्रीराम को मानकर शासन चलाते रहे हैं। दमोह में भी मराठा शासनकाल में यह परंपरा शुरू हुई ,जो आज भी चली आ रही है। महाराष्ट्रीयन समाज द्वारा इस परंपरा का आज भी निर्वहन किया जा रहा है।
Damoh:भगवान राम हैं यहां राजा, नवरात्र में नौ रूप बदलते हैं

टाॅकीज तिराहा पर स्थित श्रीराम मंदिर की स्थापना की कहानी बड़ी दिलचस्प है। बता दें दीवान चांदोलकर की दीवानी दमोह जिले में थी। बांदकपुर में घोड़े की टाप से जागेश्वरनाथ धाम स्वयं प्रकट हुए थे। दीवान ने दमोह में टाॅकीज तिराहा पर मंदिर का निर्माण कराया और यहां जागेश्वरनाथ की प्रतिमा लाकर स्थापित कराने का विचार किया। बांदकपुर में जागेश्वरनाथ की प्रतिमा निकलवाने खुदाई कराई तो छोर नहीं मिला। एक दिन स्वप्न में भोलेनाथ ने कहा कि मैं जहां पर हूं वहीं रहूंगा। मुझे उठाने के प्रयास न करो। इसके बाद बांदकपुर में ही भोलेनाथ का मंदिर बनवाया गया। जागेश्वरनाथ के लिए बने दमोह स्थित मंदिर में फिर भगवान श्रीराम दरबार स्थापित कराया गया। वर्तमान में सोनवलकर परिवार इस मंदिर की व्यवस्थाएं देख रहा है। जो पुराने धार्मिक रीति रिवाज का आज भी निर्वहन करता आ रहा है। इस समाज की एक खास बात यह है कि मंदिर के कामकाज और श्रंगार को लेकर युवा पीढ़ी व बच्चे ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं। जिससे यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी आज भी चली आ रही है।

Damoh:भगवान राम हैं यहां राजा, नवरात्र में नौ रूप बदलते हैं

इन रूपों में बदल जाता है रामदरबार
चैत्र नवरात्र की परमा व दोज को भगवान राम दरबार को राजा के दरबार के रूप में सजाया जाता है। तीज को राम.लक्ष्मण घोड़े पर सवार हो जाते हैं। चतुर्थी को को राम-लक्ष्मण, जानकी हाथी पर सवार हो निकलते हैं। पंचमी को राम दरबार भोलेनाथ के कैलाश पर्वत के रूप में परिवर्तित हो जाता है। छटवें दिन शेषनाग की झांकी में राम दरबार समाहित हो जाता है। सप्तमी को कृष्ण दरबार में परिवर्तित हो जाता है। अष्टमी को मां दुर्गा दरवार के रूप में पूरा रामदरवार परिवर्तित कर दिया जाता है।

Recommended Video

    दमोह: पेड़ से प्रकट हुई थी माता बल खंडन.. धाम की महिमा अपरंपार

    रामनवमीं पर पालना में झूलते हैं भगवान
    नवमीं की दोपहर 12 बजे भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप की झांकी सजाई जाती है। मंदिर परिसर में पालना लगाया जाता है। भगवान के बाल्य स्वरूप के दर्शन करने और पालना झुलाने हजारों भक्तों की कतारें लग जाती हैं। इस तरह की परंपराओं के साथ बुन्देलखंड का इकलौता मंदिर हैं, जहां के राजाराम आज भी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण कर रहे हैं।

    More From
    Prev
    Next
    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+