एमपी में राहुल गांधी ने आदिवासी महिलाओं से लेकर चखे महुआ के फूल, जानें ठर्रा शराब के अलावा क्या बनता है इनसे
Rahul Gandhi News:एमपी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की यात्रा का एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। वीडियो 09 अप्रैल 2024 मंगलवार का है, इस वीडियो में राहुल गांधी स्थानीय आदिवासी महिलाओं के साथ एक खास तरह का फूल चुनते नजर आ रहे हैं। वह महिलाओं से इस फूल के बारे में जानकारी लेते हैं कि ये महिलाये इस खास फूल को क्यों बीन रही हैं व वे इसका क्या करेंगी।
दरअसल राहुल गांधी चुनाव प्रचार के चलते मध्य प्रदेश के जिले शहडोल से उमरिया जा रहे थे, तभी जंगल के रास्ते से गुजरते हुए उनकी नजर कुछ महिलाओं पर पड़ी। ये महिलाएं जंगल में जमीन से कुछ बीन रहीं थीं। राहुल गांधी ने अपना काफिला रुकवाया और महिलाओं के पास जाकर बातचीत करते हुए फूल बीनने लगे।
महिलाओं ने बताया कि यह फूल महुआ के हैं, राहुल इसे चखकर भी देखते हैं और कहते हैं 'नॉट बैड'. राहुल महिलाओं से पूछते हैं कि वे इसका क्या करती हैं तो महिलाएं बताती हैं कि वे इसे बेचकर लगभग 200 से 300 रूपये के आसपास आमदनी कर लेती हैं।

लेकिन इन महुआ फूलों, फल, पत्ते और तने का इस्तेमाल क्या होता है ? हमने जब यह जानकरी जुटाई तो सामने आया कि महुआ के फूलों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल देसी शराब बनाने में किया जाता है जिसे इस इलाके में ठर्रा भी कहा जाता है।
कैसे बनती है महुआ के फूलों से शराब
महुआ के फूलों से शराब कैसे बनती है,इसके लिए हमने जब खोज की तो कई आदिवासी यूट्यूबर युवाओं के वीडियो सामने आये। इनमें बाकायदा महुआ के फूलों से शराब बनाने की पूरी विधि समझाई गई है। इन वीडियो में कुछ आदिवासी लोगों को महुआ के फूलों से शराब बनाते हुए दिखाया गया है।
बताया गया है कि महुआ के फूलों को बीनने समय चैत्र के महीने यानि अंग्रेजी महीने की बात करें तो मार्च अंतिम या अप्रैल प्रथम सप्ताह से प्रारम्भ हो जाता है। जो लोग भी महुआ से शराब बनाते हैं वे सुबह महुआ के फल और फूल बीनते हैं, दरअसल रातभर में काफी मात्रा में पके हुए फल और फूल जमीन पर गिर जाते हैं। इन फल और फूलों को 6 से 7 दिन धुप में सुखाया जाता है। जब यह अच्छे से सूख जाते हैं तो उन्हें एक मटके में रखकर पानी से भर दिया जाता है। इसे 3 से 4 दिन तक ऐसे ही छोड़ दिया जाता है जिससे यह सड़ना यानि इनमें फर्मेंटिंग प्रोसेस शुरू हो जाता है। इसके बाद खास प्रकार के बर्तन में वाष्पीकृत करके शराब एकत्रित कर ली जाती है।
कई अच्छे उपयोग में भी आता है महुआ
महुआ के फूल के बाद बात करते हैं इसके फल की, जिसको सब्जी रूप में प्रयोग किया जाता है जो काफी स्वादिष्ट होती है। महुआ के फल से तेल भी निकाला जाता है। महुआ फल का जो छिलका होता उसकी सब्जी बनती है और अंदर जो निकलता है उससे तेल निकला जाता है। इस तेल को आदिवासी लोग टेरा तेल कहते हैं। इस तेल का इस्तेमाल खाना बनाने, बालों और त्वचा पर लगाने में भी किया जाता है। स्थानीय लोगों की मान्यता है किइस तेल के प्रयोग करने से ही कई उम्रदराज आदिवासी लोगों के बाल काफी हद तक काले रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस तेल का उपयोग डिटर्जेंट व साबुन बनाने में भी किया जाता है।
बताते हैं कि एक महुआ के पेड़ से एक सीजन में 20 केजी से लेकर 200 केजी तक फल और फूल निकलता है। यह आदिवासी लोगों खाकर महिलाओं को कई तरह से आमदनी का साधन बना हुआ है।












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