MP News: IAS मीट में युवा आईएएस नेहा मारव्या का क्यों छलका दर्द, वाट्सऐप पोस्ट ने मचाई हलचल!
MP IAS News: मध्य प्रदेश कैडर की आईएएस अफसर नेहा मारव्या ने हाल ही में अपने अनुभव साझा करते हुए आईएएस सर्विस मीट के एक वॉट्सऐप ग्रुप में अपने दर्द और निराशा को व्यक्त किया।
उन्होंने अपने 14 साल के करियर में एक भी बार फील्ड पोस्टिंग न मिलने की बात कही और बताया कि पिछले 9 महीनों से वे केवल ऑफिस आती हैं और चली जाती हैं। इस दौरान उनका काम काफी सीमित और बिना किसी खास जिम्मेदारी के था, जो उनके लिए एक मानसिक चुनौती बन चुका था।

नेहा ने अपनी स्थिति को इस प्रकार व्यक्त किया
मध्य प्रदेश कैडर की आईएएस अफसर नेहा मारव्या ने हाल ही में अपने 14 साल के करियर के अनुभव को साझा करते हुए यह दुःख व्यक्त किया कि उन्हें फील्ड पोस्टिंग का कभी भी अनुभव नहीं मिला। उन्होंने एक व्हाट्सएप ग्रुप में लिखा कि उन्हें इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए बहुत दुख होता है कि उनकी 14 साल की नौकरी में एक भी बार फील्ड की पोस्टिंग नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि साढ़े तीन साल तक उन्हें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव के तौर पर बिठाया गया था, लेकिन वहां भी उन्हें कोई विशेष कार्य नहीं सौंपा गया। इसके बाद उन्हें राजस्व विभाग में उप सचिव के रूप में नियुक्त किया गया, जहां उन्हें दो साल से ज्यादा समय तक कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी गई।
नेहा ने लिखा, "नौ महीने से मैं सिर्फ ऑफिस आती हूं और चली जाती हूं। दीवारों में मुझे कैद करके रख दिया गया है।" यह स्थिति उनके लिए बहुत मानसिक दबाव पैदा करने वाली थी। उन्होंने आगे कहा कि इस अकेलेपन को उन्होंने बहुत गहरे से महसूस किया है। इस वजह से वे अपने सभी जूनियर अधिकारियों को यह विश्वास दिलाती हैं कि कोई भी जूनियर अकेला नहीं रहेगा, और वह उनकी हर संभव मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहेंगी, चाहे वे किसी भी पद पर हों।
आईएएस अधिकारी ज्ञानेश्वर पाटिल का प्रस्ताव
हाल ही में युवा आरआर आईएएस के नाम से बने एक व्हाट्सएप ग्रुप में एक कांसेप्ट नोट पोस्ट किया गया, जिसे आईएएस अधिकारी ज्ञानेश्वर पाटिल ने लिखा था। पाटिल ने इस नोट में सीधी भर्ती के आईएएस अधिकारियों के लिए एक अहम प्रस्ताव रखा, जिसमें उन्होंने कहा कि 14 साल की नौकरी में इन अधिकारियों को कम से कम चार साल की कलेक्टरी मिलनी चाहिए।
पाटिल का मानना है कि फील्ड का अनुभव उन अधिकारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कलेक्टर के रूप में काम करने से अधिकारियों को न केवल स्थानीय प्रशासन, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक, सामाजिक, और राजनीतिक परिस्थितियों को भी समझने का मौका मिलता है। इससे अधिकारियों की क्षमता में सुधार होता है और वे अपने कार्य में अधिक प्रभावी साबित होते हैं। कलेक्टर के पद पर रहते हुए, अधिकारियों को प्रशासनिक फैसलों, स्थानीय समस्याओं और जनहित से संबंधित मुद्दों पर काम करने का अवसर मिलता है, जो उनके भविष्य के प्रशासनिक कार्यों के लिए फायदेमंद होता है।
कौन है आईएएस नेहा मारव्या
नेहा मारव्या मध्य प्रदेश कैडर की 2011 बैच की आईएएस अफसर हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की परीक्षा पास की और 2011 में आईएएस अधिकारी के रूप में चयनित हुईं।
पोस्टिंग और कार्यक्षेत्र
नेहा मारव्या को 2013-2014 में जबलपुर में पोस्टिंग मिली थी, जहां उन्होंने महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्य किया। उन्होंने SDM (सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट) और जिला पंचायत CEO के तौर पर अपनी सेवाएं दीं। इन पदों पर कार्य करते हुए, उन्होंने जिले की प्रशासनिक व्यवस्थाओं और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर काम किया और स्थानीय सरकार के कार्यों को बेहतर बनाने का प्रयास किया।
प्रभारी कलेक्टर के तौर पर विवाद
नेहा मारव्या का नाम एक विवाद में भी जुड़ा था, जब वे प्रभारी कलेक्टर के रूप में कार्य कर रही थीं। यह विवाद खेल मंत्री यशोधरा राजे से जुड़ा था और बाद में यह मामला मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक पहुंच गया था। इस विवाद की वजह से नेहा मारव्या की कार्यशैली और उनकी प्रशासनिक क्षमता के बारे में चर्चा हुई, लेकिन उनका प्रशासनिक कार्य इसी से प्रभावित नहीं हुआ।
आईएएस अफसर के तौर पर कार्यशैली और विवाद
नेहा मारव्या अपनी कार्यशैली को लेकर जानी जाती हैं, लेकिन कई बार उनका प्रशासनिक निर्णय और कार्यशैली विवादों के घेरे में भी आई। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने लगातार खुद को एक सशक्त और प्रभावी अधिकारी के रूप में साबित किया।












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