MP News: मंडीदीप में गेल प्लांट से कैसे हुई गैस लीक, जानकर चौंक जाएंगे, जयपुर से पहुंची जांच टीम, जानिए मामला
Bhopal News: भोपाल से महज कुछ किलोमीटर दूर स्थित गेल इंडिया लिमिटेड के गैस प्लांट में मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात एक अचानक गैस रिसाव की घटना ने इलाके में हड़कंप मचा दिया।
आधी रात को शुरू हुए इस रिसाव ने न केवल प्लांट के भीतर, बल्कि आसपास के क्षेत्र में भी घबराहट और दहशत का माहौल पैदा कर दिया। हालांकि, प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और फायर सेफ्टी टीम की सूझबूझ से बड़ी दुर्घटना टल गई।

क्या हुआ था उस रात?
रात करीब 12 बजे, गेल प्लांट से अचानक गैस के रिसाव की सूचना मिली। कुछ ही पलों में प्लांट के आसपास तेज गंध फैल गई। सायरन बजने लगे, कर्मचारी मास्क पहनकर बाहर की ओर दौड़ते नजर आए। सूचना मिलते ही मंडीदीप नगर पालिका, फायर ब्रिगेड, होमगार्ड्स, पुलिस, और एनडीआरएफ-एसडीईआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं।
सुबह करीब 10 बजे जाकर स्थिति पूरी तरह नियंत्रित हो पाई, एक किलोमीटर का दायरा सील
रिसाव की गंभीरता को देखते हुए प्लांट के चारों ओर 1 किमी के दायरे में बैरिकेडिंग की गई। सभी प्रकार की आवाजाही बंद कर दी गई। सतलापुर और मंडीदीप पुलिस चौकसी में जुट गई। अस्पताल, स्कूल और घरों को सतर्क कर दिया गया, हालांकि किसी को बाहर निकालने की नौबत नहीं आई।
गेल प्लांट क्या करता है?
- यह प्लांट एलएनजी (Liquefied Natural Gas) को पीएनजी (Piped Natural Gas) में बदलकर घरों, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल उपयोग के लिए सप्लाई करता है।
- घरेलू गैस स्टोरेज: 750 SCMD
- कॉमर्शियल: 1600 SCMD
- इंडस्ट्रियल: 7500 SCMD
- यहां से भोपाल समेत आसपास के कई औद्योगिक क्षेत्रों में गैस की सप्लाई की जाती है।
प्रोजेक्ट मैनेजर का बयान: "स्थिति नियंत्रण में"
गेल के प्रोजेक्ट मैनेजर डी. डोंगरे ने कहा: "हमने समय रहते रिसाव पर काबू पा लिया है। स्थिति नियंत्रण में है और किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। आसपास के क्षेत्र को खाली कराने या स्कूल बंद करने जैसी कोई जरूरत नहीं पड़ी।"
जयपुर से पहुंची विशेष सेफ्टी टीम
गेल की विशेष सेफ्टी टीम जयपुर से बुधवार दोपहर प्लांट पहुंची और गैस रिसाव के कारणों की जांच शुरू की। कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा, एसडीएम चंद्रशेखर श्रीवास्तव, एसडीपीओ शीला सुराणा, और नायब तहसीलदार नीलेश सरवटे ने भी प्लांट का निरीक्षण किया।
कलेक्टर बोले: "सेफ्टी ऑडिट कराया जा रहा है। हम पूरे घटनाक्रम का गहराई से विश्लेषण कर रहे हैं। भविष्य में ऐसी स्थिति न दोहराई जाए, इसके लिए SOP तैयार की जाएगी।"
अब सवाल ये उठता है: रिसाव हुआ कैसे?
रिसाव की असली वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है, लेकिन सूत्रों की मानें तो एलएनजी को पीएनजी में बदलने की प्रक्रिया के दौरान वॉल्व या पाइपलाइन में लीक की आशंका है। प्लांट का सुरक्षा ऑडिट पिछली बार 2022 में हुआ था, और कुछ पुराने हिस्सों की मेंटेनेंस रिपोर्ट लापता बताई जा रही है।
एसपी पंकज पांडे ने कहा: "गैस लीक के कारणों की जांच की जा रही है। सेफ्टी प्रोटोकॉल और कर्मचारियों की जिम्मेदारियों की पड़ताल की जा रही है।"
स्थानीय लोगों में चिंता
हालांकि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन स्थानीय लोग डरे हुए हैं। पास की कॉलोनियों के कई लोगों ने रातभर नींद नहीं ली। अनिता शर्मा, जो प्लांट से 800 मीटर दूर रहती हैं, कहती हैं: "गैस की गंध और शोर से हम बहुत डर गए थे। बच्चों को लेकर हम बाहर निकल आए थे।"
क्या कहती है एनजीटी गाइडलाइन?
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के अनुसार, किसी भी इंडस्ट्रियल गैस प्लांट को हर 6 महीने में सेफ्टी ऑडिट कराना अनिवार्य है। यदि यह प्रमाणित हो जाता है कि गेल ने यह ऑडिट समय पर नहीं कराया, तो प्रशासन को भारी जुर्माना लगाने का अधिकार है।
फिलहाल स्थिति सामान्य, पर सबकी नजर जांच पर
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि गैस और ऊर्जा प्लांटों की सुरक्षा पर और अधिक ध्यान देने की जरूरत है। मंडीदीप जैसे औद्योगिक शहर में ऐसे हादसे बड़ी तबाही ला सकते हैं। अब सबकी नजरें जयपुर से आई जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्या यह मानव त्रुटि थी या तकनीकी खामी? इसका खुलासा कुछ दिनों में होगा।
क्या आप जानना चाहेंगे:
- गेल की सुरक्षा व्यवस्था की पूरी प्रणाली?
- अन्य शहरों में गैस लीक से हुए बड़े हादसे?
- या फिर इस घटना पर सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया?












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