देश के लिए जान देंगे, लेकिन इज्जत भी चाहिए, भारत-पाक तनाव के बीच जवान से ट्रेन में रिश्वत की मांग, TTE सस्पेंड
MP News: जब सीमा पर गोलियां चल रही हों और देश युद्ध के मुहाने पर हो, तब एक सैनिक से देश सेवा की राह में रिश्वत मांगी जाए-यह किसी भी लोकतंत्र के लिए शर्म की बात है। भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक ऐसी ही घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।
मालवा एक्सप्रेस में ड्यूटी पर लौट रहे सूबेदार विनोद कुमार दुबे और उनके साथी अग्निवीर से टीटीई द्वारा रिश्वत वसूली की घटना का वीडियो वायरल होने के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया। रेलवे ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोषी टीटीई को सस्पेंड कर दिया है।

आपात स्थिति में ड्यूटी पर लौट रहे थे जवान
ग्वालियर निवासी सूबेदार विनोद दुबे, जो 20 साल से अधिक सेवा दे चुके हैं, छुट्टी पर घर आए थे। लेकिन भारत-पाक सीमा पर हालात बिगड़ने के चलते 8 मई को उन्हें तत्काल जम्मू लौटने के आदेश मिले। टिकट की व्यवस्था करने का समय नहीं था, तो उन्होंने जनरल टिकट लेकर मालवा एक्सप्रेस पकड़ी। उनके साथ थे अग्निवीर जाहिर खान। दोनों ड्यूटी के प्रति समर्पित थे, लेकिन ट्रेन में उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंची।
"तुम जनरल हो या कर्नल, फर्क नहीं पड़ता" - टीटीई की धमकी
9 मई की सुबह, सोनीपत और पानीपत के बीच, टीटीई दलजीत सिंह ने टिकट मांगा। पहचान पत्र और जनरल टिकट दिखाने के बावजूद, उन्होंने न सुनने की जिद पकड़ी। विनोद दुबे ने बताया कि उन्होंने बार-बार समझाया कि वे ड्यूटी पर हैं, लेकिन टीटीई ने 150 रुपये की रिश्वत मांगी, जो जाहिर खान ने दे दी। इस पर कोई रसीद नहीं दी गई, केवल टिकट पर कुछ लिख दिया गया। जब दुबे ने विरोध करते हुए वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू की, तो टीटीई ने जवाब दिया-"मुझे फर्क नहीं पड़ता तुम कौन हो, जेल भेज दूंगा।"
वीडियो वायरल, जनता में गुस्सा
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। सैनिकों के साथ हुए व्यवहार को देखकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। एक यूजर ने लिखा, "देश की रक्षा करने वाले जवान को ट्रेन में इज्जत तक नहीं मिलती, तो हम क्या मुंह दिखाएंगे?" रेलवे पर जवानों के लिए विशेष कोच और सुविधाओं की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है।
TTE in Malwa Express: रेलवे की कार्रवाई, टीटीई सस्पेंड, जांच जारी
रेलवे ने जनता की भावना को देखते हुए तेजी से कार्रवाई की। लुधियाना डिवीजन के अंतर्गत आने वाले टीटीई दलजीत सिंह को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया है। भोपाल डीआरएम देवाशीष त्रिपाठी ने कहा, "जवानों की सेवा सर्वोपरि है। जांच जारी है और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।" रेलवे ने सभी कर्मचारियों को निर्देश जारी किए हैं कि ड्यूटी पर तैनात सैनिकों को सर्वोच्च प्राथमिकता और सम्मान दिया जाए।
भारत-पाक तनाव के बीच जवानों की छुट्टियां रद्द
23 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया, जिसके तहत पीओके में आतंकी ठिकानों पर हमले किए गए। जवाब में पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइल हमलों की कोशिश की। इसके चलते सेना ने जवानों की छुट्टियां रद्द कर दीं और उन्हें तत्काल ड्यूटी पर लौटने के आदेश दिए।
ऐसे में जवानों की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है, लेकिन यह घटना बताती है कि हम उन्हें वो सहयोग और सम्मान नहीं दे पा रहे, जिसके वे असली हकदार हैं।
TTE in Malwa Express: "हम देश के लिए मरने को तैयार हैं, लेकिन अपमान नहीं सह सकते"
सूबेदार विनोद दुबे कहते हैं, "हमें आपात कॉल आते ही घर छोड़ना पड़ा। लेकिन ट्रेन में हमारा आत्मसम्मान कुचला गया। हमें इस देश से कुछ नहीं चाहिए, सिर्फ इज्जत चाहिए।" अग्निवीर जाहिर खान कहते हैं, "हम युवा हैं और देश के लिए कुछ करना चाहते हैं। लेकिन इस तरह की घटनाएं निराश कर देती हैं। फिर भी, हमारी ड्यूटी सर्वोपरि है।"
समाधान क्या हो सकता है?
- ड्यूटी पर जा रहे सैनिकों के लिए रेलवे में विशेष कोटा या सीट आरक्षित हों।
- हर ट्रेन में "सैनिक सहायता अधिकारी" की तैनाती हो, जो ऐसे मामलों को तुरंत सुलझाए।
- टीटीई और रेलवे कर्मचारियों को संवेदनशीलता का प्रशिक्षण दिया जाए।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जवान पहचान पत्र से यात्रा मान्यता की व्यवस्था हो।
जवानों के सम्मान की रक्षा, देश की नैतिक जिम्मेदारी
यह घटना हमें याद दिलाती है कि राष्ट्र केवल सीमाओं से नहीं, बल्कि उन लोगों के सम्मान से बनता है, जो इन सीमाओं की रक्षा करते हैं। जवानों का अपमान पूरे समाज का अपमान है। टीटीई का सस्पेंशन एक शुरुआत है, लेकिन जब तक हर सिस्टम जवानों को विशेष नहीं, सामान्य सम्मान देना नहीं सीखता, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी।












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