MP News: फर्जी चालान से 49 करोड़ की हेराफेरी, ईडी ने मध्य प्रदेश में शराब माफिया पर कसा शिकंजा
फर्जी चालान से 49 करोड़ की हेराफेरी: ईडी ने मध्यप्रदेश में शराब माफिया पर कसा शिकंजा
MP News: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मध्यप्रदेश में शराब माफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सोमवार को इंदौर, भोपाल और मंदसौर में शराब ठेकेदारों के 13 ठिकानों पर छापेमारी की।
यह सर्चिंग करीब 16 घंटे तक चली और इस दौरान ईडी को 7.44 करोड़ रुपये नकद, 71 लाख रुपये बैंक खातों में जमा और कई बैंक लॉकर मिले जिन्हें फिलहाल फ्रीज कर दिया गया है।

ईडी सूत्रों के अनुसार यह छापेमारी फर्जी चालान और एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) घोटाले को लेकर की गई, जिसमें करोड़ों रुपये की सरकारी राजस्व की हानि हुई है। छानबीन में अब तक कई आपत्तिजनक दस्तावेज और अचल संपत्तियों के रिकॉर्ड भी ईडी के हाथ लगे हैं। सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकती है।
49 करोड़ से ज्यादा का फर्जीवाड़ा: कैसे होता था खेल?
यह मामला इंदौर के रावजी बाजार थाना में दर्ज एक FIR से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि कुछ शराब ठेकेदारों ने 2015-16 से 2017-18 के बीच लगभग ₹49.42 करोड़ की हेराफेरी की। ये ठेकेदार फर्जी ट्रेजरी चालान के जरिये सरकारी खातों में कम राशि जमा करते थे और चालान की कॉपी में बाद में रकम बढ़ाकर प्रस्तुत करते थे।
MP News: चालान में की जाती थी ये तकनीकी हेराफेरी
- चालान के निर्धारित फॉर्मेट में 'रुपये अंकों में' और 'रुपये शब्दों में' भरना होता है।
- ठेकेदार सिर्फ अंकों में राशि भरते और शब्दों वाली जगह खाली छोड़ देते।
- राशि जमा होने के बाद उसी चालान की खाली जगह में "लाख" या "हजार" जोड़कर उसे बड़ा दिखाते।
- इस फर्जी चालान को देसी या विदेशी मदिरा गोदाम या जिला आबकारी कार्यालय में जमा कर मदिरा आपूर्ति के लिए एनओसी ले लेते।
- इस तरीके से शराब माफिया ने न केवल करोड़ों की बचत की, बल्कि फर्जीवाड़े से सरकार को भी भारी नुकसान पहुंचाया।
जब्त संपत्तियां और दस्तावेज: करोड़ों की संपत्ति की आंशका
ईडी अधिकारियों ने छापेमारी के दौरान कई दस्तावेज और संपत्ति के रजिस्ट्रेशन पेपर भी जब्त किए हैं, जो करोड़ों की अचल संपत्तियों से जुड़े हो सकते हैं। जांच एजेंसी अभी इन दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है और इनके माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग के सुराग भी तलाशे जा रहे हैं।
कौन-कौन हैं निशाने पर?
हालांकि, अभी तक ईडी ने किसी की गिरफ्तारी नहीं की है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि कुछ बड़े शराब कारोबारियों, बिचौलियों और आबकारी विभाग के अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में है। इनके मोबाइल, बैंक खातों और दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
MP News: क्या है आगे की कार्रवाई?
प्रवर्तन निदेशालय ने फिलहाल जब्त कैश, बैंक लॉकर और दस्तावेजों को कब्जे में लेकर मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत केस दर्ज कर लिया है। अगले कुछ दिनों में इन कारोबारियों से और पूछताछ की जाएगी। जिनकी भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, उनके खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी।
शराब माफिया पर शिकंजा या राजनीतिक दबाव?
मध्यप्रदेश में लंबे समय से शराब ठेकों और लाइसेंस के नाम पर भ्रष्टाचार की शिकायतें आती रही हैं। सरकार द्वारा समय-समय पर जांच की घोषणा तो की जाती है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर ज़्यादातर मामले ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। ईडी की ताज़ा कार्रवाई को कुछ लोग "राजनीतिक दबाव" से भी जोड़कर देख रहे हैं, क्योंकि इसमें कई रसूखदार नामों के शामिल होने की आशंका है।












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