Opinion: 'आवाम के हिफाजतदारों की जिंदगी भी न रहे उदास', अब नसीब में वीक ऑफ, सीएम शिवराज बने मसीहा

Opinion: मध्य प्रदेश के चुनावी साल में सीएम शिवराज सिंह चौहान पुलिस विभाग पर भी मेहरबान नजर आई। वर्षों पुरानी छुट्टी की उस मांग को न सिर्फ तरजीह दी गई, बल्कि उस पर अमल भी शुरू हो गया। जनता के इन रखवाले पुलिस महकमे के कर्मचारी भी अब सीएम के मुरीद हो चले हैं।

हो भी क्यों ना। बीते करीब दो दशक से सिर्फ मंच के भाषणों में ही सिर्फ छुट्टियां जो मिल रही हैं। यानि घोषणाएं हो रही थी। लेकिन वैधानिक तौर पर उस अमल शिवराज के राज में ही शुरू हो पाया। जिस विभाग के जिम्मे पूरे प्रदेश की आवाम की हिफाजत का जिम्मा हैं। वह खुद को उपेक्षित महसूस करता था।

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने खुद इन पुलिसकर्मियों का दर्द जाना। बिना संकोच के वह सीएम हाउस में आयोजित पुलिस संवाद कार्यक्रम में यह बोलने के लिए मजबूर हुए कि एमपी की पुलिस कई तनाव से घिरी हैं। ड्यूटी के दौरान न दिन को चैन हैं और न ही रात को। उनकी ही बदौलत हम हर तीज-त्यौहार हो या फिर कोई बड़ा आयोजन बिना किसी विघ्न के मना पाते हैं। इसलिए लगभग 50 हजार मैदानी बल की सुध लेने की जिम्मेदारी भी सरकार की ही हैं।

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ऐसा नहीं कि कि ये मांग हाल ही में हुई और उसे मान लिया हो। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह चौहान फिर बाबू लाल गौर के वक्त भी जब-तब मर्यादाओं में रहते यह मांग की जाती रही। 2016 में पूर्व गृह मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने साप्ताहिक अवकाश देने की घोषणा के साथ पुलिस एक्ट में संसोधन करने भी कहा था। करीब साल भर बाद रोस्टर बनाकर वीक आफ शुरू किया गया, लेकिन बाद में इसे अव्यवहारिक बताते हुए बंद कर दिया गया। फिर 2018 में जब चुनाव का वक्त फिर आया तो वीक ऑफ़ की फिर घोषणा हुई। पांसा पलटा और सरकार कांग्रेस की बन गई। कमलनाथ शपथ लेने के तीसरे दिन ही पुलिस मुख्यालय पहुंचे थे। तब उन्होंने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को अवकाश नियम बनाने के आदेश दिए। कुछ पुलिसवालों को अवकाश मिलना शुरू भी हुआ था, लेकिन योजना समग्र रूप से लागू नहीं हो सकी थी। कुछ वक्ती बाद शिवराज के कन्धों पर फिर दोबारा जब कमान आई तो 27 जनवरी 2023 को छह हजार नवनियुक्त आरक्षकों को नियुक्ति प्रमाण पत्र देते समय मुख्यमंत्री ने पुलिस को अवकाश देने की बात कही थी। जिसके करीब 7 महीने बाद आधिकारिक रूप में आदेश जारी हुआ और अमल में लाया गया।

वीक ऑफ़ आदेश में यह उल्लेख

  • कानून व्यवस्था ड्यूटी में 24 घंटे तैनात रहने वाले मैदानी स्तर पर पदस्थ पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों को सप्ताह में एक दिन का साप्ताहिक अवकाश दिनांक 07.08.2023 से दिया जाएगा।
  • थाने में पदस्थ अधिकारियों/कर्मचारियों को रात्रि ड्यूटी करने पश्चात पूरे 24 घंटे का अवकाश सप्ताह में एक बार देय होगा और साप्ताहिक अवकाश के उपभोग के बाद अगले कार्यदिवस में प्रातः गणना (09.00 बजे) वापस आमद देना होगा।
  • साप्ताहिक अवकाश देने का रोस्टर तैयार कर पालन सुनिश्चित करेंगे। साप्ताहिक अवकाश के दौरान अधिकारी/कर्मचारी को जिले से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी।
  • प्रत्येक थाने में थाना प्रभारी की अनुपस्थिति में उनसे तत्काल बाद वरिष्ठ अधिकारी साप्ताहिक अवकाश के दौरान थाने के इंचार्ज थाना प्रभारी होंगे।
  • यह सुनिश्चित किया जाये कि अनुभाग के अंतर्गत आने वाले थानों में से एक ही थाने के प्रभारी को साप्ताहिक अवकाश दिया जावे सभी को एक साथ नहीं।
  • प्रत्येक अनुभाग में उसके थानों के लिये लिंक ऑफिसर पुलिस अधीक्षक द्वारा बनाये जाए ताकि तात्कालिक आवश्यकता होने पर उपलब्ध हो सकें।
  • थानों में महिला अधिकारी/कर्मचारियों की भी साप्ताहिक अवकाश में उपलब्धता 24 बनी रहे, ताकि महिला आवेदक आदि के आने पर एवं कानून व्यवस्था की स्थिति में कठिनाई न हो।
  • यदि जिले में VIP भ्रमण अथवा अन्य कानून व्यवस्था की स्थिति संभावित हो तो आवश्यकतानुसार साप्ताहिक अवकाश में परिवर्तन किया जा सकेगा।
  • यह भी व्यवस्था रखी जाये कि यदि जिले में अचानक कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित होती है तो साप्ताहिक अवकाश पर जाने वाले अधिकारी/कर्मचारी तत्काल ड्यूटी पर उपस्थित हो सके।

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