Narmada Parikrma को मिलेगी वैश्विक पहचान, Unesco लिस्ट में शामिल करने एमपी से 5 प्रस्ताव
केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय से यदि मुहर लगी तो मध्य प्रदेश की लाइफ लाइन ‘नर्मदा नदी की परिक्रमा’ यूनेस्को इंटेंजिबल हेरिटेज लिस्ट शामिल हो जाएगी। इंदौर का ‘गेर ‘ समेत 5 प्रस्ताव मंत्रालय को भेजे गए हैं।

Narmada Parikrma: पवित्र नर्मदा नदी मध्य प्रदेश की जीवन रेखा मानी जाती हैं। कल-कल छल-छल बहती पुण्य सलिला नर्मदा कई आध्यात्मिक महत्वों को समेटे हुए हैं। सांस्कृतिक विरासतों में शामिल करने की तरफ अब कदम बढ़ रहे हैं। इसके साथ एमपी के 5 अन्य प्रस्ताव केन्द्रीय संस्कृति विभाग को भेजे गए हैं।

करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी नर्मदा परिक्रमा के अलावा, इंदौर में रंग पंचमी का 'गेर' उत्सव, आदिवासी गीत, गोंड पेंटिंग और मैहर का 106 साल पुराना बैंड भी प्रस्तावों में शामिल हैं। मंत्रालय से यदि मुहर लगी तो ये सभी यूनेस्कों की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे।

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन यानि यूनेस्को संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है। जिसका विश्व धरोहर स्थलों के रूप में प्राकृतिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण को बढ़ावा देने का उद्देश्य हैं। भारत के 40 विरासत धरोहर स्थल यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त है और उसकी लिस्ट में शामिल हैं।

'नर्मदा परिक्रमा' भी यदि इस सूची में शामिल हुई, तो इसे वैश्विक पहचान मिलेगी। एमपी में नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक से गुजरात के भरूच फिर वापस अमरकंटक तक लगभग 26 सौ किमी की यात्रा होती हैं। पैदल परिक्रमा करने में लगभग 3 से 4 माह लगते है।

इसी तरह मध्य प्रदेश के इंदौर का 'गेर' उत्सव भी यूनेस्को की लिस्ट में शामिल करने की कवायद की जा रही हैं। होली के रंगपंचमी के मौके पर यहां के राजवाड़ा का आयोजन अनुपम छटा बिखेरता है। कई सालों से संस्कृति-पर्यटन विभाग इस प्रस्ताव को भेजता आ रहा है।


इन दो बड़े प्रस्तावों के अलावा मैहर का 106 साल पुराना बैंड भी कतार में है। बताया जाता है कि राजा ब्रजनाथ सिंह ने इस बैंड की नींव रखी थी। 1955 में संगीत महाविद्यालय में इस बैंड को शामिल किया गया। इसी तरह गोंड पेंटिंग और आदिवासी गीतों का प्रस्ताव भी भेजा गया हैं।













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