MP News: रतलाम में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुली: ठेले पर डिलीवरी, नवजात की मौत, अस्पताल स्टाफ की लापरवाही
मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के सैलाना में एक दिल दहला देने वाली घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को उजागर कर दिया है। यहाँ एक गर्भवती महिला को अस्पताल स्टाफ की कथित लापरवाही के चलते ठेले पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा, लेकिन नवजात की मौत हो गई।
इस घटना का सीसीटीवी फुटेज अब वायरल हो रहा है, जिसमें पति अपनी पत्नी को ठेले पर अस्पताल ले जाता दिख रहा है। इस मामले ने न सिर्फ स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

दो बार अस्पताल से लौटाया, तीसरी बार ठेले पर डिलीवरी
घटना 23 मार्च 2025 की है, जब सैलाना के कालिका माता मंदिर रोड निवासी कृष्णा ग्वाला अपनी पत्नी नीतू को प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सैलाना ले गया। सुबह 9 बजे पहली बार अस्पताल पहुँचने पर ड्यूटी पर मौजूद नर्स चेतना चारेल ने नीतू की जाँच की और कहा, "अभी डिलीवरी में दो-तीन दिन का समय है।" बिना भर्ती किए ही दंपति को घर वापस भेज दिया गया।
रात करीब 1 बजे नीतू को फिर से तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। कृष्णा उसे दोबारा अस्पताल लेकर पहुँचा। इस बार ड्यूटी पर नर्स गायत्री पाटीदार थी। उसने जाँच के बाद कहा, "अभी डिलीवरी में 15 घंटे और लगेंगे।" नर्स ने नीतू को भर्ती करने से इनकार कर दिया और दंपति को फिर से घर लौटने के लिए कह दिया। लेकिन महज एक घंटे बाद, रात 2 बजे के आसपास, नीतू की हालत बिगड़ गई और उसे असहनीय दर्द होने लगा।
रात के अंधेरे में ठेले पर दौड़ा पति, रास्ते में ही डिलीवरी
हालत बिगड़ते देख कृष्णा ने तुरंत एक ठेले का इंतजाम किया। उसने अपनी पत्नी को ठेले पर लिटाया और तेजी से अस्पताल की ओर दौड़ा। लेकिन रास्ते में ही नीतू की डिलीवरी शुरू हो गई। रात करीब 3 बजे जब वे अस्पताल पहुँचे, तब तक बच्चे के पैर बाहर आ चुके थे, लेकिन सिर अभी भी अंदर था। ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने किसी तरह डिलीवरी पूरी करवाई, लेकिन नवजात मृत पैदा हुआ। इस दुखद घटना ने कृष्णा और उसके परिवार को सदमे में डाल दिया।
सीसीटीवी फुटेज वायरल, लोगों में आक्रोश
इस घटना का एक सीसीटीवी फुटेज अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। फुटेज में साफ दिख रहा है कि रात के अंधेरे में कृष्णा अपनी पत्नी को ठेले पर लिटाकर अस्पताल की ओर भाग रहा है। यह दृश्य देखकर लोग हैरान हैं और स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा, "यह बहुत दुखद है। अगर अस्पताल ने समय पर भर्ती कर लिया होता, तो शायद बच्चे की जान बच सकती थी।" एक अन्य व्यक्ति ने कहा, "यह स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की हद है। गरीबों के लिए अस्पताल में कोई सुविधा नहीं है।"
अस्पताल स्टाफ पर लापरवाही का आरोप
कृष्णा ने इस घटना के लिए अस्पताल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। उसका कहना है कि अगर पहली या दूसरी बार में उसकी पत्नी को भर्ती कर लिया गया होता, तो यह हादसा नहीं होता। उसने बताया, "मैंने अपनी पत्नी को दो बार अस्पताल ले जाकर दिखाया, लेकिन दोनों बार हमें लौटा दिया गया। अगर समय पर इलाज शुरू हो जाता, तो मेरा बच्चा आज जिंदा होता।" इस घटना के बाद कृष्णा ने सैलाना के एसडीएम मनीष जैन को शिकायत दी, जिसमें उसने अस्पताल स्टाफ की लापरवाही का आरोप लगाया और कार्रवाई की माँग की।
एसडीएम ने दिए जांच के आदेश
एसडीएम मनीष जैन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा, "यह एक दुखद घटना है। हमने मामले की जांच शुरू कर दी है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।" इसके साथ ही, जिला प्रशासन ने भी इस मामले को संज्ञान में लिया है। सूत्रों के अनुसार, जांच में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर शैलेश डांगी, नर्सिंग ऑफिसर चेतना चारेल और गायत्री पाटीदार की लापरवाही सामने आई है। इस संबंध में कलेक्टर के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी ने जाँच शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल
यह घटना मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को उजागर करती है। सैलाना जैसे छोटे कस्बों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं, न ही जरूरी सुविधाएँ। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की लापरवाही सामने आई हो। पिछले साल भी सैलाना में एक गर्भवती महिला को समय पर इलाज न मिलने के कारण गंभीर हालत में रतलाम रेफर करना पड़ा था।
सोशल मीडिया पर गुस्सा: "यह लापरवाही की हद है!"
सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर लोगों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है। एक यूजर ने लिखा, "यह लापरवाही की हद है। एक गरीब परिवार की जिंदगी बर्बाद हो गई, और अस्पताल स्टाफ को कोई फर्क नहीं पड़ता।" एक अन्य यूजर ने लिखा, "मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएँ नाम की कोई चीज नहीं है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।" कई लोगों ने इस घटना की तुलना हाल ही में सीधी जिले में हुई एक घटना से की, जहाँ एक गर्भवती महिला को समय पर एंबुलेंस न मिलने के कारण ठेले पर डिलीवरी करनी पड़ी थी, और वहाँ भी नवजात की मौत हो गई थी।
ऐसे मामले पहले भी आए सामने
यह कोई पहला मामला नहीं है जब मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही के चलते इस तरह की घटना हुई हो। नवंबर 2024 में सीधी जिले में उर्मिला रजक नाम की एक गर्भवती महिला को समय पर एंबुलेंस न मिलने के कारण ठेले पर डिलीवरी करनी पड़ी थी, और उसका नवजात मृत पैदा हुआ था। उस मामले में भी जाँच के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया था। इसी तरह, 2022 में धौलपुर (राजस्थान) में एक गर्भवती महिला को एंबुलेंस न मिलने पर मूंगफली के ठेले पर डिलीवरी करनी पड़ी थी। इन घटनाओं से साफ है कि ग्रामीण और छोटे कस्बों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
एक सवाल: क्या सरकार सबक लेगी?
यह घटना कई सवाल खड़े करती है। पहला सवाल यह कि क्या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भवती महिलाओं की सही जाँच के लिए प्रशिक्षित स्टाफ और जरूरी उपकरण हैं? दूसरा सवाल यह कि जब नीतू को दो बार अस्पताल लाया गया, तो उसे भर्ती क्यों नहीं किया गया? और तीसरा सवाल यह कि क्या इस तरह की घटनाओं के बाद सरकार और स्वास्थ्य विभाग कोई ठोस कदम उठाएंगे, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी न हो?












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