Gestational Diabetes: प्रेगनेंसी में बढ़ रही डायबिटीज, मां-शिशु को जान का खतरा
गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज (Gestational Diabetes) मां और पेट में पल रहे शिशु के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नीना गिडियन के अनुसार समय-समय पर गर्भवती महिलाएं शुगर और बीपी की जांच जरूर कराएं।

जेस्टेशनल डायबिटीज (Gestational Diabetes) अर्थात गर्भावस्था में होने वाली शुगर की बीमारी है। बीते कुछ सालों में प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में डायबिटीज का खतरा बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञ इसके पीछे अनियमित दिनचर्या, खानपान सहित अन्य कारण बता रहे हैं। बता दें कि गर्भास्था के दौरान डायबिटीज होने से मां और गर्भस्थ्य शिशु दोनों को जान तक का खतरा हो सकता है।

स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त संचालक डॉ. नीना गिडियन बताती हैं कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को ओरल ग्लूकोज टोलरेंस टेस्ट करवाना बहुत जरूरी है। प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में डायबिटीज़ का प्रतिशत बढ़ रहा है। गर्भावस्था में डायबिटीज़ होने से मां और बच्चे दोनों को बहुत खतरा होता है। मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर का बड़ा कारण गैस्टेशनल डायबिटीज है।

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीना गिडियन के अनुसार जिसे हम शुरुआत में ही ओजीटीटी करवा के पता लगा सकते हैं और इलाज कर सकते हैं। क्योंकि इससे मां को बार- बार गर्भपात होता है, जन्म के बाद बच्चे का वजन 4 किलो से ज्यादा हो सकता है। इससे मां और बच्चे दोनों को खतरा होता है। उन्होंने बताया कि जेस्टेशनल डायबिटीज को लेकर सरकार अभियान चला रही है। 9 मार्च को नेशनल जेस्टेशनल डायबिटीज डे मनाया जाता है। इसके तहत सरकारी अस्पतालों से लेकर जिलों में विशेष जागरुकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि लोग इसको लेकर जागरूक हो सकें।
Recommended Video
सागर में जागरूकता रैली निकाली, डॉक्टर ने बचाव के उपाए बताए
ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. नीना गिडियन एवं सीएमएचओ डॉ. ममता तिमोरी के नेतृत्व में बीते रोज सागर जिला मुख्यालय पर जागरूकता रैली निकाली गई। डॉ. तिमोरी ने बताया कि सभी पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पताल में ये जांच निशुल्क हो रही हैं। कार्यक्रम के दौरान डॉ. आरएस जयंत, डॉ. संतोष पटेल, डॉ. श्वेता, स्टीफन, डॉ. सुनील जैन, डॉ. सरोज भूरिया, डॉ. किरण सिंह, सीएचओ जॉली साबू सहित अस्पताल का स्टाफ मौजूद रहा।












Click it and Unblock the Notifications