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Jabalpur News: जबलपुर में जिंदा चाचा को मृत घोषित कर जमीन हड़पने का बड़ा मामला, पत्नी ने किया बड़ा खुलासा

Jabalpur News: जबलपुर जिले के चरगवां थाना क्षेत्र के बैनी पिपरिया गांव में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां एक व्यक्ति को उसके चार भतीजों ने कागजों में मरा घोषित कर दिया और फिर उसकी 14 एकड़ पैतृक जमीन हड़प ली।

यह घटना 13 साल बाद सामने आई, जब व्यक्ति की वास्तविक मृत्यु हो गई, और पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी।

In Jabalpur land was grabbed by declaring alive uncle dead wife revealed Charagwan Pipariya

मामला कैसे सामने आया

हल्के प्रसाद गौड़ (62) के पास 14 एकड़ जमीन थी। मार्च 2012 में उनके चार भतीजों - मुखतियार सिंह गौड़, अठई सिंह, रामप्रसाद और उनके रिश्तेदार हाकम सिंह ने एक साजिश के तहत पटवारी राजेंद्र कुंजे के साथ मिलकर हल्के प्रसाद का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया। इसके बाद कागजों में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

मुखतियार सिंह ने पटवारी के माध्यम से शहपुरा एसडीएम को एक शपथ पत्र प्रस्तुत किया। इस शपथ पत्र में बताया गया कि हल्के प्रसाद अविवाहित हैं और उनके परिवार में कोई नहीं है, इसलिए उनकी जमीन का वारिस मुखतियार सिंह और उनके भाइयों को बनाया जाए। पटवारी ने इस शपथ पत्र के आधार पर अपनी जांच रिपोर्ट भी तैयार की, जिसमें बताया गया कि हल्के प्रसाद के परिवार में कोई नहीं है और वह अविवाहित थे।

In Jabalpur land was grabbed by declaring alive uncle dead wife revealed Charagwan Pipariya

जमीन की हड़पने की प्रक्रिया

पटवारी की रिपोर्ट के बाद, मुखतियार सिंह ने 2016 में एक नई बही बनवाकर हल्के प्रसाद की 14 एकड़ जमीन को चार हिस्सों में बांट दिया। इन हिस्सों को मुखतियार सिंह, अठई सिंह, रामप्रसाद और हाकम सिंह के नाम कर दिया गया। इस तरह से इन चारों आरोपियों ने हल्के प्रसाद की संपत्ति पर कब्जा कर लिया और उसे अपनी संपत्ति बना लिया।

घटना का खुलासा और कार्रवाई

यह पूरा मामला लगभग तीन महीने बाद खुलासा हुआ, जब हल्के प्रसाद की वास्तविक मृत्यु हो गई। उनके परिवार के सदस्यों ने इस साजिश का खुलासा किया और पुलिस से शिकायत की। इसके बाद, पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू की और पाया कि चार भतीजों और पटवारी ने मिलकर हल्के प्रसाद के साथ धोखाधड़ी की थी।

पुलिस ने पटवारी राजेंद्र कुंजे सहित पांच आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इन आरोपियों पर जमीन हड़पने, फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं।

घटना का खुलासा

हल्के प्रसाद गौड़ (62) की मृत्यु की खबर उसके भतीजों और पटवारी द्वारा पहले ही कागजों में फैलाई जा चुकी थी। उन्होंने हल्के प्रसाद का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करवाया था। इसके बाद मुखतियार सिंह, अठई सिंह, रामप्रसाद और हाकम सिंह ने पटवारी राजेंद्र कुंजे की मदद से हल्के प्रसाद की 14 एकड़ जमीन को अपनी नामी संपत्ति बना लिया था। यह सब कागजों में सही दिखाई दिया था, लेकिन असलियत तब सामने आई जब हल्के प्रसाद की पत्नी शांति बाई अपनी बेटियों के साथ गांव लौटीं और वहां अपनी संपत्ति पर कब्जे को देखा।

शांति बाई का गांव लौटना

मई 2012 में हल्के प्रसाद की असल मौत के बाद उसकी पत्नी शांति बाई और दोनों बेटियां कुछ समय बाद अपने घर लौट गईं। नवंबर 2024 में शांति बाई अपनी बेटियों के साथ रिश्तेदारी में एक कार्यक्रम के लिए गांव पहुंचीं। जब वे वहां पहुंचीं, तो उन्होंने देखा कि मुखतियार सिंह और उसके भाइयों ने उनकी जमीन पर खेती शुरू कर दी थी।

जब शांति बाई ने इस बारे में पूछा, तो मुखतियार सिंह ने जवाब दिया कि हल्के प्रसाद ने अपनी मृत्यु से कुछ महीने पहले अपनी जमीन उनके नाम कर दी थी। मुखतियार सिंह ने शांति बाई को और उनकी बेटियों को नई बही दिखाकर विश्वास दिलाया, लेकिन शांति बाई ने इसे फर्जी बताते हुए उनसे जमीन छोड़ने को कहा।

पटवारी का सहयोग और जांच

शांति बाई को जब उनकी जमीन पर कब्जे का पूरा मामला समझ में आया, तो उन्होंने पटवारी राजेंद्र कुंजे से जानकारी ली। पटवारी ने उन्हें बताया कि हल्के प्रसाद ने अपनी इच्छा से अपनी जमीन भतीजों के नाम कर दी थी, और इसके लिए बही भी तैयार की गई थी।

इसके बाद, शांति बाई ने गांव के मालगुजार से परामर्श लिया और पुलिस में शिकायत करने का निर्णय लिया। 29 नवंबर 2024 को उन्होंने जबलपुर एसपी संपत उपाध्याय से शिकायत की। एसपी ने सीएसपी सुनील नेमा को जांच के आदेश दिए।

पुलिस की जांच और एफआईआर

जांच के दौरान मुखतियार सिंह और उनके भाइयों द्वारा हल्के प्रसाद का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करने और पटवारी राजेंद्र कुंजे के साथ मिलकर जमीन हड़पने का खुलासा हुआ। पुलिस ने पटवारी के साथ कोटवार के भी शामिल होने का खुलासा किया, जो इस पूरी साजिश में भागीदार था।

जांच रिपोर्ट के आधार पर, 5 आरोपियों के खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी), 408 (विश्वास का उल्लंघन), 467 (फर्जी दस्तावेज बनाना), 477 (रिकॉर्ड में हेरफेर), और 34 (साझा मंशा के तहत अपराध) के तहत मामला दर्ज किया गया।

पटवारी और अन्य आरोपियों की साजिश

पटवारी राजेंद्र कुंजे ने जानबूझकर खसरा नंबर 308/1, 308/2, 309/1, 309/2, 310, 311/1, 311/2 के भूमि राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर किया। जांच में यह भी पता चला कि पटवारी ने मुखतियार सिंह और उनके भाइयों से 80 हजार रुपए में सौदा किया था, जिसमें से पहली किश्त 40 हजार रुपए पहले ही ले ली गई थी।

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