MP News: लाड़ली बहनों का इंतजार और सियासत की गर्मी, 23वीं किस्त अटकी, कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

MP News: मध्य प्रदेश की बहुप्रचारित लाड़ली बहना योजना की 23वीं किस्त को लेकर इन दिनों प्रदेशभर में बेचैनी और सियासी हलचल दोनों ही तेज हो गई हैं।

अप्रैल 2025 की 10 तारीख बीत जाने के बावजूद महिलाओं के खातों में पैसा नहीं पहुंचा, जिससे न सिर्फ लाभार्थी महिलाएं चिंतित हैं, बल्कि कांग्रेस ने भी इसे मुद्दा बनाकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

Ladli Behna Yojana politics in mp 23rd installment stuck Congress targets mohan yadav government

हर महीने का इंतजार इस बार और लंबा

लाड़ली बहना योजना के तहत राज्य सरकार हर महीने पात्र महिलाओं को ₹1,250 की आर्थिक सहायता देती है। योजना की शुरुआत मई 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी, और तब से अब तक इसकी 22 किस्तें जारी हो चुकी हैं। योजना को महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और परिवार में निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जाता है।

लेकिन अप्रैल की 23वीं किस्त ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हर बार की तरह 10 तारीख को पैसे आने की उम्मीद लगाए बैठी महिलाओं को अब 11 तारीख भी खाली हाथ गुजर चुकी है। न तो सरकार की तरफ से कोई सूचना आई और न ही कोई स्पष्टीकरण।

राजनीतिक हमला: पटवारी बोले, 'वोट के लिए झूठ बोला'

इस देरी पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा,

"पहले 10 तारीख को लाड़ली बहनों के नाम होर्डिंग लगते थे, लेकिन अब 10 तारीख आई और पैसा नहीं आया। क्या सरकार का खजाना खाली हो गया या नीयत बदल गई है?"

पटवारी ने यह भी आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के वक्त बीजेपी ने इस योजना की राशि को ₹1,250 से बढ़ाकर ₹3,000 करने का वादा किया था, लेकिन अब सरकार इससे मुकर रही है। उन्होंने विधानसभा में दिए गए सरकारी जवाब का हवाला देते हुए कहा कि इस बढ़ोत्तरी को लेकर कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है।

नामों की कटौती का भी आरोप

कांग्रेस ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि वह धीरे-धीरे योजना के लाभार्थियों की संख्या घटा रही है। पटवारी ने दावा किया कि

  • अब तक 15,748 महिलाओं के नाम मृत्यु के बाद हटाए गए हैं
  • जबकि 3,19,991 महिलाएं जो 60 वर्ष की आयु पार कर चुकी हैं, योजना के पोर्टल से बाहर कर दी गई हैं।
  • उन्होंने मांग की है कि न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की जाए
  • अधिकतम आयु सीमा 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए
  • और वादा के मुताबिक राशि ₹3,000 प्रतिमाह की जाए।

सरकार की चुप्पी और अफवाहों का बाजार

राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस देरी पर कोई बयान सामने नहीं आया है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि हो सकता है सरकार 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अशोकनगर दौरे, 12 अप्रैल को हनुमान जयंती, या 13 अप्रैल को गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के दौरान इस किस्त को जारी करे। हालांकि, यह सब अभी अनुमान हैं। स्पष्टता का अभाव ही जनता में असंतोष को बढ़ा रहा है।

लाभार्थियों की बेचैनी: "इस पैसे से ही घर चलता है"

  • भोपाल की सुनीता बाई, जो योजना की शुरुआत से लाभार्थी हैं, बताती हैं -
  • "हर महीने की 10 तारीख को पैसे आ जाते थे। इस बार न मैसेज आया, न बैंक में पैसा। राशन का सामान उधार लेना पड़ा है। ये छोटी रकम हमारे लिए बड़ी राहत होती है।"
  • ऐसी ही हज़ारों महिलाएं प्रदेशभर में इस अनिश्चितता को लेकर परेशान हैं।

पात्रता और प्रभाव: योजना का सामाजिक असर

लाड़ली बहना योजना की पात्रता में राज्य की निवासी होना, 21 से 60 वर्ष के बीच विवाहित महिला होना (विधवा, तलाकशुदा शामिल), और परिवार की सालाना आय ₹2.5 लाख से कम होना शामिल है। सरकारी कर्मचारी या आयकरदाता महिलाएं योजना से बाहर हैं। अब तक यह योजना महिलाओं के आर्थिक अधिकार को सशक्त बनाने में अहम मानी गई है, लेकिन वर्तमान स्थिति ने इसकी प्रामाणिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अन्य घटनाएं और माहौल

लाड़ली बहना योजना की देरी के बीच शुक्रवार को भोपाल के गौतम नगर थाने के बाहर एक युवक ने आत्मदाह की कोशिश की। वहीं, गुरुवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भोपाल में वक्फ संशोधन बिल के विरोध में शांतिपूर्ण धरना दिया। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी धार में ₹5,800 करोड़ की सड़क परियोजनाएं लेकर पहुंचे।

इन सबके बीच लाड़ली बहना योजना की 23वीं किस्त का न आना, सरकार और महिलाओं के बीच भरोसे की डोर को खिंचता दिखा रहा है।

क्या कहती है आगे की राह?

अब सबकी निगाहें सरकार पर टिकी हैं-क्या वह जल्द किस्त जारी करेगी, या यह मामला और भी ज्यादा राजनीतिक मोड़ लेगा? यदि कांग्रेस इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाती रही और लाभार्थियों में नाराजगी बढ़ती गई, तो इसका सीधा असर आगामी लोकसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल प्रदेश की 1.27 करोड़ लाड़ली बहनें अपने हक की राशि और सरकार की सफाई का इंतजार कर रही हैं।

पटवारी ने सरकार से कई मांगें रखी हैं:

  • योजना की न्यूनतम आयु सीमा को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष किया जाए।
  • नए नाम जोड़े जाएं ताकि अधिक महिलाएं लाभ ले सकें।
  • अधिकतम आयु सीमा को 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष किया जाए।
  • बीजेपी के वादे के मुताबिक, राशि को तुरंत 3,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए।
  • उन्होंने बीजेपी पर "वोट के लिए झूठ बोलने" का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर सरकार अपनी नीति नहीं बदलती, तो कांग्रेस इस मुद्दे को और जोर-शोर से उठाएगी।

सरकार की चुप्पी और सियासी माहौल

लाड़ली बहना योजना की किस्त में देरी और कांग्रेस के हमलों के बावजूद मध्य प्रदेश सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। यह चुप्पी सियासी हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि सरकार जल्द ही देरी के कारणों को स्पष्ट कर सकती है, क्योंकि यह योजना बीजेपी की लोकप्रियता का बड़ा आधार रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस इस मुद्दे को और उछालकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।

लाड़ली बहना योजना में पात्रता के लिए कुछ शर्तें हैं

  • आवेदक मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी होनी चाहिए।
  • आयु 21 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
  • विवाहित (विधवा, तलाकशुदा या परित्यक्ता सहित) होनी चाहिए।
  • परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।
  • आयकरदाता, सरकारी कर्मचारी या उनके परिवार की महिलाएं पात्र नहीं हैं।
  • योजना ने अब तक लाखों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। यह राशि उनकी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ परिवार में उनकी भूमिका को भी मजबूत करती है। लेकिन हाल की देरी ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+