केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने फिर निभाया वादा, शिवपुरी में 2763 मीट्रिक टन डीएपी खाद की रैक पहुंची
मध्य प्रदेश के शिवपुरी और अशोकनगर जिले के किसानों के लिए केंद्रीय नागरिक उड्डयन और इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया एक बार फिर मसीहा बनकर उभरे हैं। लंबे समय से डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) खाद की कमी से जूझ रहे शिवपुरी के अन्नदाताओं की पुकार सुनकर, सिंधिया ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 2763 मीट्रिक टन डीएपी खाद की रैक शिवपुरी स्टेशन पर पहुंचाई।
इससे पहले, उन्होंने अशोकनगर जिले के किसानों के लिए 1080 मीट्रिक टन खाद की आपूर्ति सुनिश्चित की थी। इस पहल से खरीफ सीजन की बुवाई के लिए समय पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, जिसने किसानों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ा दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सांसद सिंधिया के प्रति किसानों ने आभार व्यक्त करते हुए उन्हें "किसानों का सच्चा हितैषी" बताया। यह घटना न केवल सिंधिया की किसान-केंद्रित प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि मध्य प्रदेश में कृषि विकास और कानून व्यवस्था के प्रति उनकी संवेदनशीलता को भी रेखांकित करती है।
किसानों की पुकार, सिंधिया की त्वरित कार्रवाई
शिवपुरी जिले के किसान लंबे समय से डीएपी खाद की कमी से परेशान थे। खरीफ सीजन की बुवाई नजदीक आने के साथ ही खाद की अनुपलब्धता उनकी सबसे बड़ी चिंता बन गई थी। किसानों ने इस मुद्दे को अपने सांसद और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तक पहुंचाया, जिन्होंने बिना देरी किए इस समस्या का समाधान करने का बीड़ा उठाया। सिंधिया ने रेलवे मंत्रालय, उर्वरक विभाग, और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर तत्काल खाद की आपूर्ति सुनिश्चित की।
उनके प्रयासों का नतीजा 25 मई 2025 को शिवपुरी रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला, जब 2763 मीट्रिक टन डीएपी खाद लेकर एक रेल रैक पहुंची। इस खाद की आपूर्ति ने न केवल किसानों की चिंता को दूर किया, बल्कि उनके खेतों में नई उम्मीद की फसल बो दी। किसानों ने इसे "खुशहाली की ट्रेन" करार देते हुए कहा, "सिंधिया जी ने हमारी पुकार सुनी और हमें समय पर राहत दी।"
अशोकनगर में पहले ही मिली थी राहत
यह पहली बार नहीं है जब सिंधिया ने अपने संसदीय क्षेत्र के किसानों की चिंता को प्राथमिकता दी है। बीते दिनों अशोकनगर जिले में भी डीएपी खाद की कमी की शिकायतें सामने आई थीं। तब भी सिंधिया ने तुरंत हस्तक्षेप किया और 1080 मीट्रिक टन डीएपी खाद की आपूर्ति सुनिश्चित की। इस कदम से अशोकनगर के किसानों को खरीफ सीजन की तैयारी में बड़ी राहत मिली थी। अब शिवपुरी में 2763 मीट्रिक टन खाद की आपूर्ति ने उनके इस संकल्प को और मजबूत किया है कि "कोई भी किसान खाद के अभाव में परेशान नहीं होगा।"
खाद का वितरण, पारदर्शी और त्वरित व्यवस्था
शिवपुरी में पहुंची 2763 मीट्रिक टन डीएपी खाद का वितरण व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित किया गया है। इस खाद को निम्नलिखित तरीके से वितरित किया जाएगा:
- मार्कफेड संस्था: 1150 मीट्रिक टन खाद, जो जिले भर में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचेगी।
- 35 सहकारी समितियां: 875 मीट्रिक टन खाद, जो ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे और मझोले किसानों को उपलब्ध होगी।
- निजी वितरक: 350 मीट्रिक टन खाद, जो खुले बाजार में किसानों की जरूरतों को पूरा करेगी।
- शेष खाद: जिले के अन्य हिस्सों में जरूरत के अनुसार वितरित की जाएगी।
- जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि खाद का वितरण पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर हो, और किसी भी किसान को अधिक कीमत या कालाबाजारी का सामना न करना पड़े। इसके लिए POS मशीन के जरिए आधार कार्ड आधारित खाद खरीद को अनिवार्य किया गया है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और खाद का स्टॉक ऑनलाइन ट्रैक किया जा सके।
केंद्र सरकार की सब्सिडी, किसानों को सस्ती खाद
यह उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने डीएपी खाद की कीमतों को स्थिर रखने के लिए 2025 में बड़े पैमाने पर सब्सिडी प्रदान की है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 3850 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को मंजूरी दी, जिसके तहत डीएपी खाद की कीमत 1350 रुपये प्रति 50 किलो बोरी पर स्थिर रखी गई है। वैश्विक बाजार में डीएपी की कीमतें 2400 रुपये प्रति बोरी तक पहुंचने के बावजूद, केंद्र सरकार ने 1200 रुपये प्रति बोरी की सब्सिडी देकर किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, "लाल सागर संकट और भू-राजनीतिक तनावों के कारण खाद आयात की लागत बढ़ी है, लेकिन पीएम मोदी के नेतृत्व में हमने सुनिश्चित किया कि इसका बोझ किसानों पर न पड़े।"
शिवपुरी और अशोकनगर में डीएपी खाद की समय पर आपूर्ति इस नीति का प्रत्यक्ष उदाहरण है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस सब्सिडी का लाभ अपने क्षेत्र के किसानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
किसानों की आवाज: "सिंधिया जी हमारे मसीहा"
शिवपुरी में डीएपी खाद की रैक पहुंचने के बाद किसानों में उत्साह का माहौल है। स्थानीय किसान राम सिंह राठौर ने कहा, "सिंधिया जी ने हमारी पुकार सुनी। खाद के बिना हमारी फसल की तैयारी अधूरी थी। अब समय पर बुवाई हो सकेगी, और हमारा परिवार खुशहाल रहेगा।"
किसान नेता श्याम लाल कुशवाह ने बताया, "चाहे सिंचाई के लिए पानी हो, बीज की व्यवस्था हो, या अब खाद की आपूर्ति, सिंधिया जी ने हमेशा किसानों की चिंता की है। उनकी वजह से हमें केंद्र सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है।"
अशोकनगर के किसान कैलाश नारायण ने 1080 मीट्रिक टन खाद की आपूर्ति को याद करते हुए कहा, "पिछले महीने जब खाद की कमी थी, तब भी सिंधिया जी ने हमें निराश नहीं किया। अब शिवपुरी के भाइयों को भी राहत मिली है। यह हमारे लिए दीवाली जैसा पल है।"
सिंधिया की प्रतिबद्धता, किसान पहले, राजनीति बाद में
ज्योतिरादित्य सिंधिया, जो गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं, ने हमेशा अपने क्षेत्र की समस्याओं को प्राथमिकता दी है। चाहे वह सिंचाई परियोजनाएं हों, कृषि बुनियादी ढांचा हो, या खाद और बीज की आपूर्ति, सिंधिया ने व्यक्तिगत स्तर पर हस्तक्षेप कर समाधान निकाले हैं। उनकी यह पहल केवल एक सांसद की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके किसानों के प्रति पारिवारिक लगाव को दर्शाती है।
कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया, "सिंधिया जी ने न केवल खाद की आपूर्ति के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय स्थापित किया, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि खाद का वितरण समय पर और पारदर्शी तरीके से हो। यह उनके नेतृत्व और किसान-केंद्रित दृष्टिकोण का परिणाम है।"
Jyotiraditya Scindia: मध्य प्रदेश में खाद की स्थिति
मध्य प्रदेश सरकार ने भी खाद की उपलब्धता को लेकर ठोस कदम उठाए हैं। कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने हाल ही में कहा था, "प्रदेश में यूरिया और डीएपी की कोई कमी नहीं है। रबी 2024 के लिए 6.55 लाख मीट्रिक टन खाद का अग्रिम भंडारण किया गया था, और खरीफ 2025 के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था है।"
हालांकि, स्थानीय स्तर पर वितरण में कभी-कभी देरी और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आती हैं। शिवपुरी और अशोकनगर में सिंधिया की पहल ने इन समस्याओं को काफी हद तक हल किया है। केंद्र सरकार की 37,216 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी और 3850 करोड़ रुपये के विशेष डीएपी पैकेज ने भी मध्य प्रदेश के किसानों को सस्ती खाद उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- राजनीतिक चर्चा: विपक्षी कांग्रेस ने हाल ही में खंडवा की घटना को लेकर सरकार पर जंगलराज का आरोप लगाया था। ऐसे में सिंधिया की यह पहल भाजपा के लिए एक सकारात्मक जवाब है, जो उनकी किसान-केंद्रित नीतियों को रेखांकित करता है।
- भविष्य की दिशा
- सिंधिया की इस पहल ने शिवपुरी और अशोकनगर के किसानों को तात्कालिक राहत तो दी है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए कुछ कदम जरूरी हैं:
- खाद भंडारण सुविधाएं: जिले में स्थानीय स्तर पर खाद भंडारण गोदामों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि आपूर्ति में देरी न हो।
- कालाबाजारी पर रोक: खाद वितरण में पारदर्शिता के लिए डिजिटल निगरानी और शिकायत निवारण तंत्र को और मजबूत किया जाए।
- कृषि बुनियादी ढांचा: सिंधिया के नेतृत्व में सिंचाई परियोजनाओं और कृषि प्रशिक्षण केंद्रों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि किसानों की उत्पादकता बढ़े।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में खरीफ सीजन के लिए सारथी पोर्टल और सीड ट्रेसेबिलिटी सिस्टम की शुरुआत की है, जो खाद और बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा। शिवपुरी और अशोकनगर में इन योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन सिंधिया की प्राथमिकता हो सकता है।












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