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नवरात्रः पशु-पक्षियों के संरक्षण की थीम पर मां की प्रतिमाएं, सामाजिक संदेश के साथ विराजेंगी

सागर, 22 सितंबर। नवरात्र के लिए जोर-शोर से तैयारियां शुरु हो गई हैं। माता के स्वागत के शहर और दुर्गा पंडालों को भव्य तरीके से सजाया जा रहा है। इधर जगत-जननी की प्रतिमाओं को अंतिम रुप देने में तन्मयता से जुड़े हुए हैं। सबसे खास बात इस बार जो प्रमुख प्रतिमाएं तैयार की गई हैं, उनके लिए पर्यावरण और पशु-पक्षियों के संरक्षण की थीम पर प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। इनमें मातारानी, भगवान भोलेनाथ, उनके साथ गणों के रुप में तैयार प्रतिमाओं को तितली, गौरेया, मोर, तोता, गिरगिट, नंदी सहित अन्य प्राणियों को प्रतिमाओं के साथ तैयार किया गया है।

भोलेनाथ ने गिरगिट को धारण किया, माता ने गौरैया को हाथ पर बैठाया

भोलेनाथ ने गिरगिट को धारण किया, माता ने गौरैया को हाथ पर बैठाया

अंकित विश्वकर्मा व उनके भाई ने माता भवानी के सौम्य पार्वती स्वरुप के साथ भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा तैयार की है। इसमें भोलेनाथ जी ने अपने दाहिने हाथ पर एक बड़ा गिरगिट धारण किया हुआ है। भगवान उसे जगत पिता के रुप में शालीन और सौम्य मुद्रा में धारण किए हैं। वहीं माता रानी उनके बाएं और खड़ी हैं। प्रतिमा को काफी आकर्षक और जीवंत रंगों से भरा गया है। गिरगिट को इस तरह से कलर किया जा रहा है कि वह बिलकुल असली के जैसे नजर आ रहा है। इसी के साथ एक अन्य प्रतिमा पर मातारानी ने अपने दाहिने हाथ पर गौरैया चिढ़िया को बिठाया हुआ है। उसे बैठाने के लिए प्रतिमा की मुद्रा और हाथ के एक्शन को कोहनी की तरफ से ऊपर की तरफ दिखाया गया है।

पंखों वाला गिरगिट और तोता भी शामिल

पंखों वाला गिरगिट और तोता भी शामिल

एक अन्य प्रतिमा में भगवान शंकर के हाथ में रंगीन और कानों के यहां से पंखों की तरह दिखने वाले गिरगिट को हाथ ऊपर करके बैठाया करके दिखाया गया है। वहीं उनके पास में चट्टान पर एक तोता की प्रतिमा को बनाया गया है। मातारानी के साथ कैलाश पर्वत की झांकी के रुप में यह भव्य प्रतिमा तैयार की जा रही है। हालांकि इनमें अभी पूर्ण रुप से रंग भरना बाकी है।

भगवान के गणों को मयूर और गिद्ध के साथ दिखाया गया

भगवान के गणों को मयूर और गिद्ध के साथ दिखाया गया

भगवान भोलेनाथ के गणों की प्रतिमाओं की झांकियों को भी दुर्गा प्रतिमाओं के साथ तैयार किया जा रहा है। इनमें भगवान के गणों उनके पुत्र कार्तिकेय की प्रतिमा भी तैयार हो रही है। इसमें उनके वाहन मयूर को उनके हाथ पर बैठे तैयार किया गया है। करीब 6 फीट की इस प्रतिमा में राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। इसके अलावा एक राक्षस की प्रतिमा खड़े स्वरुप में तैयार हो रही है, जिसके कंधे पर गिद्ध और बाजू में सवारी के रुप में भेड़िया की मूर्ति को बनाया गया है। मातारानी की झांकी के साथ इन प्रतिमाओं को भी संदेश देने के लिए रखा जाएगा।

भगवान कृष्ण के साथ शेरावाली स्वरुप में दिखेंगी राधारानी

भगवान कृष्ण के साथ शेरावाली स्वरुप में दिखेंगी राधारानी

राजीव नगर स्थित बीएस जैन बगीचे में तैयार हो रहीं प्रतिमाओं में एक अद्भुत व अलग तरह की प्रतिमा तैयार हो रही है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण बांसुरी थामे भव्य और आकर्षक मुद्रा में खडे़ हुए हैं, तो राधारानी को जगत-जननी परम शक्ति मां शेरावाली के सौम्य स्वरुप में शेर पर बैठे दिखाया गया है। यह प्रतिमा अपने आप में आकर्षक का केंद्र बन रहीं है। दुर्गा पंडालों में सामान्यतः कृष्ण लीलाओं की झांकी या भगवान कृष्ण को कम ही झाकियों में शामिल किया जाता है।

 दमोह से आए मूर्तिकार, 30 साल से तैयार कर रहे प्रतिमाएं

दमोह से आए मूर्तिकार, 30 साल से तैयार कर रहे प्रतिमाएं

सागर में राजीव नगर वार्ड में विश्वकर्मा आर्ट के मूर्तिकार व उनके परिवार के अन्य सदस्य दुर्गा प्रतिमाओं को तैयार करने में जुटे हुए हैं। मूर्तिकार अंकित विश्वकर्मा, उनके भाई भव्य, आकर्षक और अलग-अलग थीम पर प्रतिमाओं को तैयार कर रहे हैं। प्रतिमाएं लगभग तैयार हो चुकी हैं और इन्हें अतिम रुप दिया जा रहा है। करीब दो दर्जन से अधिक प्रतिमाएं वर्तमान में यहां मौजूद हैं तो करीब आधा दर्जन प्रतिमाएं अन्य शहरों के लिए भेजी गई हैं। यहां 5 फीट से लेकर 25 फीट तक प्रतिमाएं तैयार हो रही हैं।

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