MP News: बड़वानी के लिंबई गांव में अज्ञात जानवर का आतंक, छह मौतों से दहशत, गांव छोड़ रहे लोग
MP News: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के लिंबई गांव में एक अज्ञात जानवर के हमले ने पूरे इलाके को दहशत में डुबो दिया है। 5 मई 2025 को शुरू हुए इस रहस्यमय जानवर के हमलों ने 11 दिनों में छह लोगों और चार पशुओं की जान ले ली। 3500 की आबादी वाला यह गांव अब सन्नाटे में डूबा है।
शाम 7 बजे के बाद लोग घरों से निकलना बंद कर चुके हैं, और एक परिवार ने तो डर के मारे गांव ही छोड़ दिया। ड्रोन, ट्रैप कैमरे, और पिंजरे लगाने के बावजूद वन विभाग इस जानवर को पकड़ने में नाकाम रहा है। ग्रामीणों ने अब दवा के साथ दुआ का सहारा लिया है, और गांव में यज्ञ और पूजा-पाठ का दौर चल रहा है। यह घटना न केवल एक रहस्यमय मर्डर मिस्ट्री बन गई है, बल्कि प्रशासन की तैयारियों और ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर रही है।

5 मई की भयावह सुबह: जब जानवर ने मचाया कहर
5 मई 2025 की सुबह 4 से 6 बजे के बीच लिंबई गांव और आसपास के भैरव घाट क्षेत्र में एक अज्ञात जानवर ने 17 लोगों और 5 पशुओं पर हमला किया। लिंबई के सरपंच पति राकेश जमरे के अनुसार, सभी हमले खुले में सो रहे लोगों पर हुए, और जानवर ने मुख्य रूप से चेहरों को निशाना बनाया। हमले इतने तेज और सुनियोजित थे कि लोग संभल भी नहीं पाए। मृतकों में रायली बाई (60), मंशाराम छगन (50), सुरसिंह मलसिंह (50), सड़ी बाई (60), चैनसिंह उमराव (50), और सुनील झेतरिया (40) शामिल हैं।
लिंबई के झेतरिया फलिया के रहने वाले लल्लू अवास्या ने बताया कि उनका बेटा, जो कैटरिंग का काम करता है, 5 मई की रात शादी समारोह से देर रात 2 बजे लौटा था। वह घर के बाहर खाट पर सो गया। सुबह 6 बजे एक अज्ञात जानवर ने उसके मुंह और हाथ पर हमला किया। लल्लू ने कहा, "मेरा बेटा चीखा भी नहीं कि जानवर भाग गया। हम उसे तुरंत अस्पताल ले गए, जहां टांके लगाए गए। अब वह डर के मारे किसी से मिलने से भी कतराता है।"
मृतकों की कहानी, दर्द और झाग का रहस्य
मृतक मंशाराम के बेटे प्रवीण बघेल ने बताया कि उनके पिता भैरव मंदिर के पास झोपड़ी में रहते थे। हमले के दिन पास के एक रिश्तेदार की शादी थी, जिसके चलते कई लोग बाहर सो रहे थे। प्रवीण ने कहा, "पिताजी पर सुबह हमला हुआ। हमने राजपुर में इलाज कराया, लेकिन दर्द कम नहीं हुआ। उनके मुंह से झाग निकलने लगा। 23 मई को बड़वानी ले जाते समय उनकी मौत हो गई।" डर के मारे प्रवीण का परिवार अब गांव छोड़कर ओझर चला गया है और तब तक लौटने को तैयार नहीं, जब तक जानवर का आतंक खत्म न हो।
इसी तरह, मृतक चैनसिंह के बेटे अश्विन निगवाल ने बताया, "पिताजी के दोनों पैर लहूलुहान हो गए थे। हमले के बाद उनका निचला हिस्सा काम करना बंद कर गया। दर्द के साथ मुंह से झाग निकलता था। 1 जून को उनकी मौत हो गई।" रायली बाई के बेटे ने भी बताया कि उनकी मां के मुंह से झाग निकल रहा था, जो रेबीज जैसे लक्षणों की ओर इशारा करता है।
रेबीज का संदेह, लेकिन सवाल बरकरार
बड़वानी के वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) आशीष बंसोड़ ने बताया कि हमले में रेबीज वायरस का संदेह है, क्योंकि जानवर ने तीन घंटे के भीतर 17 लोगों को काटा, जो असामान्य व्यवहार है। उन्होंने कहा, "यह जानवर कुत्ते जैसा दिखता था, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई। हम ड्रोन, ट्रैप कैमरे, और पिंजरे लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला।" लिंबई गांव वन सीमा से 4.5 किलोमीटर दूर है, और हमले खुले में सो रहे लोगों पर हुए।
विकासखंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. देवेंद्र रोमड़े ने बताया कि सभी 17 घायलों को रेबीज रोधी इंजेक्शन दिए गए थे, फिर भी छह लोगों की मौत हो गई। यह सवाल उठा रहा है कि क्या इंजेक्शन समय पर नहीं दिए गए, या उनकी गुणवत्ता में कमी थी। मृतकों के विसरा को दिल्ली की एक प्रयोगशाला में भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट से रेबीज की पुष्टि हो सकती है।
ड्रोन, कैमरे, और पिंजरे नाकाम
प्रशासन ने जानवर को पकड़ने के लिए व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू किया। डीएफओ आशीष बंसोड़ ने बताया कि ड्रोन, ट्रैप कैमरे, और पिंजरे लगाए गए हैं, लेकिन घने जंगल और ऊबड़-खाबड़ इलाके ने तलाश को मुश्किल बना दिया। वन विभाग की 16 टीमें और 200 से अधिक जवान दिन-रात तलाश में जुटे हैं, लेकिन जानवर अब तक पकड़ से बाहर है। बड़वानी की जिलाधिकारी गुंचा सनोबर ने कहा, "हम सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। खंडवा के चिकित्सा विशेषज्ञों ने मौके पर जांच की, और मृतकों का विसरा दिल्ली भेजा गया है।"
दवा के साथ दुआ: यज्ञ और पूजा-पाठ
जब प्रशासन के प्रयास नाकाम रहे, तो ग्रामीणों ने दवा के साथ दुआ का सहारा लिया। लिंबई गांव में हर परिवार से 100-100 रुपये इकट्ठा कर भैरव घाट पर यज्ञ आयोजित किया गया। पंडित हरिओम, कुणाल, महेंद्र, और देवेंद्र ने बताया कि यह यज्ञ विपदा से बचाव और मृतकों की आत्मा की शांति के लिए किया गया। महिलाएं घरों में पूजा-पाठ कर रही हैं, और बच्चे रात में बाहर निकलने से डर रहे हैं।
गांव में दहशत: एक परिवार ने छोड़ा गांव
3500 की आबादी वाले लिंबई गांव में अब दिन में भी सन्नाटा पसरा है। रहवासी सुमेर सिंह ने बताया, "शाम 7 बजे के बाद लोग घरों में दुबक जाते हैं। खेतों में रात 10 से 2 बजे तक सिंचाई की बारी आती है, लेकिन डर के मारे कोई खेतों में नहीं जाता।" मंशाराम का परिवार डर के कारण गांव छोड़कर ओझर चला गया है। प्रवीण बघेल ने कहा, "जब तक जानवर का आतंक खत्म नहीं होता, हम वापस नहीं लौटेंगे।"
प्रशासन की कार्रवाई और मुआवजा
जिलाधिकारी गुंचा सनोबर ने 2 जून को लिंबई गांव का दौरा किया और पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। डीएफओ आशीष बंसोड़ ने बताया कि सभी मृतकों के परिवारों को 8-8 लाख रुपये का मुआवजा स्वीकृत कर बैंक में ट्रांसफर किया गया है।
बड़वानी की सीएमएचओ डॉ सुरेखा जमरे ने बताया कि घायल बलिराम को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर है। बलिराम को पहले इंदौर रेफर किया गया था, लेकिन वह चार अन्य लोगों के साथ इलाज छोड़कर वापस लौट आया था।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना ने स्थानीय समुदाय में आक्रोश पैदा किया है। रघुवंशी समाज और जयस (जय आदिवासी युवा शक्ति) ने प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। जयस के कार्यकर्ता हीरा अलावा ने एक्स पर लिखा, "6 आदिवासियों की मौत हो चुकी है, लेकिन सरकार और सांसदों को खबर पढ़ने का वक्त नहीं मिला। अगर यह शहरी इलाका होता, तो मीडिया और सरकार तुरंत सक्रिय हो जाती।"
बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष ओम सोनी ने जिला प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल और उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला से मुलाकात कर घटना की जानकारी दी। राजपुर विधानसभा के विधायक और कार्यकर्ताओं ने भी पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और शोक व्यक्त किया।
अनसुलझे सवाल और भविष्य
- यह घटना कई सवाल खड़े कर रही है:
- हमला करने वाला जानवर कौन है? क्या यह रेबीज से संक्रमित कुत्ता, सियार, या कुछ और है?
- रेबीज रोधी इंजेक्शन के बावजूद छह लोगों की मौत क्यों हुई?
- क्या प्रशासन की शुरुआती निष्क्रियता ने स्थिति को और बिगाड़ा?
- ग्रामीण इलाकों में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या उपाय किए जाएंगे?
बड़वानी के इस रहस्यमय जानवर ने न केवल लिंबई गांव को दहशत में डुबोया, बल्कि प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों की दुआएं और प्रशासन के प्रयास अब इस बात पर टिके हैं कि यह जानवर जल्द पकड़ा जाए, ताकि गांव में फिर से शांति लौटे। लेकिन जब तक यह रहस्य सुलझ नहीं जाता, लिंबई गांव में डर का साया बना रहेगा।












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