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National Law University Delhi: सागर के कानूनविद प्रो. जीएस बाजपेयी NLU के कुलपति बने

सागर के डॉ. हरीसिंह गौर यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री लेने वाले व सागर के मूल निवासी कानूनविद प्रो. जीएस बाजपेयी देश की प्रतिष्ठित ​नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली में कुलपति बने हैं।

प्रो. जीएस बाजपेयी

National Law University (राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय दिल्ली) डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर से कानून की डिग्री लेकर निकले प्रो. जीएस बाजपेयी National Law University Delhi के कुलपति बने हैं। कुलपति के रूप में उन्होंने मंगलवार को पदभार ग्रहण कर लिया। इसके पहले प्रो.बाजपेयी राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ आरजीएनयूएल, पंजाब के कुलपति थे। बता दें कि प्रोफेसर बाजपेयी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय दिल्ली के संस्थापक कुलपति प्रोफेसर रणबीर सिंह और प्रोफेसर डॉ. श्रीकृष्ण देव राव के बाद तीसरे कुलपति बन गए हैं। प्रो बाजपेयी मध्यप्रदेश के सागर के मूल निवासी हैं और डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर में पढ़ाई की। बता दें कि महान विधिवेत्ता डॉ. हरीसिंह गौर दिल्ली यूनिवर्सिटी के संस्थापक कुलपति रहे हैं, उनके बाद सागर से कोई दूसरा व्यक्ति नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली में कुलपति बना है।

प्रो. बाजपेयी देश के अनेक अकादमिक संस्थानों से जुड़े रहे है। प्रोफेसर बाजपेयी ने पहले एनएलयू दिल्ली में रजिस्ट्रार के रूप में कार्य किया है। उन्होंने अपराध विज्ञान और आपराधिक न्याय (कानून) के प्रोफेसर के रूप में भी काम किया है। केएल में चेयर प्रोफेसर आपराधिक कानून में अरोड़ा चेयर, साथ ही एनएलयू दिल्ली में सेंटर फॉर क्रिमिनोलॉजी एंड विक्टिमोलॉजी के अध्यक्ष हैं। प्रोफेसर बाजपेयी के पास एक शोधकर्ता और प्रशासक के रूप में तीस से अधिक वर्षों का अनुभव है। वह एक विपुल लेखक हैं और हाल ही में प्रकाशित हैंडबुक ऑफ़ लॉज़ एंड केस लॉज़ फ़ॉर विक्टिम्स ऑफ़ क्राइम (थॉमसन रॉयटर्स, 2022) और फास्ट ट्रैक कोर्ट्स इन इंडिया प्रॉमिस एंड परफॉर्मेंस (सत्यम लॉ इंटरनेशनल 2022) सहित बीस से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। उनके पास शोध कार्य का एक व्यापक अनुभव है। वे नियमित रूप से द इंडियन एक्सप्रेस, द हिंदू एंड द ट्रिब्यून जैसे प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में राय प्रकाशित करते रहे हैं। वह दो प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं के संपादक हैं।

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    प्रो. बाजपेयी ने कई सरकारी परियोजनाओं पर काम किया है और विभिन्न केंद्र सरकार और राज्य सरकार के पैनल में सदस्य और संयोजक के रूप में काम किया है। उन्होंने नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी, भोपाल, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट, पंजाब पुलिस एकेडमी, पंजाब और क्रिमिनोलॉजी एंड फॉरेंसिक साइंस विभाग में विभिन्न पदों पर भी काम किया है।उन्होंने गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नियुक्त आपराधिक कानूनों में सुधार के लिए समिति में सदस्य सचिव के रूप में भी कार्य किया है।

    ब्रिटेन से आपराधिक न्याय में पोस्ट डॉक्टरेट की उपाधि ली है
    भारत की कानूनी शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में 700 से अधिक ई-टेक्स्ट और वीडियो बनाने में प्रधान अन्वेषक के रूप में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। प्रोफेसर बाजपेयी ने विक्टिमोलॉजी में डॉक्टरेट और लीसेस्टर विश्वविद्यालय, ब्रिटेन से आपराधिक न्याय में पोस्ट-डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है, जहां वे अपराध विज्ञान विभाग, लीसेस्टर विश्वविद्यालय, यूके में कॉमनवेल्थ फेलो थे। उनकी एलएलएम विशेषज्ञता अपराध विज्ञान और आपराधिक न्याय में थी।

    'सागर रत्न अवार्ड' नवाजा गया था
    आज पदभार ग्रहण के अवसर पर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली के फैकल्टी, छात्रों और कर्मचारियों ने प्रोफेसर बाजपेयी का स्वागत किया। आशा जताई कि विश्वविद्यालय निश्चित रूप से उनके नेतृत्व में नई शैक्षणिक ऊंचाइयों तक पहुंचेगा और उत्कृष्टता हासिल करेगा। 26 नवनम्बर गौर जयंती पर हुए सागर दिवस पर उन्हें 'सागर रत्न अवार्ड' से नवाजा गया था ।

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