MP News: लखपति दीदी योजना की धूम, जानिए कैसे 1584 करोड़ रुपये खर्च कर 10 लाख महिलाएं बनीं लखपति
MP News: मध्य प्रदेश में स्व सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई लखपति दीदी योजना एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में खुलासा हुआ कि पिछले तीन सालों में मध्य प्रदेश में ₹1,584.22 करोड़ खर्च कर 10 लाख 51 हजार 69 महिलाओं को "लखपति दीदी" घोषित किया गया है।
यह योजना उन महिलाओं को लखपति दीदी के रूप में मान्यता देती है, जिनकी सालाना आय ₹1 लाख से अधिक हो। लेकिन यहां एक पेंच है-सरकार ने इन्हें "स्वघोषित लखपति दीदी" बताया है, जिससे विपक्ष ने योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लखपति दीदी योजना: क्या है यह स्कीम?
लखपति दीदी योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत चलाई जा रही है, जिसका उद्देश्य स्व सहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के तहत उन महिलाओं को लखपति दीदी घोषित किया जाता है, जिनकी सालाना आय ₹1 लाख से अधिक या मासिक आय ₹10,000 रुपये से ज्यादा हो। यह आय कम से कम चार कृषि मौसम (चार फसलों) या चार व्यवसायिक चक्रों तक लगातार बनी रहनी चाहिए। योजना के तहत महिलाओं को प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, प्रारंभिक वित्तपोषण और वित्तीय सहायता दी जाती है।
मध्य प्रदेश में इस योजना के तहत दो प्रकार के क्लस्टर बनाए गए हैं-कारीगर क्लस्टर (हथकरघा और हस्तशिल्प) और क्षेत्रीय क्लस्टर (खाद्य सेवा, पर्यटन, पोषण आदि)। इन क्लस्टरों में डिज़ाइन विकास, गुणवत्ता आश्वासन, उद्यम निर्माण, बाजार विकास, वित्तपोषण, प्रौद्योगिकी उन्नयन और कौशल विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।
₹1584 करोड़ का खर्च, 10 लाख से ज्यादा लखपति दीदी!
राज्यसभा में दिए गए जवाब के मुताबिक, पिछले तीन सालों में ₹1,584.22 करोड़ रुपये खर्च कर 10 लाख 51 हजार 69 महिलाओं को लखपति दीदी घोषित किया गया है। यह राशि आजीविका मिशन के फंड से खर्च की गई है, क्योंकि लखपति दीदी योजना के लिए अलग से कोई बजट आवंटन नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, ताकि वे न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी कर सकें, बल्कि अपने परिवार को भी आर्थिक रूप से मजबूत बना सकें।
स्वघोषित लखपति दीदी
विपक्ष ने उठाए सवाल हालांकि, सरकार के इन दावों पर विपक्ष ने सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्यसभा में यह खुलासा होने के बाद कि ये 10 लाख से ज्यादा लखपति दीदी "स्वघोषित" हैं, कांग्रेस ने इसे "कागजी खेल" करार दिया है। कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह ने कहा, "सरकार ने ₹1,584 करोड़ रुपये खर्च कर 10 लाख से ज्यादा महिलाओं को लखपति दीदी घोषित कर दिया, लेकिन यह स्वघोषित है। इसका मतलब इनकी आय का सही सत्यापन नहीं हुआ है। यह सिर्फ आँकड़ों की बाजीगरी है।" उनका कहना था कि योजना की सफलता के आंकड़े केवल कागजों पर हैं और असल में इन महिलाओं की आय का सही आकलन नहीं किया गया है।
लाड़ली बहना योजना पर भी सियासी जंग लखपति दीदी योजना के साथ-साथ लाड़ली बहना योजना भी सियासी बहस का केंद्र बनी हुई है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1,250 रुपये दिए जा रहे हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने वादा किया था कि यह राशि बढ़ाकर ₹3,000 रुपये की जाएगी। डेढ़ साल बाद भी यह वादा पूरा नहीं हुआ है, जिससे विपक्ष ने सरकार पर हमलावर होना शुरू कर दिया है। कांग्रेस का कहना है कि ₹1,250 रुपये की राशि आज के महंगाई के दौर में नाकाफी है, और सरकार को अपने वादे को जल्द से जल्द पूरा करना चाहिए।
पीएम मोदी का सपना
3 करोड़ लखपति दीदी! केंद्र सरकार भी इस योजना को लेकर काफी सक्रिय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2023 को स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में 2 करोड़ लखपति दीदी बनाने का सपना देखा था। इस साल फरवरी में अंतरिम बजट 2024-25 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस लक्ष्य को बढ़ाकर 3 करोड़ कर दिया। इसके तहत महिला उद्यमियों की संख्या बढ़ाने और उन्हें वित्तीय सहायता देने के लिए कई योजनाएं बनाई गई हैं।
सोशल मीडिया पर चर्चा
"कागजी लखपति दीदी या असली सशक्तिकरण?" सोशल मीडिया पर भी इस योजना को लेकर बहस छिड़ गई है। कुछ यूजर्स ने सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि लखपति दीदी योजना से महिलाएँ आत्मनिर्भर बन रही हैं, जबकि अन्य ने इसे कागजी खेल करार दिया। एक यूजर ने लिखा, "स्वघोषित लखपति दीदी का क्या मतलब है? सरकार को पहले इनकी आय का सत्यापन करना चाहिए था। यह सिर्फ आँकड़ों की बाजीगरी है।" एक अन्य यूजर ने लिखा, "लाड़ली बहना योजना में ₹3,000 रुपये देने का वादा पूरा नहीं हुआ, और अब लखपति दीदी का नया जुमला। सरकार को पहले अपने वादे पूरे करने चाहिए।"
क्या यह योजना वाकई सशक्तिकरण की राह है?
लखपति दीदी योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है, लेकिन कई सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं। पहला सवाल यह कि जब इन महिलाओं को स्वघोषित लखपति दीदी बताया जा रहा है, तो क्या उनकी आय का सही आकलन किया गया है? दूसरा सवाल यह कि क्या यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में उन महिलाओं तक पहुंच पा रही है, जो वाकई आर्थिक मदद की जरूरत में हैं? और तीसरा सवाल यह कि लाड़ली बहना योजना में ₹3,000 रुपये देने का वादा कब पूरा होगा?
यह साफ है कि मध्य प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर सियासी जंग तेज हो गई है। विपक्ष लाड़ली बहना योजना को लेकर सरकार पर हमलावर है, जबकि सरकार लखपति दीदी योजना को अपना हथियार बना रही है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये योजनाएँ वाकई महिलाओं की जिंदगी में बदलाव ला पा रही हैं, या यह सिर्फ सियासी वादों और आँकड़ों का खेल है? यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है-आने वाले दिनों में इसकी नई कड़ी सामने आ सकती है!












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