MP News: महिलाओं और अतिथि विद्वानों के लिए बड़ी खुशखबरी, MPPSC ने 166 पदों पर भर्ती के लिए दिया आरक्षण
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने प्रदेश के कॉलेजों में रसायन शास्त्र के लिए 199 असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती की घोषणा की है। इस भर्ती प्रक्रिया के दौरान, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अतिथि विद्वानों को आरक्षण देने का वादा पूरा किया गया है।
इसके तहत, 50 पद अतिथि विद्वानों के लिए आरक्षित किए गए हैं, और महिलाओं को भी 35 सीटों पर आरक्षण दिया गया है।

मुख्यमंत्री की घोषणा का असर
सीएम डॉ. मोहन यादव ने कुछ समय पहले एक महापंचायत में यह घोषणा की थी कि अतिथि विद्वानों को स्थाई नियुक्तियां दी जाएंगी। इस घोषणा को अमल में लाने के लिए एमपीपीएससी ने केमिस्ट्री विभाग के 199 पदों में से 50 पद अतिथि विद्वानों के लिए आरक्षित कर दिए हैं। इन 50 पदों में से 20 पद अतिथि विद्वानों के लिए और 35 पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं।
हाई कोर्ट में लंबित मामला
हालांकि, ओबीसी आरक्षण के संदर्भ में एक मुद्दा हाई कोर्ट में लंबित है। 13 फीसदी आरक्षण को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है, और इस मामले में 31 पदों को होल्ड कर दिया गया है। यदि कोर्ट का आदेश ओबीसी के 27 फीसदी आरक्षण का पक्ष में आता है, तो ये 31 पद ओबीसी उम्मीदवारों के लिए खोले जाएंगे, अन्यथा इन्हें सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से भरा जाएगा।

भर्ती प्रक्रिया
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने 27 फरवरी 2025 से आवेदन प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया है, और आवेदन की अंतिम तिथि 26 मार्च 2025 रखी गई है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाएंगे, जबकि परीक्षा ऑफलाइन आयोजित की जाएगी। परीक्षा 1 जून 2025 को प्रदेश के 10 जिलों में आयोजित की जाएगी।
अतिथि विद्वान महासंघ की प्रतिक्रिया
अतिथि विद्वान महासंघ के मीडिया प्रभारी डॉ आशीष पांडे ने इस आरक्षण का स्वागत किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि 20 फीसदी सीट आरक्षित होने से अतिथि विद्वानों को उतना लाभ नहीं मिलेगा, जितना उन्हें चाहिए था। उन्होंने मांग की कि महापंचायत में जो घोषणा हुई थी, उसके मुताबिक अतिथि विद्वानों को 65 साल तक काम करने का मौका दिया जाए और उन्हें स्थाई नियुक्ति प्रदान की जाए।
राज्य सरकार से और पहल की उम्मीद
डॉ आशीष पांडे ने यह भी कहा कि अतिथि विद्वानों को यदि उनके वर्तमान पदों में समायोजित कर लिया जाए, तो इससे समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। अतिथि विद्वान महासंघ इस मुद्दे पर राज्य सरकार से पहल करने की उम्मीद करता है।
यह भर्ती प्रक्रिया महिलाओं और अतिथि विद्वानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे उन्हें समान अवसर मिलने की संभावना है। हालांकि, ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहे हाई कोर्ट के मामलों का फैसला आने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। इस पूरी प्रक्रिया से न केवल अतिथि विद्वान और महिला उम्मीदवारों को फायदा होगा, बल्कि प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में योग्य और प्रशिक्षित अध्यापकों की कमी को भी पूरा किया जाएगा।












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