MP News: 5 लाख पेंशनरों को नहीं मिली 8 महीने की महंगाई राहत राशि, छत्तीसगढ़ से सहमति का बनाया गया बहाना
MP News: मध्य प्रदेश में लगभग 5 लाख पेंशनर 8 महीने की महंगाई राहत राशि पाने से रह गए। ऐसा इसलिए कि वित्त विभाग के अफसर ने मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम-2000 की धारा 49 की त्रुटि पूर्ण व्याख्या कर दी।
इसलिए प्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ की सहमति का बहाना बनाकर पहले तो पेंशनरों को समय पर महंगाई राहत नहीं दी, जब दी भी तो 8 महीने की राशि काट कर दी।

हाल ही में पेंशनर संगठन ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को चिट्ठी लिखी है कि अधिनियम में यह प्रावधान ही नहीं है कि पेंशनरों की डीआर राशि बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ से सहमति ली जाए। इसलिए इस पर स्थिति स्पष्ट की जाए।
प्रदेश के कर्मचारियों को 1 जुलाई 2023 से 46 फीसदी महंगाई भत्ता यानी डीए मिल रहा है जबकि पेंशनरों को डीआर राशि का लाभ 1 मार्च 2024 से दिया जा रहा है। इससे उन्हें 8 महीने का नुकसान हो गया। वहीं केंद्र सरकार के पेंशनर्स की बात करें तो उन्हें 50 विधि राशि मिल रही है यानी इस हिसाब से प्रदेश के पेंशनर्स चार फीसदी नुकसान में है।
चार प्रतिशत डीआर बढ़ाने का लिया था फैसला
केंद्र सरकार का कहना है की पेंशन संबंधित मामलों में राज्यों के बीच सहमति की आवश्यकता नहीं है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश सरकार छत्तीसगढ़ की सहमति मिलने के इंतजार में पेंशनरों को समय पर राशि का भुगतान नहीं करती है। प्रदेश सरकार ने 1 जुलाई 2023 से कर्मचारियों का द और पेंशनर्स की 4% डीआर राशि बढ़ाने का फैसला लिया था सरकार ने इस तारीख से कर्मचारियों को तो दिए दे दिया लेकिन पेंशनर्स की डीआर राशि के लिए छत्तीसगढ़ सरकार से सहमति मांगी।
छत्तीसगढ़ ने डीआर राशि 1 जुलाई 2023 के बजाय 1 मार्च 2024 से देने पर सहमति दी। इसे मध्य प्रदेश में लागू भी कर दिया गया। इस तरह पेंशनर्स को 8 महीने का डीआर नहीं मिला।
पिछले साल 4 फरवरी बड़ा 38 से बढ़कर हुआ 42
पेंशनर्स की डॉ ऋषि 6 महीने में बढ़ाना चाहिए। यानी जनवरी और जुलाई में बढ़ाना चाहिए। 2 साल में कई बार बड़ी पिछले साल जनवरी 2023 में 4 फरवरी बढ़कर 38 से 42 हो गई थी। इसके बाद इस साल मार्च 2024 में बढ़ाई। राज्य सरकार 18 साल से यही बताती आ रही है कि पेंशनर्स को डी आर राशि देने के लिए मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सरकारों के बीच सहमति जरूरी है इसके पीछे प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49 का हवाला दिया जाता रहा है। हालांकि धारा में पेंशनर्स देनदारी के लिए दोनों राज्यों के बीच सहमति का स्पष्ट प्रावधान नहीं है।












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