MP News: चोरल के जंगलों की अवैध कटाई: दोषी वन अधिकारी की पेंशन से वसूली, 3227 कीमती वृक्षों की कटी शाखाएं
MP News: मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के चोरल क्षेत्र में जंगलों की अवैध कटाई को लेकर वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। तत्कालीन उप वन मंडल अधिकारी आरएन सक्सेना और गंजबासौदा में उपवन मंडल अधिकारी रहे सहायक वन संरक्षक पर कार्रवाई करते हुए, उनकी पेंशन से वनक्षेत्र को हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी।
इन अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता के कारण 3227 कीमती हरे-भरे वृक्षों की अवैध कटाई हुई, जिसकी भरपाई अब विभाग द्वारा की जाएगी।

क्या हुआ था?
चोरल वन परिक्षेत्र में हुई इस अवैध कटाई में 227 बेशकीमती हरे वृक्षों का नुकसान हुआ। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस घटना के बारे में जानकारी मिलने के बावजूद तत्कालीन उप वन मंडल अधिकारी ने किसी भी दोषी के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की। इस लापरवाही के कारण क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ और प्राकृतिक संसाधनों की हानि भी हुई।
वन विभाग ने अपनी जांच में पाया कि इस अनियमितता में सहायक वन संरक्षक और अन्य अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध थी। आरोप है कि उन्होंने अपने कर्तव्यों का निर्वहन ठीक से नहीं किया, जिसके चलते इस बड़ी पर्यावरणीय क्षति का सामना करना पड़ा।
अधिकारियों ने मानी गलती
रिटायर हो चुके अधिकारी आरएन सक्सेना ने अपनी लापरवाही को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने वन विभाग के समक्ष यह मान लिया कि उनकी उदासीनता के कारण यह घटना घटी। इसके परिणामस्वरूप, विभाग ने एक अहम कदम उठाया है। अब उनकी पेंशन से 5 साल तक 10% राशि काटकर इस नुकसान की भरपाई की जाएगी।
रोपण और सुरक्षा में अनियमितता
इसके अलावा, गंजबासौदा में उपवन मंडल अधिकारी रहे सहायक वन संरक्षक आरएन सक्सेना और सिरोंज में प्रभारी उपवन मंडल अधिकारी को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने बिगड़े हुए वनों के सुधार और वृक्षारोपण कार्य में अनियमितताएं कीं। तत्कालीन वन परिक्षेत्र अधिकारी दक्षिण लटेरी ने बीट मुस्कुरा क्षेत्र में वृक्षारोपण के लिए क्षेत्रीय तैयारी और सुरक्षा में लापरवाही बरती थी। इस कृत्य के लिए भी विभाग ने जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विभाग की कार्रवाई
वन विभाग ने इस पूरे मामले में गंभीरता दिखाई है और कहा है कि यह घटना अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुई है, इसलिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आरोपियों की पेंशन से वसूली के अलावा, उन पर विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी, जिससे कि भविष्य में ऐसे कृत्य न हों।
इस कार्रवाई का उद्देश्य न केवल अधिकारियों को जवाबदेह ठहराना है, बल्कि वन संरक्षण और पर्यावरणीय सुरक्षा के प्रति सख्त रुख अपनाने का भी संकेत देना है। वन क्षेत्र में अनियमितताओं और लापरवाही के मामलों को गंभीरता से लेते हुए, वन विभाग ने इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने का निर्णय लिया है।
प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा की आवश्यकता
यह घटना प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक गंभीर चेतावनी है। राज्य सरकार और वन विभाग द्वारा इस प्रकार के मामलों में कड़ी निगरानी और कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इंदौर के चोरल में हुई यह अवैध कटाई न केवल वन क्षेत्र की हानि का कारण बनी, बल्कि यह पर्यावरणीय असंतुलन भी पैदा कर सकती थी।
अब वन विभाग की इस सख्त कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि राज्य में वन संरक्षण के मामलों में कोई भी ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कदम इस दिशा में एक अहम प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जो प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।












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