MP: मछली पालन से बदली किसानों की किस्मत, कैसे हो रही लाखों की कमाई, जानिए

मध्यप्रदेश में मत्स्य पालन से कम समय में अधिक आय अर्जित की जा सकती है। मत्स्य पालन से मत्स्य पालकों की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और इसके सेवन से शरीर में पोषक तत्वों की पूर्ति होती है। इन्हीं तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए शासन द्वारा मत्स्य पालन को प्रोत्साहन दिया जाता है।

खरगोन जिले में मत्स्य पालन के लिए उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर बीते 01 वर्ष में लक्ष्य से अधिक मत्स्य उत्पादन किया गया है। जिले के देजला देवाड़ा जलाशय में नई पहल कर झींगा उत्पादन का कार्य भी किया जा रहा है।

Bhopal

सहायक संचालक मत्स्योद्योग ने बताया कि, खरगोन जिले में कुल 428 ग्रामीण एवं 156 सिंचाई तालाब है। इनके 7110 हेक्टेयर जल क्षेत्र में मत्स्य पालन का कार्य किया जा रहा है। इन तालाबों में 84 मछुओं सहकारी समितियों के 3350 सदस्यों को मत्स्य पालन से रोजगार उपलब्ध हो रहा है। खरगोन जिला मत्स्य बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर है और यहां से संभाग के अन्य जिलों को मत्स्य बीज प्रदाय किया जाता है। मत्स्य बीज उत्पादन के लिए जिले में 01 शासकीय हेचरी एवं 03 निजी क्षेत्र के हेचरी है। इन हेचरियों में उन्नत प्रजाति का मत्स्य बीज उत्पादन किया जाता है। बीते 01 वर्ष में 1330 लाख स्टेंडर्ड फ्राय मत्स्य बीज उत्पादन के लक्ष्य के विरूद्ध जिले में 1345 लाख स्टेंडर्ड फ्राय मत्स्य बीज का उत्पादन किया गया है। विभाग द्वारा जिले को 7318 मेट्रिक टन मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य दिया गया था। इस लक्ष्य के विरूद्ध जिले में 8425 मेट्रिक टन मत्स्य का उत्पादन किया गया है।

शासन द्वारा मत्स्य पालन करने वाले मछुआरों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं दी जाती है। जिले में 01 वर्ष में 02 हजार मत्स्य पालकों को क्रेडिट कार्ड प्रदाय किये गए हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत मत्स्य पालन के लिए तालाब निर्माण, मछुआरों को इन्सूलेटेड वाहन, मछलियों का चारा निर्माण, बायोफ्लाक टेंक निर्माण, आईस बॉक्स सहित 03 पहिया वाहन व मोटर साईकिल प्रदाय करने में 01 करोड़ 36 लाख 55 हजार रुपये का अनुदान दिया गया है।

जिले में 59 अमृत सरोवर तालाबों को आजीविका मिशन के महिला समूहों को मत्स्य पालन के लिए 10 वर्षीय पट्टे पर दिया गया है। इससे 59 महिला समूहों की 395 महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। इन तालाबों में इस वर्ष 65 लाख स्पान मत्स्य बीज का संचयन किया गया है। भगवानपुरा विकासखण्ड के देजला देवाड़ा जलाशय में मत्स्य पालन के साथ झींगा पालन भी किया जा रहा है। इस जलाशय में बीते 01 वर्ष में 2.10 मेट्रिक टन झींगा उत्पादन कर मछुआ समिति द्वारा मत्स्य पालन के साथ-साथ अतिरिक्त आय अर्जित की गई है।

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