MP News: IT के राडार पर खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के रिश्तेदारों की बेनामी संपत्तियां, जानिए पूरा मामला
MP Sagar News: मध्य प्रदेश सरकार के खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के परिवार के लोग और उनके रिश्तेदारों की संपत्ति अब आयकर विभाग की जांच के घेरे में आ गई है।
आयकर विभाग की इनवेस्टिगेशन विंग ने गोविंद सिंह राजपूत के साला, सरहज और उनके बेटे की 195 एकड़ से अधिक की बेनामी जमीनों की जांच शुरू कर दी है। यह जमीनें उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर या तो दान में दी गईं थीं या उन्हें बेची गईं थीं।

बेनामी संपत्ति की जांच
आयकर विभाग ने इन बेनामी संपत्तियों की जांच आयकर कानून के तहत शुरू की है, जिसके अनुसार बेनामी संपत्ति के लेन-देन को रोकने के लिए सख्त प्रावधान हैं। जांच में यह भी पता चला है कि इन 195 एकड़ में से करीब 50 एकड़ वह जमीनें भी हैं, जो गोविंद सिंह राजपूत, उनकी पत्नी और उनके बेटे के नाम पर दान की गईं थीं। इन जमीनों को लेकर पहले भी विवाद उठ चुका है। जब यह मामला सामने आया, तो रिश्तेदारों ने वह जमीनें मंत्री और उनकी पत्नी को दान में दी थी, उन्हें वापस कर दिया।
आयकर विभाग ने इन संपत्तियों के बारे में पूरी जानकारी सागर जिला प्रशासन से मांगी थी, जिसके बाद खुरई तहसीलदार ने इन जमीनों का ब्योरा विभाग को भेजा।
कानून और शिकायत
आयकर विभाग ने इस मामले में बेनामी संपत्ति संव्यवहार प्रतिषेध अधिनियम 1988 की धारा-21 के तहत जानकारी मांगी थी। सूत्रों का कहना है कि हाल ही में यह जानकारी सागर जिला प्रशासन से आयकर विभाग तक पहुंची है। यह जानकारी गिरहनी, निवारी और कुदरू के राजस्व निरीक्षकों ने तैयार की थी, और अब विभाग इन जमीनों की वास्तविक मालिकाना हक और लेन-देन की जांच कर रहा है।
संभावित प्रभाव
आयकर विभाग की यह जांच मप्र सरकार के खाद्य मंत्री के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है। बेनामी संपत्ति के खिलाफ विभाग की जांच और सख्ती सरकार के लिए एक चुनौती बन सकती है। यदि जांच में मंत्री और उनके परिवार के खिलाफ कोई ठोस प्रमाण मिलते हैं, तो इसके गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं।

एक ही पते पर अलग-अलग नाम से संपत्ति, शिकायत के बाद लौटाई गईं
मध्य प्रदेश के खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और उनके रिश्तेदारों पर आयकर विभाग द्वारा बेनामी संपत्तियों की जांच की जा रही है। इन संपत्तियों में कई जमीनें शामिल हैं जो मंत्री के रिश्तेदारों के नाम पर पंजीबद्ध थीं, लेकिन बाद में शिकायत के बाद उन जमीनों को वापस कर दिया गया। आइए जानते हैं इन संपत्तियों और उनका विवरण:
1. हिमांचल सिंह राजपूत (साला)
- पता: 36, स्कूल गली, गिरहनी, तहसील-खुरई
- जमीनें: खसरा नं. 1322/2, 1323/2, 1327/2
- विवरण:
- खसरा नं. 1322/2 की जमीन गोविंद सिंह राजपूत की पत्नी को 3 अगस्त 2022 को दान में दी गई।
- खसरा नं. 1323/2 की जमीन 4 अगस्त 2022 को दान में दी गई।
- खसरा नं. 1327/2 की जमीन 25 जुलाई 2022 को मंत्री के बेटे आदित्य को दान में दी गई।
- शिकायत के बाद यह सभी जमीनें वापस कर दी गईं।
2. करतार सिंह राजपूत (साला)
- पता: 36, स्कूल गली, गिरहनी, तहसील-खुरई
- जमीनें: खसरा नं. 1322/1/1, 1323/1/1, 1326
- विवरण:
- खसरा नं. 1322/1/1 और 1323/1/1 की जमीन 3 अगस्त 2022 में मंत्री की पत्नी को दान में दी गई।
- खसरा नं. 1326 की जमीन 25 जुलाई 2022 को आदित्य को दान में दी गई।
- इन जमीनों को भी शिकायत के बाद वापस कर दिया गया।
3. सविता बाई राजपूत (पत्नी, करतार सिंह राजपूत)
- पता: 36, स्कूल गली, गिरहनी, तहसील-खुरई
- जमीन: खसरा नं. 1328
- विवरण:
- यह जमीन सविता ने कल्पना सिंघई से खरीदी और 29 अगस्त 2022 को गोविंद सिंह को दान में दी गई।
- शिकायत के बाद इसे वापस कर दिया गया।
4. प्रथमेश राजपूत (पुत्र, करतार सिंह राजपूत)
- जमीन: खसरा नं. 1322/1/2, 1323/1/2
- विवरण:
- यह जमीन मंत्री के बेटे आकाश को बेची गई।
5. शुभम राजपूत (पुत्र, हिमांचल सिंह राजपूत)
- पता: गिरहनी, तहसील खुरई
- जमीन: खसरा नं. 1329
- यह जमीन शुभम के नाम पर थी, जिसे गोविंद सिंह के बेटे आकाश को बेच दिया गया।
- जिला प्रशासन द्वारा भेजी गई जानकारी
- आयकर विभाग ने 1 अप्रैल 2022 से पहले पंजीकृत इन सभी संपत्तियों की जांच शुरू कर दी है। सागर जिला प्रशासन ने आयकर विभाग को इन संपत्तियों से संबंधित सभी दस्तावेज भेजे हैं, जिसमें इस जमीन पर पिछले 10 वर्षों में उगाई गई फसलें और हर साल की पैदावार से संबंधित विवरण शामिल हैं। इन दस्तावेजों से यह अनुमान लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस संपत्ति से कितनी कमाई हुई है और क्या ये संपत्तियां वाकई वैध हैं।
गोविंद सिंह राजपूत का बयान
गोविंद सिंह राजपूत ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, "मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। यह जमीन का मामला पुराना है और जो जमीन दान में दी थी, कुछ में से वापस कर दी गई थी। यह पूरी प्रक्रिया लीगल है और रजिस्टर्ड तरीके से संपत्ति वापस की गई थी। इस मामले में ना तो मुझसे और ना ही मेरे परिवार से आयकर विभाग ने कोई जानकारी ली है और ना ही कोई पूछताछ की है।"












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