MP News: हरदा में नाव चलाने वाले के बेटे ने DSP बनकर सबको चौंकाया, मां ने सब्जी बेचकर कराई MPPSC की तैयारी
MP PSC Result 2019: लोकेश छापरे की कहानी एक अद्वितीय साहस और संघर्ष का परिचय कराती है। वे एमपीपीएससी-2019 में डीएसपी के रूप में चयनित होने के बाद अपने जीवन के एक महत्वपूर्ण पल का आनंद ले रहे हैं, परंतु इस सफलता के पीछे उनकी मेहनत और संघर्ष की कहानी भी है।
दरअसल, लोकेश ने भोपाल के एक पार्क में बैठकर अपनी परीक्षा की तैयारी की, जहां संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्यों को हासिल करने का संकल्प किया। उनके दोस्त शुभम गौर का साथ भी उनके संघर्ष को मजबूती प्रदान करता रहा है, जो रिजल्ट की खुशी में उनके साथ था।

शुभम ने कहा, "लोकेश की मेहनत और संघर्ष ने ही उसे डीएसपी बनने का मौका दिया है। उसने कभी हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए दिन-रात मेहनत की है।" शिवम ने जब लोकेश को फोन करके उसकी सफलता के बारे में बताया तो उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि वे DSP बन गया है।
लोकेश की माता जी ने बताया, "मेरे बेटे की मेहनत और संघर्ष ने हमें गर्वित महसूस कराया है। उसकी कड़ी मेहनत और आत्मसमर्पण के बावजूद, हमें उसके सफलता की पूरी तरह से आश्चर्य है।"
लोकेश छापरे की कहानी हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। उनका संघर्ष और अद्भुत इच्छाशक्ति उन्हें उनके लक्ष्यों की प्राप्ति में सफल बना दिखा रहा है। इस सफलता के साथ, लोकेश ने समाज को एक नई उम्मीद की किरण दिखाई है और उसके साथी युवाओं को भी साहस दिया है कि वे अपने सपनों की पूर्ति के लिए मेहनत और संघर्ष करें।
लोकेश के गांव के बारे में
हरदा जिले के खरदना गांव में, नर्मदा पर बने इंदिरा सागर बांध के बेक वॉटर के किनारे रहने वाले लोकेश के पिता गांव में नाव चलाने का काम करते हैं, जिससे उनकी आजीविका चलती है। उनकी मां ने बच्चों के लिए खेतों से लेकर फल-सब्जी बेचने तक का काम किया। प्राइमरी शिक्षा के बाद, लोकेश को नदी के दूसरे किनारे पर बसे बिछोला गांव के स्कूल में आगे पढ़ाई के लिए जाना पड़ता था। गांव की अजनाल नदी में नर्मदा बांध के बेक वॉटर मिल जाने से पानी बहुत ज्यादा होता था, जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
लोकेश ने 8वीं कक्षा तक हरदा के उत्कृष्ट विद्यालय में पढ़ाई की और फिर शासकीय हॉस्टल में रहकर अपनी पढ़ाई जारी रखी।
उन्होंने बताया, "कक्षा 10 में मेरी दोस्ती शुभम गौर से हुई, जो विज्ञानं विषय से 12वीं पास किया। मैंने भी आगे की पढ़ाई के लिए इंदौर जाकर आर्ट्स कॉमर्स कॉलेज में दाखिला लिया। आर्थिक समस्याओं के चलते, मैं किराए से रह रहा था। 2017-18 में इंदौर में भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट मैच हुआ था और एक दोस्त ने कहा कि वह मेरे लिए मैच के टिकट लाकर देगा, पर उनकी मांग 400 रुपये प्रति टिकट थी।"
लोकेश ने बताया कि वह भंवरकुआ से पैदल होल्कर स्टेडियम गए और रात 1 बजे से लेकर अगले दिन 4 बजे तक टिकट के लिए कतिपय लोगों की भीड़ में लगे रहे, लेकिन टिकट नहीं मिले। इसके बावजूद, उन्होंने कहा, "पुलिस की लाठी मिली, सो अलग हो जाऊं, पर कुछ उत्साही विचारों ने मुझे प्रेरित किया और मैंने अपनी पढ़ाई को जारी रखा।" इसके परिणामस्वरूप, उन्होंने ग्रेजुएशन पूरा किया।












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