राजपूत छात्रावास लाठीचार्ज: ASP सहित 5 अधिकारियों पर गिरी गाज, जानिए CM मोहन यादव के एक्शन के पीछे का पूरा सच

Rajput hostel lathicharge: मध्य प्रदेश के हरदा जिले में 13 जुलाई 2025 को करणी सेना के विरोध प्रदर्शन के दौरान राजपूत छात्रावास में पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज की घटना ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने त्वरित कार्रवाई की और हरदा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP), अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM), और अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (SDOP) को तत्काल प्रभाव से जिले से हटा दिया।

साथ ही, कोतवाली थाना प्रभारी और ट्रैफिक थाना प्रभारी को नर्मदापुरम आईजी कार्यालय में अटैच कर दिया गया। यह कार्रवाई छात्रावास में अनुचित बल प्रयोग और स्थिति को संवेदनशील ढंग से न संभालने की लापरवाही के कारण की गई है। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।

Rajput hostel lathicharge case in Harda CM Mohan Yadav takes action against ASP

मामला क्या है?

हरदा में 11-12 जुलाई 2025 को एक धोखाधड़ी का मामला सामने आया था, जिसमें करणी सेना के जिला अध्यक्ष आशीष सिंह राजपूत ने मोगली थाने में 18 लाख रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज की थी। इस मामले में आरोपियों मोहित वर्मा, विकास लोधी, और उमेश तपानिया के खिलाफ थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक 604/2024 दर्ज किया गया। 12 जुलाई को पुलिस ने मुख्य आरोपी मोहित वर्मा को गिरफ्तार किया और उसे कोर्ट में पेश करने के लिए ले जा रही थी। इसी दौरान, करणी सेना के जिला अध्यक्ष सुनील सिंह राजपूत और उनके 20-25 समर्थकों ने कोर्ट परिसर में प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने मोहित वर्मा के साथ अभद्रता की और उसे अपने हवाले करने की मांग की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया।

13 जुलाई को स्थिति और बिगड़ गई, जब करणी सेना ने खंडवा बायपास पर चक्काजाम कर दिया। पुलिस ने प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पहले वाटर कैनन और फिर आंसू गैस का इस्तेमाल किया। जब प्रदर्शनकारी नहीं माने, तो पुलिस ने लाठीचार्ज का सहारा लिया। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने राजपूत छात्रावास में घुसकर वहां मौजूद छात्रों और अन्य लोगों पर लाठीचार्ज किया, जिससे कई लोग घायल हुए। आरोप है कि पुलिस ने बिना उचित कारण छात्रावास में प्रवेश किया और बच्चों व महिलाओं पर भी लाठियां बरसाईं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद प्रदेशभर में आक्रोश फैल गया।

सीएम मोहन यादव का सख्त एक्शन

इस घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने तुरंत संज्ञान लिया और जिला प्रशासन से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी। 27 जुलाई 2025 को सीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्वीट कर जानकारी दी कि जांच के बाद कार्रवाई की गई है। उन्होंने लिखा, "हरदा जिले में 13 जुलाई को राजपूत छात्रावास में घटित प्रकरण की जांच के उपरांत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसडीएम, एवं एसडीओपी को तत्काल प्रभाव से हरदा जिले से हटाया गया है। थाना प्रभारी, कोतवाली, एवं थाना प्रभारी (ट्रैफिक) को नर्मदापुरम आईजी कार्यालय में अटैच किया गया है। समाज के छात्रावास में अनुचित बल प्रयोग एवं स्थिति को संवेदनशील रूप से निराकरण करने में की गई लापरवाही को लेकर यह एक्शन लिया गया है।"

हटाए गए अधिकारियों में शामिल हैं:

  • अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP): आरडी प्रजापति
  • अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM): अर्चना शर्मा
  • अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (SDOP): अर्चना शर्मा (दोनों पदों पर एक ही अधिकारी तैनात थीं)
  • थाना प्रभारी, कोतवाली: प्रहलाद सिंह मस्कले
  • थाना प्रभारी, ट्रैफिक: संदीप सुनेर

इन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हरदा से हटाकर अन्य स्थानों पर स्थानांतरित या अटैच किया गया है। सूत्रों के अनुसार, हरदा के पुलिस अधीक्षक (SP) अभिनव चौकसे पर भी कार्रवाई की संभावना थी, लेकिन अभी तक उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

क्यों हुआ लाठीचार्ज? पुलिस का पक्ष

पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने कोर्ट परिसर में अभद्रता और शासकीय कार्य में बाधा डाली थी। 13 जुलाई को खंडवा बायपास पर चक्काजाम के कारण आमजन को परेशानी हो रही थी। पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। जब स्थिति नियंत्रण में नहीं आई, तो आंसू गैस और हल्का लाठीचार्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारी राजपूत छात्रावास में एकत्र होकर पुनः अशांति फैला रहे थे, जिसके बाद पुलिस को वहां कार्रवाई करनी पड़ी। हालांकि, पुलिस यह स्पष्ट नहीं कर पाई कि छात्रावास में प्रवेश और वहां लाठीचार्ज क्यों जरूरी था।

विपक्ष का हमला और सामाजिक आक्रोश

इस घटना ने राजपूत समाज और करणी सेना में जबरदस्त गुस्सा पैदा किया। करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीवन सिंह शेरपुर सहित 60 से अधिक कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। पूरे मध्य प्रदेश में भोपाल, रतलाम, और अन्य शहरों में करणी सेना ने चक्काजाम और प्रदर्शन किए।

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इस मामले में न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने हरदा पहुंचकर पीड़ित छात्रों और स्थानीय लोगों से मुलाकात की और वीडियो शेयर कर पुलिस की कार्रवाई को गलत ठहराया। दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर कहा, "हरदा में पुलिस ने राजपूत छात्रावास में घुसकर बर्बर लाठीचार्ज किया। यह पूछकर लाठियां बरसाईं कि 'क्या तुम राजपूत हो?' यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। SP, कलेक्टर, और अन्य अधिकारियों को हटाकर रिटायर्ड जज से जांच कराई जाए।"

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा और इसे कानून-व्यवस्था की विफलता का सबूत बताया। कांग्रेस ने इस घटना को बीजेपी सरकार की नाकामी और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाला बताया।

राजपूत समाज और करणी सेना का गुस्सा

राजपूत समाज और करणी सेना ने इस लाठीचार्ज को अपने समुदाय के खिलाफ लक्षित कार्रवाई बताया है। संगठन ने मांग की कि हरदा के कलेक्टर और SP को तत्काल हटाया जाए और इस मामले की न्यायिक जांच हो। करणी सेना के जिला अध्यक्ष सुनील सिंह राजपूत ने कहा, "पुलिस ने बिना कारण छात्रावास में घुसकर निर्दोष छात्रों और महिलाओं पर लाठियां बरसाईं। यह राजपूत समाज का अपमान है।" संगठन ने पूरे प्रदेश में प्रदर्शन तेज करने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद सरकार ने त्वरित कार्रवाई की।

कानून-व्यवस्था पर सवाल

यह घटना मध्य प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाती है। हाल के महीनों में, प्रदेश में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद हुआ है। उदाहरण के लिए:

सागर (अगस्त 2024): दीवार गिरने से नौ बच्चों की मौत के बाद सागर के कलेक्टर, SP, और SDM को हटाया गया था।

शिवपुरी-बैराड़ (जुलाई 2025): एक युवक को सिर पर जूता रखकर माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया, जिसके बाद पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि पुलिस और प्रशासन को संवेदनशील मामलों में अधिक सावधानी और पारदर्शिता बरतने की जरूरत है। हरदा की इस घटना ने खासकर राजपूत समाज में गहरी नाराजगी पैदा की है, और सरकार पर सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का दबाव बढ़ गया है।

भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता और वकील अनिल शर्मा ने कहा, "हरदा में पुलिस की कार्रवाई न केवल अनुचित थी, बल्कि यह सामाजिक तनाव को बढ़ाने वाली थी। सरकार को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त नीतियां बनानी होंगी।"

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