MP News: मऊगंज के खजुरहन में फिर भड़का जमीन विवाद, मंदिर के पास अंतिम संस्कार को लेकर दोनों समुदाय आमने-सामने
MP News: मऊगंज जिले के खजुरहन ग्राम पंचायत में एक बार फिर जमीन विवाद ने तनाव का रूप ले लिया है। सोमवार रात एक पुराने कब्रिस्तान में मुस्लिम समुदाय द्वारा अंतिम संस्कार के लिए गड्ढा खोदने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। विवादित स्थान एक मंदिर परिसर के पास स्थित है, जिसे लेकर एक महीने पहले भी दोनों समुदाय आमने-सामने आ चुके हैं।
यह वही विवादित जमीन है, जहां पिछले महीने मंदिर निर्माण और कब्रिस्तान की सीमा को लेकर एक लंबा आंदोलन चला था, जो कई दिनों तक धरना प्रदर्शन में तब्दील हो गया था। मामला तब जाकर शांत हुआ जब कलेक्टर के हस्तक्षेप और आपसी सहमति के बाद दोनों पक्षों ने पीछे हटने का फैसला किया था।

शव दफनाने के लिए खोदा गया गड्ढा, हिंदू समुदाय ने जताई आपत्ति
विवाद तब शुरू हुआ जब मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कब्रिस्तान की विवादित जमीन पर एक शव दफनाने के लिए गड्ढा खोदना शुरू किया। यह जगह मंदिर परिसर से बेहद सटी हुई है। जैसे ही हिंदू समुदाय को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने मौके पर पहुंचकर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। उनका तर्क था कि मंदिर के ठीक पास शव दफनाना न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है, बल्कि यह जमीन पूर्व में विवादित रही है और प्रशासन ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे।
मौके पर पहुंचे प्रशासन और पुलिस के अधिकारी
तनाव की स्थिति को देखते हुए तुरंत प्रशासन हरकत में आया। संयुक्त कलेक्टर राजेश मेहता, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत की और स्थिति को शांति पूर्ण तरीके से सुलझाने की कोशिश की।
प्रशासन ने मुस्लिम पक्ष से आग्रह किया कि वे थोड़ी दूरी पर अंतिम संस्कार करें, ताकि वर्तमान विवाद गहराए नहीं। मुस्लिम समुदाय के वरिष्ठों ने सहमति जताते हुए कब्र की जगह बदल दी। इसके बाद मृतक का अंतिम संस्कार प्रशासन की निगरानी में शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
संयुक्त कलेक्टर बोले - "रिपोर्ट आने दीजिए, सब ठीक हो जाएगा"
मौके पर मौजूद हिंदू समुदाय के लोगों ने प्रशासन से नाराजगी जताई कि एक बार फिर वही विवादित भूमि पर गतिविधियां शुरू हो गई हैं। इस पर संयुक्त कलेक्टर राजेश मेहता ने भरोसा दिलाया कि, "अभी अंतिम संस्कार शांतिपूर्वक हो जाने दीजिए। कल तक मैं पूरी रिपोर्ट दूंगा। हमने कब्रिस्तान की दूरी मंदिर से 20 फीट से बढ़ाकर 30 फीट कर दी है। जांच रिपोर्ट के बाद दो-तीन महीनों में स्थायी समाधान निकाल लिया जाएगा।" उन्होंने सभी से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की।
एक महीने पहले भी हुआ था विवाद, कलेक्टर ने की थी मध्यस्थता
गौरतलब है कि मार्च महीने में खजुरहन गांव में मंदिर निर्माण और कब्रिस्तान की सीमाओं को लेकर बड़ा विवाद सामने आया था। हिंदू समुदाय ने आरोप लगाया था कि कब्रिस्तान धीरे-धीरे मंदिर की जमीन तक फैलाया जा रहा है। इस मुद्दे पर करीब एक महीना लंबा धरना प्रदर्शन चला था। अंततः कलेक्टर ने दोनों समुदायों से संवाद कर अस्थायी समझौता कराया था।
स्थानीय नेताओं और धार्मिक संगठनों की चुप्पी, लोगों में असमंजस
घटना को लेकर स्थानीय नेताओं और धर्मगुरुओं की चुप्पी पर गांववासियों में असमंजस और नाराजगी है। लोगों का कहना है कि राजनीतिक दल और पंचायत प्रतिनिधि केवल चुनाव के समय ही नजर आते हैं, जब गांव में वास्तव में सामुदायिक तनाव की स्थिति बनती है, तब वे दूरी बना लेते हैं।
प्रशासनिक चुनौतियां: कब्रिस्तान और मंदिर के बीच सीमांकन अभी भी अधूरा
प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती कब्रिस्तान और मंदिर के बीच स्पष्ट सीमांकन करना है, जो अब तक अधूरा है। संयुक्त कलेक्टर ने बताया कि सरकारी सर्वे की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसे विवाद न हों। साथ ही उन्होंने कहा कि इस जमीन से जुड़ी पुरानी रिकॉर्ड फाइलें और नक्शे खंगाले जा रहे हैं, ताकि ऐतिहासिक स्थिति स्पष्ट हो सके।
सामाजिक सौहार्द बना रहे, यही सभी की जिम्मेदारी: प्रशासन
घटना के बाद प्रशासन ने गांव में शांति समिति की बैठक बुलाने का निर्देश दिया है। स्थानीय स्तर पर पंचायत और पुलिस की मदद से दोनों समुदायों के बीच संवाद कायम करने की कोशिशें शुरू हो गई हैं।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह ने कहा- "हमारा पहला प्रयास यही है कि माहौल शांत बना रहे। कोई भी पक्ष कानून हाथ में न ले। यदि कोई भड़काऊ गतिविधि करता है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।"












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