MP News: बुधनी और विजयपुर सीटों पर पूर्व सीएम कमलनाथ आज दिखाएंगे अपनी ताकत, 13 नवंबर को मतदान
मध्य प्रदेश की दो महत्वपूर्ण विधानसभा सीटें, बुधनी और विजयपुर, 13 नवंबर को मतदान के लिए तैयार हैं। दीपावली के बाद, दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों-कांग्रेस और बीजेपी-ने अपनी चुनावी रणनीतियों को तेज कर दिया है। अब दोनों दलों के नेता प्रचार में पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
कांग्रेस की रणनीति
बुधनी में, कांग्रेस के नेता शिवराज सिंह चौहान को घेरने के लिए पूरी तैयारी में हैं। प्रमुख नेता जैसे अरुण यादव, सज्जन सिंह वर्मा और शैलेन्द्र पटेल चुनावी मैदान में सक्रिय हैं। विजयपुर में, रामनिवास रावत के दलबदल को लेकर कांग्रेस के नेता उन पर निशाना साधने की योजना बना रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी इस बार का प्रचार अभियान अपने हाथ में ले रहे हैं। वे बुधनी में दो जनसभाएं और विजयपुर में एक सभा करेंगे। उनकी इस यात्रा में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, प्रदेश प्रभारी भंवर जितेन्द्र सिंह, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे भी शामिल होंगे।
कमलनाथ का प्रचार कार्यक्रम इस प्रकार है:
- 5 नवंबर: सुबह 11 बजे बुधनी के रेहटी में जनसभा
- 5 नवंबर: दोपहर 12.15 बजे बुधनी के भैरूंदा में जनसभा
- 6 नवंबर: सुबह 10.30 बजे श्योपुर में स्व सत्यभान सिंह चौहान के आवास पर शोक संवेदना व्यक्त करना
- 6 नवंबर: सुबह 11.15 बजे विजयपुर के करहल में जनसभा को संबोधित करना
- इसके अलावा, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने विजयपुर में चुनाव प्रचार को गति देने के लिए एक हफ्ते तक लगातार नुक्कड़ सभाएं आयोजित की हैं।
बीजेपी की प्रचार रणनीति
बीजेपी की रणनीति विकास के एजेंडे पर आधारित है। पार्टी बुधनी में शिवराज सिंह चौहान द्वारा किए गए विकास कार्यों को प्रमुखता से प्रचारित कर रही है। हालांकि, इस बार के चुनाव में रमाकांत भार्गव पार्टी के उम्मीदवार हैं, लेकिन बीजेपी के नेता वोट शिवराज के नाम पर मांगने में जुटे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ मप्र सरकार के कई मंत्री और नेता केन्द्र और राज्य सरकार की विकास योजनाओं को लेकर प्रचार में सक्रिय रहेंगे।
बुधनी और विजयपुर की विधानसभा सीटों पर चुनावी प्रचार ने तेज़ी पकड़ ली है, और दोनों दलों के नेता अपनी ताकत झोंक रहे हैं। चुनावी माहौल में विकास और कार्यों को लेकर होने वाली बहस से यह स्पष्ट है कि यह चुनावी लड़ाई केवल सीट जीतने की नहीं, बल्कि जनता का विश्वास जीतने की भी है। 13 नवंबर को होने वाले मतदान में यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता किस पार्टी के विकास के एजेंडे को प्राथमिकता देते हैं।












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