Kuno: ‘चीते ओवान’ ने खोजा टाइगर्स काॅरीडोर, कूनो-माधव-रणथंबौर को जोड़ता है ‘प्राकृतिक काॅरीडोर’
कूनो का चीता जंगल छोड़कर भाग नहीं रहा, बल्कि नई खोज पर निकला है। विशेषज्ञों की माने तो वह कूनो से शिवपुरी जिले पहुंच गया है। गाजीगढ़ मे ंजहां वह मौजूद है यह इलाका कूनो-माधव-रणथंबौर तक बाघों का प्राकृतिक काॅरीडोर है।

मध्य प्रदेश के कूनो में नामीबिया से आया 'चीता ओवान' बीते 5 दिन से सदियों से बाघों के प्राकृतिक काॅरीडोर के रास्ते पर चल रहा है। इसे आश्चर्य ही मानिये 'ओवान' जिस रास्ते से कूनो से निकलकर शिवपुरी के जंगलों तक पहुंच गया है वह इलाका मप्र के दो जिलों को जोड़ते हुए राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के रणथंबौर टाइगर रिजर्व तक जाता है। पूर्व में रणथंबौर के टाइगर कूनो और माधव नेशनल पार्क तक इसी काॅरीडोर के माध्यम से आ चुके हैं।
भारत की धरती पर 70 साल बाद कदम रखने के बाद नामीबिया से आया चीता ओवान अपने पूर्वजों और बिग कैट्स के दशकों और सदियों पुराने रास्ते और इलाके की खोज पर निकल पड़ा है। बता दें कि शनिवार से कूनो का नर 'चीता ओवान' कूनो नेशनल पार्क के कोर एरिया तो ठीक बफर जोन से बाहर निकलकर करीब 30 किलोमीटर दूर झार बरौदा गांव तक पहुंच गया था। यहां से रोज करीब 20 से 25 किलोमीटर का सफर तय कर रोज लोकेशन बदलकर आगे बढ़ रहा है। वह श्योपुर जिले और कूनो के बफर जोन से सटे जंगली इलाके से होते हुए शिवपुरी के जंगलों में पहुंच गया है।

'चीता ओवान' शिवपुरी जिले में पोहरी रेंज के गाजीगढ़ गांव के नजदीक है
कूनो नेशनल पार्क व शिवपुरी वन विभाग के अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी अनुसार बुधवार को चीता ओवान की लोकेशन जिस इलाके में थी, वह इलाका कूनो और श्योपुर से दूर शिवपुरी जिले में आता है। ओवान कूनो स लगे शिवपुरी वन विभाग की पोहरी रेंज के जंगल में मौजूद है। उसने यहीं पर एक खेत में चिंकारा (काला हिरण) का शिकार कर पेट भी भरा। पोहरी रेंज का यह इलाका कैमई बीट के अधीन व गाजीगढ़ गांव के नजदीक है। चीता गांव की आबादी से महज 3 किलोमीटर दूर मौजूद है। वह तालाब के पास देखा गया था। कूनो की टीम 24 घंटे उस पर नजर बनाए है तथा काॅलर आईडी के सिग्नल से उसे ट्रेस कर रही है। पोहरी रेंज का वन अमला भी चीते की सुरक्षा में जुट गया है।
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शिवपुरी-कूनो और रणथम्बौर टाइगर रिजर्व का काॅरीडोर का हिस्सा
कूनो का नर चीता पांच दिन में मस्ती से जिस रास्ते पर चल रहा है, उस पर नजर डाली जाए तो यह अचरज में डाल सकती है। कारण वह कूनो से निकलकर जंगल, नदी, पहाडी, खेतों के जिस रास्ते से होकर शिवपुरी की पोहरी रेंज तक पहुंचा है यह इलाका बाघों का प्राकृतिक काॅरीडोर है। यह आज से नहीं बल्कि दशकों और सदियों से शिवपुरी-कूनो नेशनल पार्क और राजस्थान के रणथम्बौर का प्राकृतिक काॅरीडोर है। पूर्व के दशकों में टाइगर इस रास्ते से मूवमेंट करते रहे हैं।
कूनो-माधव और रणथम्बौर नेशनल पार्क को जोड़ता है यह काॅरीडोर
कूनो का चीता ओवान अब श्योपुर जिले की सीमा से निकलकर पड़ोसी जिले शिवपुरी की सीमा में घूम रहा है। माधव नेशनल पार्क शिवपुरी से कूनो और राजस्थान के रणथंबौर तक बाघों का प्राकृतिक काॅरीडोर बना है। दशकों पहले बाघ एक इलाके से दूसरे इलाके में जाने के लिए जंगल में इसी रास्ते (काॅरीडोर) से आते जाते रहे हैं। चीता ओवान भी उसी रास्ते को सर्च कर रहा है। यह हिस्सा शिवपुरी के आबादी महज 3 से 4 किलोमीटर दूर वाले इलाके गाजीगढ़ में हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि ओवान को इसी तरह स्वतंत्र छोड़ दिया जाए तो वह कूनो से सीधे माधव नेशनल पार्क भी आ सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि टाइगर के लिए काॅरीउोर हिस्सा बनाया है, ताकि शिवपुरी से रणथम्भैर तक टाइगर आ-जा सकें। वन विभाग के रिकाॅर्ड बताते हैं कि दशकों पहले इसी रास्ते से रणथम्बौर से कूनो में पहले भी टाइगर आ चुके हैं।
जानवरों को रास्ता मिलता है तो वे कूनो-शिवपुरी तक आ सकते हैं
टाइगर प्रोजेक्ट के परियोजना अधिकारी एवं सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा ने मीडिया को जानकारी उपलब्ध कराई है कि यदि जानवरों को रास्ता मिलता है तो वे कूनो से शिवपुरी नेशनल पार्क तक आ सकते हैं। यह जानवरों के लिए प्राकृतिक काॅरीडोर है।












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